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जंगे आजादी में मौलाना आजाद के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 28 Feb 2022 01:32 AM IST
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The contribution of Maulana Azad in the war of independence cannot be forgotten.
मुरादाबाद। नेहरू युवा महिला समिति और एनसीपीयूएल के संयुक्त तत्वावधान में रविवार मौलाना अबुल कलाम आजाद और उर्दू सहाफत विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद सिर्फ एक शिक्षाविद व राजनेता ही नहीं थे बल्कि एक अच्छे पत्रकार भी थे। देश की जिन्होंने वर्ष 1912 में उर्दू अखबार अल हिलाल निकाला था। सभी वक्ताओं ने कहा कि जंगे आजादी में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
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ख्वाजा नगर स्थित एसआर पब्लिक स्कूल में नेहरू युवा महिला समिति हाथीपुर चित्तू के तत्वाधान में एनसीपीयूएल के सहयोग से आयोजित इस सेमीनार का आगाज कलाम-ए-पाक की तिलावत और शमा रोशन कर किया गया। सेमीनार को संबोधित करते हुए मुरादाबाद सांसद डा. एसटी हसन ने कहा कि जो कुर्बानियां देश के लिए मौलाना अबुल कलाम आजाद ने दी उन को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होेंने जहां इल्म की तरक्की के लिए काम किया वहीं उन्होंने एक नेता के रूप में कौम की रहनुमाई की। 1992 रामपुर से सांसद बनकर देश के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में बेमिसाल काम किए।
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जेएनयू के प्रोफेसर डॉ. शफी अयूब ने कहा कि यदि हम उर्दू सहाफत की बात करें और मौलाना आजाद का नाम नहीं ले तो वह उनके साथ नाइंसाफी होगी। क्योंकि मौलाना आजाद ने 1912 में उर्दू अखबार अल हिलाल निकालकर यह साबित कर दिया कि वह एक अच्छे पत्रकार भी थे। आजादी में मौलाना के द्वारा दी गई कुर्बानियां किसी से छिपी नहीं है। उल्लेखनीय कार्य करने पर मौलाना आजाद को भारत रत्न के सम्मान से नवाजा गया।
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सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता नासिर अजीज ने कहा कि मौलाना आजाद एक प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान थे। जहां वह एक कवि, लेखक, राजनेता, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ एक अच्छे पत्रकार भी थे। उन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता के लिए खिलाफत आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि मौलाना का उर्दू, फारसी, अरबी तथा अंग्रेजी भाषा पर पूर्ण नियंत्रण था। सेमीनार में मकाला निगार हुमा रानी एडवोकेट, उर्दू सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे ऑल इंडिया मुस्लिम फेडरेशन के क़ौमी सदर बाबर खान ने भी संबोधित किया। इस मौके पर मो. मारूफ, पार्षद नसीम पाशा, डॉ. फसीउर्रहमान बेग, डॉ. इश्हाक, सलीम अहमद, हाजी अतीक अहमद, मुहम्मद जान तुर्की, मेराज आलम आदि मौजूद रहे। आभार नेहरू युवा महिला समिति की अध्यक्ष ज़ेबा तबस्सुम ने जताया। संचालन सैयद आसिफ हसन ने किया।
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