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Moradabad News: कांठ में देवी भक्तों की आस्था का केंद्र है प्राचीन माता महाकाली मंदिर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 02:56 AM IST
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The ancient Mata Mahakali Temple in Kanth is a center of faith for devotees of the Goddess.
कांठ। नगर के प्राचीन माता महाकाली के मंदिर (माता के थान) से श्रद्धालुओं की बड़ी आस्था जुड़ी हुई है। यहां हर धर्म और मजहब के लोग माता के दरबार में मन्नतें मांगते हैं और वह पूरी भी हो जाती हैं। इस सिद्ध स्थल से हर किसी की आस्था जुड़ी है।
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कांठ नगर में पुरानी गुड मंडी स्थित प्राचीन माता महाकाली मंदिर एक प्राचीन धरोहर है, इसके जीर्णोद्धार का कार्य भी समय-समय पर कराया जाता रहता था। मान्यता है कि उत्तराखंड के काशीपुर वाली देवी कभी इसी मंदिर में विराजमान थीं। जहां अब मंदिर है, वहां कभी घना वन हुआ करता था। नगर व क्षेत्र के साथ ही दूर-दराज से भी लोग अपने बच्चों को झाड़ा लगवाने और मनौती पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाने के लिए रोज ही श्रद्धालु मंदिर पर पहुंचते हैं। इस मंदिर पर साल के चैत्र और शारदीय नवरात्रों में यहां महामाई के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। यहां की पुजारी रहीं इमरती देवी ने सालों तक मंदिर की सेवा की, कई वर्ष पहले उनका निधन हो गया था, अब उनके परिवार के लोग ही मंदिर की देखभाल और यहां सेवा करते-करते हैं।
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-- माता महाकाली मंदिर की यह है विशेषता
कांठ। नगर स्थित प्राचीन माता महाकाली के मंदिर (माता के थान) की विशेष है कि यहां से श्रद्धालुओं को मिलने वाली भभूत और झाड़े से बड़ी से बड़ी व्याधि कट जाती है। यहां पर मुस्लिम, सिख समुदाय के लोग भी अपने बच्चों को लाकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं। यहां पर कोई मजहब और जाति बिरादरी मायने नहीं रखती। माता के दरबार में पहुंचते ही श्रद्धालुओं का स्वयं ही मस्तक खुद-ब-खुद झुक जाता है। संवाद
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-- नवविवाहित जोड़े भी मंदिर पर लगाते हैं जात
कांठ। माता महाकाली मंदिर की मान्यता इतनी है कि शादी होने के अगले दिन यहां नवविवाहित जोड़े माता के इस दरबार में हाजिरी देकर माथा टेकते हुए जात लगाते हैं और अपने वैवाहिक जीवन के लिए माता महामाई से प्रार्थना करते हैं। उन्हें परिणाम स्वरूप यहां से आशीर्वाद में माता का प्रसाद मिलता है। इस मंदिर से मिलने वाले प्रसाद को पाने के लिए श्रद्धालु पूरी तरह से लालायित रहते हैं। संवाद
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