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Moradabad News: अंधविश्वास पड़ा भारी... सर्पदंश से छात्र ने जिंदगी हारी
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बिलारी। एक बार फिर अंधविश्वास भारी पड़ा तो छात्र की सांसें हार गईं। शनिवार को थांवला निवासी छात्र फैजान (22) को सोते समय सांप ने डसा तो परिजन अस्पताल की बजाय सपेरे के पास ले गए। कई घंटे झाड़फूंक के बाद हालत में सुधार न होने पर बिलारी सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
गांव थांवला निवासी अनीस अहमद का बेटा फैजान आइएफटीएम यूनिवर्सिटी में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था। शनिवार की तड़के घर पर सोते समय फैजान को सांप ने डस लिया, जिस पर उसकी नींद टूट गई। उसने परिजनों को बताया कि उसे किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया है, लेकिन परिजनों ने ध्यान नहीं दिया। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ी तो परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बजाए सपेरे के पास ले गए।
दिनभर परिजन फैजान को लेकर अलग-अलग सपेरे के पास लेकर दौड़ते रहे और सपेरे झाड़फूंक कर जान बचाने का दावा करते रहे, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। छात्र की हालत में सुधार होता न देख परिजन शनिवार की शाम बिलारी सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां पर चिकित्साधिकारी ने छात्र को मृत घोषित कर दिया।
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जीवन की आस में मृत छात्र को फिर से सपेरे के पास ले गए परिजन
ग्रामीणों के अनुसार, सीएचसी में छात्र को मृत घोषित करने के बाद भी परिजनों को उसके जीवित होने की आस थी। किसी व्यक्ति के बताने पर परिजन उसे फिर एक सपेरे के पास ले गए। जहां पर सपेरे ने झाड़फूंक और मंत्रों से छात्र को जीवित करने का प्रयास किया। घंटों के प्रयास के बाद शरीर में कोई हलचल ने देखकर सपेरे ने हाथ खड़े कर दिए, जिसके बाद परिजन उसका शव घर ले आए और रात में शव सुपुर्द ए खाक कर दिया। फैजान की मौत के बाद पिता अनीस, मां इशरत जहां के अलावा दो भाई और दो बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
चिकित्साधीक्षक बोले-समय से मिलता उपचार तो शायद बच जाती जान
चिकित्साधीक्षक डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि सांप ने छात्र को तड़के डसा था और परिजन उसे सीएचसी में शाम को लेकर पहुंचे थे। यदि परिजन सुबह ही छात्र को सीएचसी ले आते और समय से उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मरीजों के उपचार के लिए सीएचसी में पर्याप्त मात्रा में एंटी वेनम वैक्सीन मौजूद हैं। यदि सांप डस ले तो किसी सपेरे या झाड़फूंक कराने के बजाए शीघ्र अस्पताल लेकर पहुंचे और उपचार कराएं।
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गांव थांवला निवासी अनीस अहमद का बेटा फैजान आइएफटीएम यूनिवर्सिटी में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था। शनिवार की तड़के घर पर सोते समय फैजान को सांप ने डस लिया, जिस पर उसकी नींद टूट गई। उसने परिजनों को बताया कि उसे किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया है, लेकिन परिजनों ने ध्यान नहीं दिया। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ी तो परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बजाए सपेरे के पास ले गए।
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दिनभर परिजन फैजान को लेकर अलग-अलग सपेरे के पास लेकर दौड़ते रहे और सपेरे झाड़फूंक कर जान बचाने का दावा करते रहे, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। छात्र की हालत में सुधार होता न देख परिजन शनिवार की शाम बिलारी सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां पर चिकित्साधिकारी ने छात्र को मृत घोषित कर दिया।
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जीवन की आस में मृत छात्र को फिर से सपेरे के पास ले गए परिजन
ग्रामीणों के अनुसार, सीएचसी में छात्र को मृत घोषित करने के बाद भी परिजनों को उसके जीवित होने की आस थी। किसी व्यक्ति के बताने पर परिजन उसे फिर एक सपेरे के पास ले गए। जहां पर सपेरे ने झाड़फूंक और मंत्रों से छात्र को जीवित करने का प्रयास किया। घंटों के प्रयास के बाद शरीर में कोई हलचल ने देखकर सपेरे ने हाथ खड़े कर दिए, जिसके बाद परिजन उसका शव घर ले आए और रात में शव सुपुर्द ए खाक कर दिया। फैजान की मौत के बाद पिता अनीस, मां इशरत जहां के अलावा दो भाई और दो बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
चिकित्साधीक्षक बोले-समय से मिलता उपचार तो शायद बच जाती जान
चिकित्साधीक्षक डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि सांप ने छात्र को तड़के डसा था और परिजन उसे सीएचसी में शाम को लेकर पहुंचे थे। यदि परिजन सुबह ही छात्र को सीएचसी ले आते और समय से उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मरीजों के उपचार के लिए सीएचसी में पर्याप्त मात्रा में एंटी वेनम वैक्सीन मौजूद हैं। यदि सांप डस ले तो किसी सपेरे या झाड़फूंक कराने के बजाए शीघ्र अस्पताल लेकर पहुंचे और उपचार कराएं।