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दरोगा के बेटे ने फांसी लगाकर की आत्महत्या
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Thu, 29 Oct 2015 01:19 AM IST
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बीटेक में एडमिशन नहीं मिल पाने से आहत बीएससी के एक छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना मझोला थाना क्षेत्र के मोहल्ला खुशहालपुर में हुई। छात्र के पिता पुलिस महकमे में दरोगा हैं और बांदा में तैनात हैं। छात्र ने अपने सुसाइड नोट में कहा है कि वह अपने जीवन से निराश था और जीवन में कुछ खास नहीं कर सका, इसलिए उसने मरने का फैसला किया।
पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मूल रूप से बिलारी थाना क्षेत्र के गांव रामनगर गंगपुर निवासी बाबू सिंह पुलिस में एचसीपी हैं। उनका परिवार मझोला थाना क्षेत्र में मोहल्ला अलकनंदा कालोनी खुशहालपुर में रहता है। बुधवार को सुबह करीब ग्यारह बजे बाबू सिंह बांदा में अपनी ड्यूटी पर थे।
खुशहालपुर में घर पर उनकी पत्नी कौशल्या और बड़ा बेटा दीपक उर्फ दीपू था। जबकि एमआईटी से बीटेक कर रहा छोटा बेटा उमेश कश्यप अपने इंस्टीट्यूट गया था। कौशल्या छत पर कपड़े धोने चली गईं जबकि दीपक नीचे कमरे में बैठा था। आधा घंटा बाद जब कौशल्या नीचे आईं तो बेटे दीपक को फांसी पर लटका देख उनकी चीख निकल पड़ी।
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दीपक ने दुपट्टे का फंदा बनाकर कमरे में फांसी लगा ली। चीख पुकार सुनकर पड़ोसी दौड़कर आए तो किसी तरह दीपक को नीचे उतारा गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। दीपक केजीके कालेज में बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा।
लाश के पास ही सुसाइड नोट था जिसमें दीपक उर्फ दीपू ने लिखा था कि ‘मम्मी पापा, मुझे माफ कर देना, मैं जीवन से निराश हूूं, कुछ बन नहीं सका, कुछ कर नहीं सका, जीवन से मैं दुखी हूं और छोड़कर जा रहा हूं’। दरअसल दीपक बीटेक में दाखिला लेना चाहता था लेकिन उसका एडमिशन नहीं हो सका था जबकि उसका छोटा भाई बीटेक कर रहा है।
एसपी सुजाता सिंह का कहना है कि छात्र ने सुसाइड नोट लिखने के बाद आत्महत्या की है। फिर भी हम सीडीआर निकलवाकर पूरे मामले की पड़ताल कराएंगे ताकि यह पता चल सके कि आखिर क्यों एक युवा छात्र ऐसा कदम उठाने को मजबूर हुआ।
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पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मूल रूप से बिलारी थाना क्षेत्र के गांव रामनगर गंगपुर निवासी बाबू सिंह पुलिस में एचसीपी हैं। उनका परिवार मझोला थाना क्षेत्र में मोहल्ला अलकनंदा कालोनी खुशहालपुर में रहता है। बुधवार को सुबह करीब ग्यारह बजे बाबू सिंह बांदा में अपनी ड्यूटी पर थे।
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खुशहालपुर में घर पर उनकी पत्नी कौशल्या और बड़ा बेटा दीपक उर्फ दीपू था। जबकि एमआईटी से बीटेक कर रहा छोटा बेटा उमेश कश्यप अपने इंस्टीट्यूट गया था। कौशल्या छत पर कपड़े धोने चली गईं जबकि दीपक नीचे कमरे में बैठा था। आधा घंटा बाद जब कौशल्या नीचे आईं तो बेटे दीपक को फांसी पर लटका देख उनकी चीख निकल पड़ी।
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दीपक ने दुपट्टे का फंदा बनाकर कमरे में फांसी लगा ली। चीख पुकार सुनकर पड़ोसी दौड़कर आए तो किसी तरह दीपक को नीचे उतारा गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। दीपक केजीके कालेज में बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा।
लाश के पास ही सुसाइड नोट था जिसमें दीपक उर्फ दीपू ने लिखा था कि ‘मम्मी पापा, मुझे माफ कर देना, मैं जीवन से निराश हूूं, कुछ बन नहीं सका, कुछ कर नहीं सका, जीवन से मैं दुखी हूं और छोड़कर जा रहा हूं’। दरअसल दीपक बीटेक में दाखिला लेना चाहता था लेकिन उसका एडमिशन नहीं हो सका था जबकि उसका छोटा भाई बीटेक कर रहा है।
एसपी सुजाता सिंह का कहना है कि छात्र ने सुसाइड नोट लिखने के बाद आत्महत्या की है। फिर भी हम सीडीआर निकलवाकर पूरे मामले की पड़ताल कराएंगे ताकि यह पता चल सके कि आखिर क्यों एक युवा छात्र ऐसा कदम उठाने को मजबूर हुआ।