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दिन दहाड़े किया कत्ल, शाम होते ही ठिकाने लगा दी लाश
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Sat, 24 Oct 2015 02:15 AM IST
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पीडब्ल्यूडी के रिटायर इंजीनियर वीके गुप्ता की हत्या अगवानपुर पीएचसी के पास दिन दहाड़े की गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड को उनके ही कर्जदार धनश्याम और चतर सिंह ने अपने एक साथी विनोद के साथ मिलकर अंजाम दिया था। तीनों ने शाम होते ही लाश को जंगल में ठिकाने लगा दिया था।
एसएसपी नितिन तिवारी ने बताया कि गुरुवार दोपहर करीब बारह बजे शंकर विहार कालोनी निवासी रिटायर इंजीनियर वीके गुप्ता अचानक गायब हो गए थे। उनके दामाद आकाश मित्तल ने धनश्याम निवासी चक्कर की मिलक और विनोद निवासी चकमधपुरी थाना छजलैट को नामजद करते हुए अपने ससुर के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने छानबीन की तो मकतूल वीके गुप्ता और आरोपियों के मोबाइल नंबरों की डिटेल अगवानपुर के आस पास ही मिली। शक के घिरे में आए धनश्याम को पुलिस ने हिरासत में लिया। उससे पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूलते हुए बताया कि हत्याकांड में अपने साथ विनोद और चतर सिंह निवासी सविता नगर लाइन पार थाना मझोला के भी शामिल होने की बात उगल दी।
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धनश्याम ने वीके सिंह से दो लाख रुपये और चतर सिंह ने डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिया था। दोनों को रकम वापस न देनी पड़ी। इसलिए उन्होंने विनोद के साथ मिलकर वीके गुप्ता की हत्या कर दी थी। एसपी सिटी राम सुरेश यादव ने बताया कि वीके गुप्ता के पूर्व नौकर रामअवतार ने उनसे लाखों रुपये का कर्ज लिया था। लेकिन वह रकम वापस नहीं दे रहा था।
योजना के मुताबिक धनश्याम ने गुरुवार सुबह फोन कर विनोद को अपने घर बुला लिया। इसके बाद धनश्याम ने नवीन नगर निवासी निखिल से उसकी सेंट्रो कार ये कह कर ले ली कि उसकी मां की तबीयत खराब है। उसकी दवा लेने के लिए छजलैट जाना है। इसके बाद धनश्याम और चतर सिंह कार लेकर अगवानपुर पीएचसी के पास पहुंच गए।
इन्होंने कार सड़क किनारे खड़ी कर दी। इसके बाद तीनों एक ही बाइक से आशियाना कालोनी में मुस्कान नर्सिंग होम के पास पहुंच गए और वीके गुप्ता का इंतजार करने लगे। कुछ ही देर में वीके गुप्ता अपनी स्कूटी से वहां पहुंच गए। संभल निवासी रामअवतार से रकम दिलाने के लिए आरोपी वीके गुप्ता को लेकर अगवानपुर पहुंच गए।
कार के पास पहुंचते ही चतर सिंह ने वीके गुप्ता को पकड़ लिया। इसके बाद धनश्याम और विनोद ने नाड़े और रस्सी से वीके गुप्ता का गला घोंट दिया और सब्बल से उनकी हत्या करने के बाद लाश को गाड़ी की डिग्गी में डाल लिया और कपड़े से उसे ढक लिया। इसके बाद धनश्याम कार लेकर अगवानपुर से पांच किलोमीटर आगे समदपुर के जंगल में ले गया। जबकि चतर सिंह स्कूटी और विनोद बाइक लेकर आ गए। तीनों ने लाश को ईंख में फेंक दिया और पत्ती उसे ढक दिया।
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एसएसपी नितिन तिवारी ने बताया कि गुरुवार दोपहर करीब बारह बजे शंकर विहार कालोनी निवासी रिटायर इंजीनियर वीके गुप्ता अचानक गायब हो गए थे। उनके दामाद आकाश मित्तल ने धनश्याम निवासी चक्कर की मिलक और विनोद निवासी चकमधपुरी थाना छजलैट को नामजद करते हुए अपने ससुर के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने छानबीन की तो मकतूल वीके गुप्ता और आरोपियों के मोबाइल नंबरों की डिटेल अगवानपुर के आस पास ही मिली। शक के घिरे में आए धनश्याम को पुलिस ने हिरासत में लिया। उससे पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूलते हुए बताया कि हत्याकांड में अपने साथ विनोद और चतर सिंह निवासी सविता नगर लाइन पार थाना मझोला के भी शामिल होने की बात उगल दी।
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धनश्याम ने वीके सिंह से दो लाख रुपये और चतर सिंह ने डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिया था। दोनों को रकम वापस न देनी पड़ी। इसलिए उन्होंने विनोद के साथ मिलकर वीके गुप्ता की हत्या कर दी थी। एसपी सिटी राम सुरेश यादव ने बताया कि वीके गुप्ता के पूर्व नौकर रामअवतार ने उनसे लाखों रुपये का कर्ज लिया था। लेकिन वह रकम वापस नहीं दे रहा था।
योजना के मुताबिक धनश्याम ने गुरुवार सुबह फोन कर विनोद को अपने घर बुला लिया। इसके बाद धनश्याम ने नवीन नगर निवासी निखिल से उसकी सेंट्रो कार ये कह कर ले ली कि उसकी मां की तबीयत खराब है। उसकी दवा लेने के लिए छजलैट जाना है। इसके बाद धनश्याम और चतर सिंह कार लेकर अगवानपुर पीएचसी के पास पहुंच गए।
इन्होंने कार सड़क किनारे खड़ी कर दी। इसके बाद तीनों एक ही बाइक से आशियाना कालोनी में मुस्कान नर्सिंग होम के पास पहुंच गए और वीके गुप्ता का इंतजार करने लगे। कुछ ही देर में वीके गुप्ता अपनी स्कूटी से वहां पहुंच गए। संभल निवासी रामअवतार से रकम दिलाने के लिए आरोपी वीके गुप्ता को लेकर अगवानपुर पहुंच गए।
कार के पास पहुंचते ही चतर सिंह ने वीके गुप्ता को पकड़ लिया। इसके बाद धनश्याम और विनोद ने नाड़े और रस्सी से वीके गुप्ता का गला घोंट दिया और सब्बल से उनकी हत्या करने के बाद लाश को गाड़ी की डिग्गी में डाल लिया और कपड़े से उसे ढक लिया। इसके बाद धनश्याम कार लेकर अगवानपुर से पांच किलोमीटर आगे समदपुर के जंगल में ले गया। जबकि चतर सिंह स्कूटी और विनोद बाइक लेकर आ गए। तीनों ने लाश को ईंख में फेंक दिया और पत्ती उसे ढक दिया।