मुरादाबाद में निमोनिया में दहशत: 30 दिन में 63 बच्चे भर्ती, डाॅक्टर बोले- बदल रहा माैसम, मासूमों का रखें ध्यान
माैसम बदलने के कारण मुरादाबाद में निमोनिया तेजी से फैल रहा है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक एक माह के भीतर 63 बच्चों को भर्ती किया गया है। चिकित्सकों ने कहा है कि बदले माैसम के कारण इसका प्रभाव बढ़ रहा है।
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मुरादाबाद में मौसम बदलने के साथ वायरल निमोनिया ने दस्तक दे दी है। शून्य से डेढ़ साल तक के बच्चों की तबीयत इस वायरस के कारण बिगड़ रही है। पिछले एक माह में जिला अस्पताल में 63 बच्चे इस बीमारी के कारण भर्ती हुए हैं। हल्की खांसी के बाद यह बुखार, जुकाम व गले में दर्द का कारण बन रहा।
जिला अस्पताल व निजी डॉक्टरों की ओपीडी में हर दिन 30 से 35 मामले आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में एक माह में 1019 बच्चों में यह समस्या देखी गई है। कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। इसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों का मानना है कि इस सीजन में यह सिर्फ शुरुआत है। आगे मौसम बदलने के साथ परेशानी बढ़ सकती है। हर बच्चे में लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करते हैं कि निमोनिया किस कारण से हुआ है। बैक्टीरियल निमोनिया के मामले आमतौर पर यह लक्षण देखे जाते हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार के मुताबिक यह फेफड़ों का संक्रमण है, जो लापरवाही बरतने पर गंभीर हो सकता है। बच्चे को हल्की खांसी, जुकाम, सीने से घरघराहट की आवाज आ रही है तो डॉक्टर को जरूर दिखा लें।
आइसक्रीम, ठंडे पानी, कूलर व एसी की हवा से करें परहेज
डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में लोग आइसक्रीम खूब खाते हैं। छोटे बच्चों को इस मौसम में आइसक्रीम खिलाना ठीक नहीं है। मौसम बदलने के कारण बच्चों तो कूलर व एसी में सुलाने में बचें। पंखें के ठीक नीचे भी न लेटाएं। जिला अस्पताल में हर दिन लगभग 150 बच्चे ओपीडी में आते हैं।
इनमें से औसतन 30 वायरल निमोनिया की शिकायत वाले हैं। यदि बच्चे को निमोनिया हो गया है तो इससे दूसरों को भी फैल सकता है। परिजन मास्क का प्रयोग करें तो बेहतर है।
निमोनिया के लक्षण
- बलगम वाली खांसी
- भूख में कमी
- सुस्ती व चिढ़चिढ़ापन
- बुखार
- ठंड लगना
- सांस लेने में तकलीफ
फेफड़ों के संक्रमण के अलावा बच्चों में एलर्जी की समस्या भी हो रही है। इससे सांस की नली प्रभावित हो रही है। इसमें बच्चों को इनहेलर थैरेपी दी जा रही है। ओपीडी में 75 प्रतिशत बच्चे एलर्जी व वायरल निमोनिया वाले ही आ रहे हैं। - डॉ. शलभ अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ
हर दिन दो से तीन बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाकर रखें। कोल्डड्रिंक, आइसक्रीम, ठंडा पानी बिल्कुल नहीं देना है। साफ सफाई रखने से वायरस के फैलने का खतरा कम हो जाता है। - डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल