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संभल में नया चिपको आंदोलन, काटे तो जान दे देंगे कहकर पेड़ों से चिपके ग्रामीण

Fri, 04 Jan 2019 01:07 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संभल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संभल Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 04 Jan 2019 01:07 AM IST
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new chipko andolan started in Sambhal
संभल में पेड़ बचाने के लिए आंदोलन करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

बरसों पुराने 400 पेड़ों की रक्षा के लिए संभल के 20 गांवों के लोगों ने मिनी चिपको आंदोलन की राह अख्तियार कर ली है। जिले के पवांसा ब्लॉक स्थित कैला देवी मंदिर के आसपास खाली जमीन पर लगे पेड़ों की रक्षा के लिए गुरुवार दोपहर को ग्रामीण उनसे लिपट गए। ग्रामीणों ने उन पेड़ों से लिपट कर पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया है, जिन्हें गौशाला की स्थापना के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा काटे जाने का अंदेशा है। 

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दरअसल पंवासा में एक हेक्टेयर जमीन पर ढाई करोड़ रुपये की लागत से गौशाला का निर्माण होना है। इसके लिए पचास लाख रुपये सरकार ने जारी कर दिए हैं। प्रशासन ने उस जमीन को गौशाला के लिए चुना है, जिस पर वर्षों पुराने पेड़ हैं। कैला देवी मंदिर से लगी ग्राम समाज की करीब बीस बीघा जमीन में पाकड़, बरगद, पिलखन आदि के लगभग चार सौ पेड़ हैं। यह स्थान झाड़ी वाला जंगल के नाम से मशहूर है। मंदिर होने के कारण लोगों का जुड़ाव यहां से बना हुआ है। इस जंगल में आठ दस पेड़ ऐसे हैं, जो सैकड़ों वर्ष पुराने बताए गए हैं। इनकी रक्षा को लेकर ही आंदोलन है।
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ग्रामीणों का कहना है कि खाली जमीन पर गौशाला बनाई जाए। पेड़ों को न काटा जाए। इसी मांग को लेकर बीस से अधिक गांवों के तमाम किसान कैला देवी मंदिर के बाहर आयोजित महापंचायत में एकत्र हुए। पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया। आंदोलन की अगुवाई भाकियू असली ने की। भाकियू असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि पेड़ों की रक्षा हर कीमत पर होगी। जरूरत पड़ी तो देश के पर्यावरण बचाने वाले संगठनों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इस आंदोलन में शामिल किया जाएगा। 
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उन्होंने कहा कि गौशाला का विरोध नहीं है लेकिन उसके लिए खाली जगह को चुना जाए। पंचायत के बाद मौजूद किसान चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपक गए और कहा- अपनी जान दे देंगे लेकिन पेड़ों को नहीं कटने देंगे। कैला देवी किसानों ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें प्रशासन से कैला देवी के पास खाली पड़ी ग्राम समाज की दूसरी भूमि पर गौशाला निर्माण कराने का आग्रह किया गया। साथ ही कहा गया कि अगर पेड़ काटे गए तो लोगों की आस्था और पर्यावरण को ठेस पहुंचेगी क्योंकि जिन पेड़ों को काटा जा रहा है, वे सैकड़ों वर्ष पुराने वृक्ष भी हैं। पंचायत की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने की।

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