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Moradabad News: अभियान के तहत कई जगह नहीं लगे पशुओं के टीके
Thu, 03 Sep 2026 02:34 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Thu, 03 Sep 2026 02:34 AM IST
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ठाकुरद्वारा। सरकार के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने 22 जुलाई से पशुओं के खुरपका और मुंहपका बीमारी को रोकने के लिए अभियान चलाया है। यह अभियान 22 जुलाई से शुरू हुआ है जो पांच सितंबर तक चलेगा। कई गांव के प्रधान और पशुपालकों से बातचीत करने पर पता चला है कि अभी तक टीकाकरण करने वाली पशुपालन विभाग की टीम उनके गांव में ही नहीं आई है। ठाकुरद्वारा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ शिव कुमार राणा का दावा है कि 85 प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। उन्होंने बताया कि 42 हजार पशुओं के टीकाकरण के लिए वैक्सीन मिली है।
ठाकुरद्वारा ब्लॉक क्षेत्र में 43 हजार 946 पशु हैं। इनमें 16147 गोवंशीय और 27799 भैंसवंशीय पशु हैं। क्षेत्र में रतूपुरा, शेरपुर पट्टी, दुल्हापुर में पशु उप केंद्र हैं। इनमें सिर्फ शेरपुर पट्टी में पशुधन प्रसार अधिकारी नियुक्त है जबकि दोनों में कोई पशुधन प्रसार अधिकारी नियुक्त नहीं है। ठाकुरद्वारा को छोड़कर शरीफनगर और सुरजननगर में स्थित राजकीय पशु चिकित्सा केंद्र पर एक वर्ष से डॉक्टर नहीं है। जटपुरा, डिलारी के पशु चिकित्सालय में भी कोई डॉक्टर नहीं है। टीकाकरण का कार्य क्षेत्र में 46 पैरावेट (पशु मित्र) से कराया जा रहा है। शरीफनगर, जटपुरा और डिलारी में फार्मासिस्ट के पद भी रिक्त हैं। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पशुओं में लंपी स्किन की बीमारी रोकने के लिए यूपी बॉर्डर के 35 गांव में टीकाकरण किया गया है। डीएम के इस बीमारी को रोकने के लिए अन्य राज्यों के पशु यूपी में आने की रोक के बाद भी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अन्य राज्यों से पशु आ रहे हैं। हालांकि उनका दावा है कि क्षेत्र में कोई भी लंपी स्किन की बीमारी से पशु पीड़ित नहीं है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने कहा है कि जिन गांवों में टीम टीकाकरण के लिए नहीं पहुंची है वह इसकी सूचना ठाकुरद्वारा चिकित्सालय पर देकर अपने पशुओं को टीका लगवा लें। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में पशु के टीका नहीं लगता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के रिक्त पदों का कार्य भी उनके द्वारा ही देखा जा रहा है।
गांव नंगलिया के पशु पालक कलुआ सिंह ने बताया कि उनके यहां अभी तक कोई भी कोई भी सरकारी कर्मचारी पशुओं का टीका लगाने के लिए नहीं आया है। एक साल पहले टीम आई थी, लेकिन उनके पशु ग्याभिन थे इसलिए टीका नहीं लगवाया गया।
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गांव नंगलिया के राजकुमार सैनी ने बताया कि उनके दो बछड़े खर खुरपका बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं। जिनका इलाज वह अपने खर्चे पर कराते हैं।
गांव गोपी वाला निवासी यशपाल सिंह ने बताया कि उनके गांव में कोई भी व्यक्ति टीकाकरण करने के लिए नहीं आया है। अपने स्तर से ही वह पशुओं का इलाज कराते हैं।
गांव गोपीवाला निवासी हर्षवर्धन सिंह का कहना है कि उनकी गाय पिछले दिनों बीमार हो गई थी। जिसके इलाज के लिए उन्होंने राजकीय पशु केंद्र से संपर्क किया लेकिन कोई उसका इलाज करने नहीं आया उन्होंने अपने स्तर से उसका इलाज कराया।
गांव गोपीवाला निवासी विपिन कुमार ने कहा कि अभी तक गांव में कोई भी कर्मचारी पशुओं के टीकाकरण के लिए नहीं आया है। गांव के लोग अपने स्तर से ही पशुओं का इलाज कराते हैं।
गांव गोपीवाला निवासी बाबू सिंह का यही कहना है कि अभी तक कोई भी। सरकारी पशु चिकित्सालय से कर्मचारी पशुओं के टीकाकरण के लिए नहीं आया है।
गांव कालेवाला माधोवाला के प्रधान रविंद्र सिंह, रामूवाला गणेश के प्रधान मदनपाल सिंह का कहना है कि उनकी जानकारी में अभी तक राजकीय पशु चिकित्सा विभाग की टीम गांव में नहीं आई है। जबकि गांव रामनगर खागूबाला की प्रधान फिरोजा खातून का कहना है कि गांव में पशु मित्र मौजूद है उनके द्वारा टीकाकरण किया जा रहा है।
पशु मित्र अरविंद कुमार का कहना है कि उनके द्वारा गांव रामनगर खागूबाला में लगभग 50 प्रतिशत पशुओं को टीका लगाया जा चुका हैं। शेष का टी
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ठाकुरद्वारा ब्लॉक क्षेत्र में 43 हजार 946 पशु हैं। इनमें 16147 गोवंशीय और 27799 भैंसवंशीय पशु हैं। क्षेत्र में रतूपुरा, शेरपुर पट्टी, दुल्हापुर में पशु उप केंद्र हैं। इनमें सिर्फ शेरपुर पट्टी में पशुधन प्रसार अधिकारी नियुक्त है जबकि दोनों में कोई पशुधन प्रसार अधिकारी नियुक्त नहीं है। ठाकुरद्वारा को छोड़कर शरीफनगर और सुरजननगर में स्थित राजकीय पशु चिकित्सा केंद्र पर एक वर्ष से डॉक्टर नहीं है। जटपुरा, डिलारी के पशु चिकित्सालय में भी कोई डॉक्टर नहीं है। टीकाकरण का कार्य क्षेत्र में 46 पैरावेट (पशु मित्र) से कराया जा रहा है। शरीफनगर, जटपुरा और डिलारी में फार्मासिस्ट के पद भी रिक्त हैं। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पशुओं में लंपी स्किन की बीमारी रोकने के लिए यूपी बॉर्डर के 35 गांव में टीकाकरण किया गया है। डीएम के इस बीमारी को रोकने के लिए अन्य राज्यों के पशु यूपी में आने की रोक के बाद भी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अन्य राज्यों से पशु आ रहे हैं। हालांकि उनका दावा है कि क्षेत्र में कोई भी लंपी स्किन की बीमारी से पशु पीड़ित नहीं है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने कहा है कि जिन गांवों में टीम टीकाकरण के लिए नहीं पहुंची है वह इसकी सूचना ठाकुरद्वारा चिकित्सालय पर देकर अपने पशुओं को टीका लगवा लें। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में पशु के टीका नहीं लगता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के रिक्त पदों का कार्य भी उनके द्वारा ही देखा जा रहा है।
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गांव नंगलिया के पशु पालक कलुआ सिंह ने बताया कि उनके यहां अभी तक कोई भी कोई भी सरकारी कर्मचारी पशुओं का टीका लगाने के लिए नहीं आया है। एक साल पहले टीम आई थी, लेकिन उनके पशु ग्याभिन थे इसलिए टीका नहीं लगवाया गया।
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गांव नंगलिया के राजकुमार सैनी ने बताया कि उनके दो बछड़े खर खुरपका बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं। जिनका इलाज वह अपने खर्चे पर कराते हैं।
गांव गोपी वाला निवासी यशपाल सिंह ने बताया कि उनके गांव में कोई भी व्यक्ति टीकाकरण करने के लिए नहीं आया है। अपने स्तर से ही वह पशुओं का इलाज कराते हैं।
गांव गोपीवाला निवासी हर्षवर्धन सिंह का कहना है कि उनकी गाय पिछले दिनों बीमार हो गई थी। जिसके इलाज के लिए उन्होंने राजकीय पशु केंद्र से संपर्क किया लेकिन कोई उसका इलाज करने नहीं आया उन्होंने अपने स्तर से उसका इलाज कराया।
गांव गोपीवाला निवासी विपिन कुमार ने कहा कि अभी तक गांव में कोई भी कर्मचारी पशुओं के टीकाकरण के लिए नहीं आया है। गांव के लोग अपने स्तर से ही पशुओं का इलाज कराते हैं।
गांव गोपीवाला निवासी बाबू सिंह का यही कहना है कि अभी तक कोई भी। सरकारी पशु चिकित्सालय से कर्मचारी पशुओं के टीकाकरण के लिए नहीं आया है।
गांव कालेवाला माधोवाला के प्रधान रविंद्र सिंह, रामूवाला गणेश के प्रधान मदनपाल सिंह का कहना है कि उनकी जानकारी में अभी तक राजकीय पशु चिकित्सा विभाग की टीम गांव में नहीं आई है। जबकि गांव रामनगर खागूबाला की प्रधान फिरोजा खातून का कहना है कि गांव में पशु मित्र मौजूद है उनके द्वारा टीकाकरण किया जा रहा है।
पशु मित्र अरविंद कुमार का कहना है कि उनके द्वारा गांव रामनगर खागूबाला में लगभग 50 प्रतिशत पशुओं को टीका लगाया जा चुका हैं। शेष का टी