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Moradabad News: अलीगढ़ के लड्डू गोपाल से पीतलनगरी में मनेगी जन्माष्टमी
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मुरादाबाद। ब्रज के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। यहां पीतल के लड्डू गोपाल की आकर्षक मूर्तियों की जमकर खरीदारी की जा रही है। अलीगढ़ में ढली लड्डू गोपाल और राधारानी जी की मूर्तियों के सौंदर्य को पीतलनगरी के कारीगरों ने अपनी कला से और बढ़ाया है। दुकानदारों का कहना है कि इन मूर्तियों की मांग देशभर में है। स्थानीय बाजार में सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहक खरीदारी कर रहे हैं।
हर वर्ष की भांति इस बार भी शहर में जन्माष्टमी की भव्यता दिखाई देगी। श्रद्धालुओं द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भगवान के वस्त्र, उनके शृंगार और झूला व सिंहासन की जमकर खरीदारी की जा रही है। बाजार गंज, बर्तन बाजार, लाइनपार, हरथला, नवीन नगर आदि के बाजार में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। ग्राहकों की पसंद और कीमत को देखते हुए दुकानदारों ने लड्डू गोपाल की मूर्तियों की कई वैरायटी रखी हुई है।
पीतल के अलावा एल्युमिनियम की मूर्तियां भी हैं। हालांकि एल्युमिनियम की मूर्तियों पर भी पीतल की पॉलिश की गई है। रंग-बिरंगे लड्डू गोपाल के हाथों में पीले रंग के लड्डू हैं और पोशाक की तरह पेंट से रंग-बिरंगी कारीगरी की गई है। आंखों पर नीले रंग की कारीगरी है।
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लखनऊ, बनारस, मुंबई, मथुरा-वृंदावन, राजस्थान, बैंगलोर, गुजरात में लड्डू गोपाल की मूर्ति, पालना और सिंहासन भिजवाया गया है। छह से आठ इंच के लड्डू गोपाल की सबसे ज्यादा मांग हैं। यह घर के हिसाब से भी ज्यादा खरीदे गए हैं। प्लेन, काले रंग के और शृंगार वाले लड्डू गोपाल की मांग आई है। छत्र वाले और गोल घेरे वाले सिंहासन पसंद किए गए हैं। मुरादाबाद के अलावा अलीगढ़ से लड्डू गोपाल मंगवाकर यहीं पर नक्काशी और पॉलिश करवा रहे हैं। पांच सौ रुपये से आठ हजार रुपये तक के लड्डू गोपाल हैं। बहुत से ग्राहक राधा-रानी का बालरूप साथ में मांग रहे हैं।
मुकेश अग्रवाल, मूर्ति विक्रेता
लड्डू गोपाल, सिंहासन और पालना की अच्छी बिक्री है। दिल्ली, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड माल भेजा जा रहा है। ट्रांसपोर्ट से माल भेजा गया है, ताकि ग्राहकों को समय से मिल जाए। अलीगढ़, मथुरा से पॉलिश वाले लड्डू गोपाल आ रहे हैं। इन लड्डू गोपाल की आंखें और बाल बने आ रहे हैं। जलेसर से घंटे और घुंघरू मंगवाए हैं। सौ ग्राम से पांच किलो तक की मूर्तियां हैं। कीमत की शुरुआत साढ़े आठ सौ रुपये किलो से है, जो 15 सौ रुपये किलो तक पहुंच रही है। कीमत का अंतर फिनशिंग पर निर्भर करता है। फिनिशिंग में चेहरे की भावभंगिमा अलग ही निखर कर आती है। श्रीकृष्ण का बालरूप ग्राहकों की मांग में है। पालना और सिंहासन सौ रुपये से दो हजार रुपये तक के हैं। सिंहासन, पालना और लड्डू गोपाल सब पीतल के बिक्री है।
अभिषेक अग्रवाल, मूर्ति विक्रेता
जन्माष्टमी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस बार पेंट का काम ज्यादा आकर्षक है। इसमें पीतल के ऊपर पेंट इस तरह से किया है कि अलग से वस्त्र पहनाने की जरूरत नहीं है। लड्डू गोपाल और किशोरी जी की आंखें बहुत प्यारी हैं। ऐसा लगता है कि मूर्तियां अभी बोल पड़ेंगी। कीमत को देखते हुए एल्युमिनियम के अंदर कई वैरायटी आई है। गोपाल जी और राधा जी के बैठे हुए स्वरूप भी हैं। जिस तरह से कान्हाजी को श्यामवर्ण का कहा गया है, उनकी मूर्तियों को भी काले रंग में बनाया गया है। यह पूरा काम हमने मुरादाबाद में ही करवाया है। मथुरा, वृंदावन, दिल्ली, चंडीगढ़, बिहार, गुजरात, राजस्थान से काफी मांग आई है। इस्कॉन से जुड़े श्रद्धालुओं ने मूर्तियां मंगवाई हैं। हमारे पास दो इंच से ढाई फुट के लड्डू गोपाल और राधाजी हैं। 80 रुपये से शुरुआत होकर 50 हजार रुपये तक की कीमत में हैं।
नमन जैन, मूर्ति विक्रेता
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हर वर्ष की भांति इस बार भी शहर में जन्माष्टमी की भव्यता दिखाई देगी। श्रद्धालुओं द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भगवान के वस्त्र, उनके शृंगार और झूला व सिंहासन की जमकर खरीदारी की जा रही है। बाजार गंज, बर्तन बाजार, लाइनपार, हरथला, नवीन नगर आदि के बाजार में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। ग्राहकों की पसंद और कीमत को देखते हुए दुकानदारों ने लड्डू गोपाल की मूर्तियों की कई वैरायटी रखी हुई है।
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पीतल के अलावा एल्युमिनियम की मूर्तियां भी हैं। हालांकि एल्युमिनियम की मूर्तियों पर भी पीतल की पॉलिश की गई है। रंग-बिरंगे लड्डू गोपाल के हाथों में पीले रंग के लड्डू हैं और पोशाक की तरह पेंट से रंग-बिरंगी कारीगरी की गई है। आंखों पर नीले रंग की कारीगरी है।
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लखनऊ, बनारस, मुंबई, मथुरा-वृंदावन, राजस्थान, बैंगलोर, गुजरात में लड्डू गोपाल की मूर्ति, पालना और सिंहासन भिजवाया गया है। छह से आठ इंच के लड्डू गोपाल की सबसे ज्यादा मांग हैं। यह घर के हिसाब से भी ज्यादा खरीदे गए हैं। प्लेन, काले रंग के और शृंगार वाले लड्डू गोपाल की मांग आई है। छत्र वाले और गोल घेरे वाले सिंहासन पसंद किए गए हैं। मुरादाबाद के अलावा अलीगढ़ से लड्डू गोपाल मंगवाकर यहीं पर नक्काशी और पॉलिश करवा रहे हैं। पांच सौ रुपये से आठ हजार रुपये तक के लड्डू गोपाल हैं। बहुत से ग्राहक राधा-रानी का बालरूप साथ में मांग रहे हैं।
मुकेश अग्रवाल, मूर्ति विक्रेता
लड्डू गोपाल, सिंहासन और पालना की अच्छी बिक्री है। दिल्ली, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड माल भेजा जा रहा है। ट्रांसपोर्ट से माल भेजा गया है, ताकि ग्राहकों को समय से मिल जाए। अलीगढ़, मथुरा से पॉलिश वाले लड्डू गोपाल आ रहे हैं। इन लड्डू गोपाल की आंखें और बाल बने आ रहे हैं। जलेसर से घंटे और घुंघरू मंगवाए हैं। सौ ग्राम से पांच किलो तक की मूर्तियां हैं। कीमत की शुरुआत साढ़े आठ सौ रुपये किलो से है, जो 15 सौ रुपये किलो तक पहुंच रही है। कीमत का अंतर फिनशिंग पर निर्भर करता है। फिनिशिंग में चेहरे की भावभंगिमा अलग ही निखर कर आती है। श्रीकृष्ण का बालरूप ग्राहकों की मांग में है। पालना और सिंहासन सौ रुपये से दो हजार रुपये तक के हैं। सिंहासन, पालना और लड्डू गोपाल सब पीतल के बिक्री है।
अभिषेक अग्रवाल, मूर्ति विक्रेता
जन्माष्टमी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस बार पेंट का काम ज्यादा आकर्षक है। इसमें पीतल के ऊपर पेंट इस तरह से किया है कि अलग से वस्त्र पहनाने की जरूरत नहीं है। लड्डू गोपाल और किशोरी जी की आंखें बहुत प्यारी हैं। ऐसा लगता है कि मूर्तियां अभी बोल पड़ेंगी। कीमत को देखते हुए एल्युमिनियम के अंदर कई वैरायटी आई है। गोपाल जी और राधा जी के बैठे हुए स्वरूप भी हैं। जिस तरह से कान्हाजी को श्यामवर्ण का कहा गया है, उनकी मूर्तियों को भी काले रंग में बनाया गया है। यह पूरा काम हमने मुरादाबाद में ही करवाया है। मथुरा, वृंदावन, दिल्ली, चंडीगढ़, बिहार, गुजरात, राजस्थान से काफी मांग आई है। इस्कॉन से जुड़े श्रद्धालुओं ने मूर्तियां मंगवाई हैं। हमारे पास दो इंच से ढाई फुट के लड्डू गोपाल और राधाजी हैं। 80 रुपये से शुरुआत होकर 50 हजार रुपये तक की कीमत में हैं।
नमन जैन, मूर्ति विक्रेता