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अधिकारपत्र जारी करने में को इफ्को, कृभको ने भी बरती अनियमितताएं
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मुरादाबाद। जिला उद्यान विभाग की निष्क्रिय समितियों व कुछ समिति के फर्जी पदाधिकारियों को उर्वरक लाइसेंस जारी करने के मामले में इफको व कृभको ने भी अनियमितता बरतने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सूत्र बताते हैं कि इनके अधिकारी समिति के असली पदाधिकारियों को एक उर्वरक लाइसेंस जारी करने में नाको चने चबवा देते थे, जबकि फर्जी पदाधिकारियों को कई स्थानों पर उर्वरक व्यवसाय करने का लाइसेंस प्राप्त करवाने के लिए अधिकार पत्र जारी कर देते थे। डीएम के आदेश पर जिन चार समितियों के पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है वह इसका जीता जागता सबूत है।
डीएम के आदेश पर एक दिन पहले ही डीएओ ने औद्यानिक उत्पादन एवं विपणन सहकारी समिति कांकरखेड़ा, करनपुर, बिलाकुदान व मोहनपुर का फर्जी पदाधिकारी बन कर 16 स्थानों के लिए उर्वरक लाइसेंस प्राप्त करने के संबंध में धोखाधड़ी व कूटरचना का मुकदमा दर्ज कराया है। इस चारों समितियों के असली पदाधिकारियों व सदस्यों का कहना है कि लिए उन लोगों को एक अधिकार पत्र जारी करने में इफको व कृभको के अधिकारी काफी दौड़ाने के बाद भी टाला मटोली करते रहते थे। मामले के उजागर होने के बाद वह लोग स्वयं हतप्रभ हैं कि फर्जी पदाधिकारियों को इफको व कृभको के अधिकारियों ने आंख मूंदकर कैसे अधिकार पत्र जारी कर दिए। इसमें सबसे अधिक अधिकारपत्र इफको द्वारा जारी किया गया है। यह मामला जिस समय का बताया जा रहा है उस समय इफको के यहां जिला प्रबंधक बाबूराम थे जो डेढ़ साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
डीएचओ ने डीएम को भेजी अपनी रिपोर्ट में वर्ष 1998 के एक शासनादेश का हवाला दिया है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर से उल्लेख किया है कि लाइसेंस जारी करते समय संबंधित विभाग के अधिकारी की संस्तुति अनिवार्य है। इससे साफ है कि अधिकारपत्र जारी करते समय इफको, कृभको ने तो लाइसेंस जारी करते समय तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी ने इस आदेश का पालन नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि मामले की यदि उच्च स्तर पर जांच हुई तो कृषि विभाग के साथ-साथ इफको व कृभको के अधिकारियों की भी गर्दन इसमें फंसना तय है।
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राज्य कार्यालय को भेजी है रिपोर्ट
मैंने कुछ दिन पहले ही चार्ज संभाला है। पूर्व के अधिकारियों द्वारा अधिकार पत्र जारी करते समय कहीं चूक के कारण ऐसा हो गया। अब विधिवत पड़ताल के साथ और विभागीय अधिकारी की संस्तुति के बाद ही अधिकार पत्र जारी किया जाएगा। विभागीय स्तर पर जो चूक हुई है उस स्थिति से राज्य कार्यालय को अवगत करा दिया गया है। जैसा आदेश होगा आगे वैसी कार्रवाई की जाएगी।
- यशवीर सिंह, जिला प्रबंधक, इफको
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आगे भी बरती जाती रहेगी सतर्कता
डीएओ को एक पत्र मिला है। जिसमें यह कहा गया है कि अधिकार पत्र जारी करते समय अभिलेखों का सत्यापन और पड़ताल कर ही उसे जारी करें। उद्यान विभाग की बहुत कम समितियों को मेरे यहां से अधिकारपत्र जारी किए गए हैं। थोक के भाव में अधिकारपत्र जारी नहीं किए गए। पहले भी सतर्कता बरती जाती रही है। आगे कोई चूक न हो इसके लिए और सतर्कता बरती जाएगी।
मुनेंद्र तेवतिया, जिला प्रबंधक कृभको
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डीएम के आदेश पर एक दिन पहले ही डीएओ ने औद्यानिक उत्पादन एवं विपणन सहकारी समिति कांकरखेड़ा, करनपुर, बिलाकुदान व मोहनपुर का फर्जी पदाधिकारी बन कर 16 स्थानों के लिए उर्वरक लाइसेंस प्राप्त करने के संबंध में धोखाधड़ी व कूटरचना का मुकदमा दर्ज कराया है। इस चारों समितियों के असली पदाधिकारियों व सदस्यों का कहना है कि लिए उन लोगों को एक अधिकार पत्र जारी करने में इफको व कृभको के अधिकारी काफी दौड़ाने के बाद भी टाला मटोली करते रहते थे। मामले के उजागर होने के बाद वह लोग स्वयं हतप्रभ हैं कि फर्जी पदाधिकारियों को इफको व कृभको के अधिकारियों ने आंख मूंदकर कैसे अधिकार पत्र जारी कर दिए। इसमें सबसे अधिक अधिकारपत्र इफको द्वारा जारी किया गया है। यह मामला जिस समय का बताया जा रहा है उस समय इफको के यहां जिला प्रबंधक बाबूराम थे जो डेढ़ साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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डीएचओ ने डीएम को भेजी अपनी रिपोर्ट में वर्ष 1998 के एक शासनादेश का हवाला दिया है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर से उल्लेख किया है कि लाइसेंस जारी करते समय संबंधित विभाग के अधिकारी की संस्तुति अनिवार्य है। इससे साफ है कि अधिकारपत्र जारी करते समय इफको, कृभको ने तो लाइसेंस जारी करते समय तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी ने इस आदेश का पालन नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि मामले की यदि उच्च स्तर पर जांच हुई तो कृषि विभाग के साथ-साथ इफको व कृभको के अधिकारियों की भी गर्दन इसमें फंसना तय है।
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राज्य कार्यालय को भेजी है रिपोर्ट
मैंने कुछ दिन पहले ही चार्ज संभाला है। पूर्व के अधिकारियों द्वारा अधिकार पत्र जारी करते समय कहीं चूक के कारण ऐसा हो गया। अब विधिवत पड़ताल के साथ और विभागीय अधिकारी की संस्तुति के बाद ही अधिकार पत्र जारी किया जाएगा। विभागीय स्तर पर जो चूक हुई है उस स्थिति से राज्य कार्यालय को अवगत करा दिया गया है। जैसा आदेश होगा आगे वैसी कार्रवाई की जाएगी।
- यशवीर सिंह, जिला प्रबंधक, इफको
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आगे भी बरती जाती रहेगी सतर्कता
डीएओ को एक पत्र मिला है। जिसमें यह कहा गया है कि अधिकार पत्र जारी करते समय अभिलेखों का सत्यापन और पड़ताल कर ही उसे जारी करें। उद्यान विभाग की बहुत कम समितियों को मेरे यहां से अधिकारपत्र जारी किए गए हैं। थोक के भाव में अधिकारपत्र जारी नहीं किए गए। पहले भी सतर्कता बरती जाती रही है। आगे कोई चूक न हो इसके लिए और सतर्कता बरती जाएगी।
मुनेंद्र तेवतिया, जिला प्रबंधक कृभको