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बदलाव की राह पर शिक्षा व्यवस्था
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:32 AM IST
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education
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वर्ष 2017 अपने अंतिम पड़ाव पर है और नया साल उम्मीदों की पोटली के साथ दस्तक देने को आतुर है। जाते वर्ष में जब हम मुड़कर देखते हैं तो शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव हुए, लेकिन कुछ अभी भी अधूरे रह गए। शुरुआत में जब सरकारी तंत्र बदला था तो आमूल-चूल परिवर्तन की उम्मीद जगी थी। उससे परिषदीय स्कूल के बच्चों को बहुत राहत मिली है।
नि:शुल्क मिड डे मील, यूनीफार्म, बैग, जूते, मोजे का लाभ दिया गया। अब स्वेटर का इंतजार किया जा रहा है। नए साल में स्वेटर मिल जाएंगे। माध्यमिक में परीक्षा प्रक्रिया और उच्च शिक्षा की प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इनके बीच समान बात यह है कि दोनों स्तर का शैक्षिक सत्र एकदम गड़बड़ा गया है।
माध्यमिक में जहां छह माह की पढ़ाई में छात्र परीक्षा देंगे, वहीं कालेजों में बमुश्किल डेढ़ महीने ही कक्षाएं संचालित हो सकी हैं। इसके बावजूद आगामी वर्ष से माध्यमिक का जहां शैक्षिक सत्र अप्रैल माह से शुरू हो जाएगा, वहीं उच्च शिक्षा में बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होने से विद्यार्थियों की कक्षाओं में रौनक देखने को मिलेगी। वर्ष भर की गतिविधियों को समेटे आगामी वर्ष की आशाओं को समाहित करती रिपोर्ट।
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने शैक्षिक सत्र 2017-18 में अशासकीय कालेजों में व्याप्त अनियमितताएं और निजी कालेजों की मनमानी को रोकने के लिए केंद्रीयकृत प्रवेश प्रणाली लागू की थी। पूरी तैयारी के अभाव में शुरू हुई प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए परेशानी का सबब बन गई।
जून माह में नए सत्र के लिए जब पंजीकरण शुरू हुए तो छात्रों को वेबसाइट पर कालेजों और विषयों के नाम ही नहीं मिले। करीब 15 दिन तक इसी जद्दोजहद से जूझने के बाद व्यवस्था सुचारू हो सकी। इसके बाद जब मेरिट लिस्ट निकाली गई तो उसमें भी गलतियों की भरमारी थी, जिसे देखते हुए विवि ने इसे निरस्त कर दोबारा जारी की।
बार-बार कमियां रहने और उसे सुधारने की वजह से प्रवेश प्रक्रिया सितंबर माह में संपन्न हो सकी। इसके बाद सुधार परीक्षा और उसके परिणाम की वजह से देरी हुई। इसकी दिसंबर माह तक प्रवेश प्रक्रिया संपन्न हुई है। अभी परीक्षा फार्म भरे जा रहे हैं, लेकिन विवि सत्र को सुचारू रखने के लिए एक मार्च से ही परीक्षा प्रस्तावित की है।
बायोमीट्रिक उपस्थिति बढ़ाएगी कालेजों में रौनक
निदेशक समाज कल्याण उत्तर प्रदेश के निर्देश पर मेडिकल कालेज, पॉलीटेक्निक, आईटीआई, राजकीय, अशासकीय और वित्तविहीन कालेज के निदेशक व प्राचार्यों को शैक्षिक सत्र 2017-18 से पाठ्यक्रमों में छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति के निर्देश दिए हैं।
इसके अनुसार अनुसूचित जाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति नियमावली में उल्लिखित प्राविधानों के अंतर्गत शैक्षिक सत्र 2017-18 के छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रमों में न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। इसकी गणना के लिए संस्थानों में बायोमीट्रिक मशीन स्थापित करानी है।
शिक्षकों का कहना है कि महाविद्यालयों में शासन ने सत्र की शुुरुआत में छात्रों के लिए भी बायोमीट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य किया था। इसके तहत सभी कालेजों से छात्रसंख्या के अनुरूप मशीनों की आवश्यकता और संभावित बजट की जानकारी मांगी थी।
प्राचार्यों ने इसको भेज भी दिया था, लेकिन कुछ दिनों बाद अनिवार्यता को समाप्त करने का आदेश भी शासन से प्राप्त हो गया था। अब दोबारा से आदेश आने के बाद शिक्षकों ने शैक्षिक स्तर को सुधारने के लिहाज से इसे आवश्यक बताया है। उनका कहना है कि इससे कालेज में छात्रों की आवाजाही बढ़ेगी और पढ़ाई सुचारू हो सकेगी।
नि:शुल्क मिड डे मील, यूनीफार्म, बैग, जूते, मोजे का लाभ दिया गया। अब स्वेटर का इंतजार किया जा रहा है। नए साल में स्वेटर मिल जाएंगे। माध्यमिक में परीक्षा प्रक्रिया और उच्च शिक्षा की प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इनके बीच समान बात यह है कि दोनों स्तर का शैक्षिक सत्र एकदम गड़बड़ा गया है।
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माध्यमिक में जहां छह माह की पढ़ाई में छात्र परीक्षा देंगे, वहीं कालेजों में बमुश्किल डेढ़ महीने ही कक्षाएं संचालित हो सकी हैं। इसके बावजूद आगामी वर्ष से माध्यमिक का जहां शैक्षिक सत्र अप्रैल माह से शुरू हो जाएगा, वहीं उच्च शिक्षा में बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होने से विद्यार्थियों की कक्षाओं में रौनक देखने को मिलेगी। वर्ष भर की गतिविधियों को समेटे आगामी वर्ष की आशाओं को समाहित करती रिपोर्ट।
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने शैक्षिक सत्र 2017-18 में अशासकीय कालेजों में व्याप्त अनियमितताएं और निजी कालेजों की मनमानी को रोकने के लिए केंद्रीयकृत प्रवेश प्रणाली लागू की थी। पूरी तैयारी के अभाव में शुरू हुई प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए परेशानी का सबब बन गई।
जून माह में नए सत्र के लिए जब पंजीकरण शुरू हुए तो छात्रों को वेबसाइट पर कालेजों और विषयों के नाम ही नहीं मिले। करीब 15 दिन तक इसी जद्दोजहद से जूझने के बाद व्यवस्था सुचारू हो सकी। इसके बाद जब मेरिट लिस्ट निकाली गई तो उसमें भी गलतियों की भरमारी थी, जिसे देखते हुए विवि ने इसे निरस्त कर दोबारा जारी की।
बार-बार कमियां रहने और उसे सुधारने की वजह से प्रवेश प्रक्रिया सितंबर माह में संपन्न हो सकी। इसके बाद सुधार परीक्षा और उसके परिणाम की वजह से देरी हुई। इसकी दिसंबर माह तक प्रवेश प्रक्रिया संपन्न हुई है। अभी परीक्षा फार्म भरे जा रहे हैं, लेकिन विवि सत्र को सुचारू रखने के लिए एक मार्च से ही परीक्षा प्रस्तावित की है।
बायोमीट्रिक उपस्थिति बढ़ाएगी कालेजों में रौनक
निदेशक समाज कल्याण उत्तर प्रदेश के निर्देश पर मेडिकल कालेज, पॉलीटेक्निक, आईटीआई, राजकीय, अशासकीय और वित्तविहीन कालेज के निदेशक व प्राचार्यों को शैक्षिक सत्र 2017-18 से पाठ्यक्रमों में छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति के निर्देश दिए हैं।
इसके अनुसार अनुसूचित जाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति नियमावली में उल्लिखित प्राविधानों के अंतर्गत शैक्षिक सत्र 2017-18 के छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रमों में न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। इसकी गणना के लिए संस्थानों में बायोमीट्रिक मशीन स्थापित करानी है।
शिक्षकों का कहना है कि महाविद्यालयों में शासन ने सत्र की शुुरुआत में छात्रों के लिए भी बायोमीट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य किया था। इसके तहत सभी कालेजों से छात्रसंख्या के अनुरूप मशीनों की आवश्यकता और संभावित बजट की जानकारी मांगी थी।
प्राचार्यों ने इसको भेज भी दिया था, लेकिन कुछ दिनों बाद अनिवार्यता को समाप्त करने का आदेश भी शासन से प्राप्त हो गया था। अब दोबारा से आदेश आने के बाद शिक्षकों ने शैक्षिक स्तर को सुधारने के लिहाज से इसे आवश्यक बताया है। उनका कहना है कि इससे कालेज में छात्रों की आवाजाही बढ़ेगी और पढ़ाई सुचारू हो सकेगी।