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Moradabad News: माचिस से न जलाएं पटाखे, फुलझड़ी का करें प्रयोग
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मुरादाबाद। पटाखे जलाते समय ध्यान रखें कि माचिस का नहीं फुलझड़ी या मोमबत्ती का प्रयोग करना है। बच्चे अकेले पटाखे न जलाएं, बड़ों की देखरेख में ही आतिशबाजी का इस्तेमाल करें। यदि हाथ या शरीर का कोई अन्य अंग जल जाए तो उस पर टूथपेस्ट न लगाएं। अंग पर 15 मिनट पर ताजा पानी डालते रहें। इसके बाद प्राथमिक उपचार के तौर पर एंटीबायोटिक क्रीम लगा सकते हैं।
पिछले साल दिवाली के मौके पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जलने के 16 मामले आए थे। ज्यादा जलने के कारण इनमें से 12 लोगों को रेफर किया गया था, जबकि चार मरीजों का इलाज बर्न वार्ड में चला था। दिवाली को ध्यान में रखकर डॉक्टरों ने पहले ही एडवायजरी जारी की है। प्लास्टिक सर्जन डॉ. मधुसूदन गुप्ता का कहना है कि पटाखे जलाने से पहले बाल्टियों में पानी या रेत भरकर रख लें, जिससे आग का खतरा होने पर फौरन कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि कई लोग हाथ जलने पर टूथपेस्ट लगा लेते हैं। इससे ठंडक तो मिलती है लेकिन इनफेक्शन का खतरा रहता है। यदि घाव ज्यादा न हुआ तो आप गोले का तेल लगा सकते हैं। यदि त्वचा पर फफोले पड़ गए हैं को उन्हें फोड़ने की गलती न करें। इससे इनफेक्शन हो सकता है। जलने पर चूड़ियां व अंगूठियां जल्ज से जल्द उतार देनी चाहिए, क्योंकि सूजन आने के बाद ये चीजें नहीं उतरती हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि आंख में पटाखा या धुआं चले जाने पर रगड़ना नहीं चाहिए, आंख को दस मिनट तक पानी से धोना चाहिए।
बरतें ये सावधानियां
- बंद स्थान पर पटाखे न जलाएं
- चिंगारी छोड़ने वाले पटाखों के पास न जाएं
- पटाखे जलाते समय जूते पहने।
- जो पटाखा न फूटे उस पर पानी या मिट्टी डाल दें
- छोटे बच्चों व बुजुर्गों के पास पटाखे न जलाएं
- पटाखे हाथ में रखकर न फोड़े
- ढीले कपड़े न पहनें
- पटाखे जेब में रख कर न घूमें
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पिछले साल दिवाली के मौके पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जलने के 16 मामले आए थे। ज्यादा जलने के कारण इनमें से 12 लोगों को रेफर किया गया था, जबकि चार मरीजों का इलाज बर्न वार्ड में चला था। दिवाली को ध्यान में रखकर डॉक्टरों ने पहले ही एडवायजरी जारी की है। प्लास्टिक सर्जन डॉ. मधुसूदन गुप्ता का कहना है कि पटाखे जलाने से पहले बाल्टियों में पानी या रेत भरकर रख लें, जिससे आग का खतरा होने पर फौरन कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि कई लोग हाथ जलने पर टूथपेस्ट लगा लेते हैं। इससे ठंडक तो मिलती है लेकिन इनफेक्शन का खतरा रहता है। यदि घाव ज्यादा न हुआ तो आप गोले का तेल लगा सकते हैं। यदि त्वचा पर फफोले पड़ गए हैं को उन्हें फोड़ने की गलती न करें। इससे इनफेक्शन हो सकता है। जलने पर चूड़ियां व अंगूठियां जल्ज से जल्द उतार देनी चाहिए, क्योंकि सूजन आने के बाद ये चीजें नहीं उतरती हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि आंख में पटाखा या धुआं चले जाने पर रगड़ना नहीं चाहिए, आंख को दस मिनट तक पानी से धोना चाहिए।
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बरतें ये सावधानियां
- बंद स्थान पर पटाखे न जलाएं
- चिंगारी छोड़ने वाले पटाखों के पास न जाएं
- पटाखे जलाते समय जूते पहने।
- जो पटाखा न फूटे उस पर पानी या मिट्टी डाल दें
- छोटे बच्चों व बुजुर्गों के पास पटाखे न जलाएं
- पटाखे हाथ में रखकर न फोड़े
- ढीले कपड़े न पहनें
- पटाखे जेब में रख कर न घूमें