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जानलेवा साबित हुआ जमीनों के धंधे में हाथ डालना
जितेंद्र कुमार-उमेश शर्मा / अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Tue, 12 Apr 2016 03:29 AM IST
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तंजील अहमद
- फोटो : file photo
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एनआई के डीएसपी तंजील अहमद को जमीनों के धंधे में पंगा लेना महंगा पड़ गया। दिल्ली, अलीगढ़ और बिजनौर के कुछ प्रापर्टी विवादों में वह हिस्ट्रीशीटर मुनीर के आड़े आ गए थे। पुलिस तहकीकात में पता चला है कि मुनीर कभी तंजील अहमद का करीबी और खास हुआ करता था।
लेकिन जमीनों के धंधे में मुनीर के आड़े आने की कीमत तंजील को जान देकर चुकानी पड़ी। तफ्तीश में हत्या के पीछे कुछ और वजहें भी उजागर हुई हैैं। कुल मिलाकर हत्या की दोनों वजहें और किरदार डीएसपी तंजील के खानदान-हिस्ट्रीशीटर मुनीर के परिवार के बीच ही सिमटे हैं।
डीएसपी तंजील की हत्या उन्हीं के गांव सहसपुर के हिस्ट्रीशीटर तंजील ने की है, यह बात तो कई दिन पहले साफ हो चुकी थी। लेकिन मास्टरमाइंड मुनीर हाथ नहीं आया था। हत्या में इस्तेमाल अत्याधुनिक हथियार भी पुलिस के हाथ नहीं लग सके थे। केस हाईप्रोफाइल था लिहाजा पुलिस हवाबाजी में खुलासा करने से बच रही थी।
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हालांकि शुक्रवार को डीजीपी जावीद अहमद खुलासे की मंशा से ही बिजनौर पहुंचे थे लेकिन ठोस सुबूत न होने की वजह से पुलिस के खिलाफ उठ रही आवाजों के चलते उन्हें बैरंग लौटना पड़ा था। एसटीएफ, एटीएस और एनआईए के पूरी ताकत झोंकने के बाद भी जब मुनीर हाथ नहीं लगा तो पुलिस ने सोमवार को दूसरा रास्ता अख्तियार किया।
पुलिस ने वारदात में हमराज रहे मुनीर के दो दोस्तों को गवाह बना लिया। ये दोनों ही मुनीर के रिश्तेदार भी लगते हैं और डीएसपी की हत्या की साजिश की इन्हें पूरी जानकारी थी। लेकिन पुलिस ने इन्हें वायदा माफ गवाह बनाने का भरोसा दिलाया है। पुलिस ने इन दोनों को सोमवार को बेहद खामोशी के साथ बिजनौर की अदालत में पेश करके 164 के बयान कराए।
इनके बयानों में मुनीर, रेहान और जैनुल के नाम आने के बाद रात को रेहान और जैनुल की गिरफ्तारी दर्शा दी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि किसी वक्त डीएसपी तंजील और मुनीर में नजदीकियां थीं। लेकिन दिल्ली की किसी प्रापर्टी को लेकर दोनों के रिश्ते बिगड़ गए थे। अलीगढ़ में भी जमीनों के धंधे में उन्होंने मुनीर से पंगा लिया।
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लेकिन जमीनों के धंधे में मुनीर के आड़े आने की कीमत तंजील को जान देकर चुकानी पड़ी। तफ्तीश में हत्या के पीछे कुछ और वजहें भी उजागर हुई हैैं। कुल मिलाकर हत्या की दोनों वजहें और किरदार डीएसपी तंजील के खानदान-हिस्ट्रीशीटर मुनीर के परिवार के बीच ही सिमटे हैं।
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डीएसपी तंजील की हत्या उन्हीं के गांव सहसपुर के हिस्ट्रीशीटर तंजील ने की है, यह बात तो कई दिन पहले साफ हो चुकी थी। लेकिन मास्टरमाइंड मुनीर हाथ नहीं आया था। हत्या में इस्तेमाल अत्याधुनिक हथियार भी पुलिस के हाथ नहीं लग सके थे। केस हाईप्रोफाइल था लिहाजा पुलिस हवाबाजी में खुलासा करने से बच रही थी।
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हालांकि शुक्रवार को डीजीपी जावीद अहमद खुलासे की मंशा से ही बिजनौर पहुंचे थे लेकिन ठोस सुबूत न होने की वजह से पुलिस के खिलाफ उठ रही आवाजों के चलते उन्हें बैरंग लौटना पड़ा था। एसटीएफ, एटीएस और एनआईए के पूरी ताकत झोंकने के बाद भी जब मुनीर हाथ नहीं लगा तो पुलिस ने सोमवार को दूसरा रास्ता अख्तियार किया।
पुलिस ने वारदात में हमराज रहे मुनीर के दो दोस्तों को गवाह बना लिया। ये दोनों ही मुनीर के रिश्तेदार भी लगते हैं और डीएसपी की हत्या की साजिश की इन्हें पूरी जानकारी थी। लेकिन पुलिस ने इन्हें वायदा माफ गवाह बनाने का भरोसा दिलाया है। पुलिस ने इन दोनों को सोमवार को बेहद खामोशी के साथ बिजनौर की अदालत में पेश करके 164 के बयान कराए।
इनके बयानों में मुनीर, रेहान और जैनुल के नाम आने के बाद रात को रेहान और जैनुल की गिरफ्तारी दर्शा दी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि किसी वक्त डीएसपी तंजील और मुनीर में नजदीकियां थीं। लेकिन दिल्ली की किसी प्रापर्टी को लेकर दोनों के रिश्ते बिगड़ गए थे। अलीगढ़ में भी जमीनों के धंधे में उन्होंने मुनीर से पंगा लिया।