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बैंकों में पहुंचती रहीं फर्जी चिट्ठियां, होता रहा भुगतान
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Mon, 27 Jun 2016 11:08 AM IST
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घोटाला
- फोटो : demo
सीडीओ के फर्जी दस्तखत करके सरकारी बैंक खाते से 1.95 करोड़ रुपये उड़ाए जाने की घटना ने अफसरों की नींद उड़ा दी है। पूरे खेल में कई अफसरों पर भी तलवार लटक रही है। इस बीच सीडीओ आंद्रा वाम्सी ने रविवार को साफ किया है कि पूरा घोटाला बैंकों के लेवल पर हुआ है। फर्जी लेटर बैंकों में पहुंचते रहे और बिना दस्तखतों की जांच के बैंक मैनेजर रकम का भुगतान करते रहे।
सीडीओ का कहना है कि अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए सरकारी एकाउंट एसबीआई की कचहरी के सामने स्थित मुख्य शाखा में खोला गया था। नियम के मुताबिक छात्रवृत्ति की रकम छात्रों के एकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए सूची और लेटर सीधे मुख्य ब्रांच को ही भेजा जाता है। लेकिन फर्जीवाड़ा करने वालों ने फर्जी दस्तखत वाले लेटर सीधे एसबीआई की करुला शाखा, पीली कोठी शाखा और भोजपुर शाखा में भेजे।
बैंक अधिकारियों ने नियमविरुद्ध आए इन फर्जी पत्रों पर ही बिना पड़ताल के स्कूलों के एकाउंट में रकम ट्रांसफर कर दी। मेन ब्रांच ने भी ऐसा ही किया। सीडीओ ने कहा कि जिस तरह आंखें मूंदकर रकम ट्रांसफर की गई है उससे साफ है कि बैंक मैनेजर और स्टाफ पूरे खेल में शामिल थे।
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क्या है मामला
भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए खोले गए सरकारी खाते से सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत करके 1.95 करोड़ रुपये निकाल लिए गए हैं। यह खाता डीएम और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के नाम से है। डीएम ने इस खाते को आपरेट करने का अधिकार अपने स्थान पर सीडीओ को दे रखा है।
डीएम के आदेश पर हुई जांच में मामला खुलने के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बीते दिन सिविल लाइंस थाने में महकमे के पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार पुत्र अधिराज सिंह निवासी आदर्श कालोनी, धर्मानंद भटनागर पुत्र आनंदस्वरूप निवासी पीपलसाना, सुरेंद्र सिंह और एसबीआई के चारों शाखा प्रबंधकों व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी करके सरकारी धन के गबन की रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
हर माह जाता है स्टेटमेंट फिर क्यों चुप थे अफसर
मुरादाबाद। बेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने फिलहाल पूरा मामला बैंक अफसरों पर डाल दिया है लेकिन उंगलियां समाज कल्याण के अधिकारियों पर भी उठ रही हैं। बैंकें सरकारी खातों का स्टेटमेंट हर माह संबंधित विभाग को भेजती हैं। जाहिर है कि इस खाते के स्टेटमेंट भी हर माह जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को मिलते रहे होंगे। बड़ा सवाल ये है कि 1.95 करोड़ रुपये सरकारी खाते से निकाले जाने के बावजूद वो चुप क्यों रहे। डीएम के हरकत में आने के बाद ही रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई गई।
बिना अनुमोदन कैसे आ गए खाते में 83 लाख
मुरादाबाद। सीडीओ ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि किसी भी सरकारी खाते से न तो बिना अनुमोदन के रकम निकाली जा सकती है और न ही उसमें रकम डाली जा सकती है। खाते को आपरेट कर रहे अफसर की अनुमति से ही सरकारी बैंक खाते में रकम डाली जा सकती है। कोई भी प्राइवेट आदमी इन सरकारी खातों में रकम नहीं डाल सकता। लेकिन एसबीआई के अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी बैंक खाते में 80 लाख रुपये ट्रांसफर होने दिए। सीडीओ ने बताया कि मामला खुलने के बाद फर्जीवाड़ा करने वालों में खलबली मची तो उन्होंने 63 लाख रुपये वापस खाते में डाल दिए जबकि 20 लाख रुपये का पेमेंट रोक दिया गया।
एक ही एकाउंट से दस बार में डाले गए 63 लाख रुपये
मुरादाबाद। छात्रवृत्ति की रकम में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद फर्जीवाड़ा करने वालों में भी खलबली मची है। सीडीओ ने बताया है कि सरकारी एकाउंट से फर्जी दस्तखत के जरिए निकाले गए 63 लाख रुपये एक व्यक्ति ने वापस इसी एकाउंट में जमा किए हैं। यह रकम नेट बैंकिंग के जरिए एक ही खाते से दस बार में सरकारी खाते में ट्रांसफर की गई है। इसके लिए पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया है। इसी पैन नंबर के जरिए पुलिस अब रकम ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति व उसके साथियों तक पहुंचेगी।
इस तरह होता था खेल
- अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों में छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से एक लेटर स्टेट बैंक की मुख्य शाखा को भेजा जाता था, जिसमें छात्रों के नाम, उनके एकाउंट नंबर और रकम का विवरण होता था। इसी लेटर के आधार पर लेटर में दर्शाए गए छात्रों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी जाती थी। फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग ने ऐसे ही लेटर बनाए और उन पर सीडीओ व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत बनाकर सीधे एसबीआई की करुला शाखा, पीली कोठी, भोजपुर और मुख्य शाखा को भेज दिया। यहां से रकम संबंधित बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
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सीडीओ का कहना है कि अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए सरकारी एकाउंट एसबीआई की कचहरी के सामने स्थित मुख्य शाखा में खोला गया था। नियम के मुताबिक छात्रवृत्ति की रकम छात्रों के एकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए सूची और लेटर सीधे मुख्य ब्रांच को ही भेजा जाता है। लेकिन फर्जीवाड़ा करने वालों ने फर्जी दस्तखत वाले लेटर सीधे एसबीआई की करुला शाखा, पीली कोठी शाखा और भोजपुर शाखा में भेजे।
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बैंक अधिकारियों ने नियमविरुद्ध आए इन फर्जी पत्रों पर ही बिना पड़ताल के स्कूलों के एकाउंट में रकम ट्रांसफर कर दी। मेन ब्रांच ने भी ऐसा ही किया। सीडीओ ने कहा कि जिस तरह आंखें मूंदकर रकम ट्रांसफर की गई है उससे साफ है कि बैंक मैनेजर और स्टाफ पूरे खेल में शामिल थे।
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क्या है मामला
भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए खोले गए सरकारी खाते से सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत करके 1.95 करोड़ रुपये निकाल लिए गए हैं। यह खाता डीएम और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के नाम से है। डीएम ने इस खाते को आपरेट करने का अधिकार अपने स्थान पर सीडीओ को दे रखा है।
डीएम के आदेश पर हुई जांच में मामला खुलने के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बीते दिन सिविल लाइंस थाने में महकमे के पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार पुत्र अधिराज सिंह निवासी आदर्श कालोनी, धर्मानंद भटनागर पुत्र आनंदस्वरूप निवासी पीपलसाना, सुरेंद्र सिंह और एसबीआई के चारों शाखा प्रबंधकों व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी करके सरकारी धन के गबन की रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
हर माह जाता है स्टेटमेंट फिर क्यों चुप थे अफसर
मुरादाबाद। बेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने फिलहाल पूरा मामला बैंक अफसरों पर डाल दिया है लेकिन उंगलियां समाज कल्याण के अधिकारियों पर भी उठ रही हैं। बैंकें सरकारी खातों का स्टेटमेंट हर माह संबंधित विभाग को भेजती हैं। जाहिर है कि इस खाते के स्टेटमेंट भी हर माह जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को मिलते रहे होंगे। बड़ा सवाल ये है कि 1.95 करोड़ रुपये सरकारी खाते से निकाले जाने के बावजूद वो चुप क्यों रहे। डीएम के हरकत में आने के बाद ही रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई गई।
बिना अनुमोदन कैसे आ गए खाते में 83 लाख
मुरादाबाद। सीडीओ ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि किसी भी सरकारी खाते से न तो बिना अनुमोदन के रकम निकाली जा सकती है और न ही उसमें रकम डाली जा सकती है। खाते को आपरेट कर रहे अफसर की अनुमति से ही सरकारी बैंक खाते में रकम डाली जा सकती है। कोई भी प्राइवेट आदमी इन सरकारी खातों में रकम नहीं डाल सकता। लेकिन एसबीआई के अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी बैंक खाते में 80 लाख रुपये ट्रांसफर होने दिए। सीडीओ ने बताया कि मामला खुलने के बाद फर्जीवाड़ा करने वालों में खलबली मची तो उन्होंने 63 लाख रुपये वापस खाते में डाल दिए जबकि 20 लाख रुपये का पेमेंट रोक दिया गया।
एक ही एकाउंट से दस बार में डाले गए 63 लाख रुपये
मुरादाबाद। छात्रवृत्ति की रकम में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद फर्जीवाड़ा करने वालों में भी खलबली मची है। सीडीओ ने बताया है कि सरकारी एकाउंट से फर्जी दस्तखत के जरिए निकाले गए 63 लाख रुपये एक व्यक्ति ने वापस इसी एकाउंट में जमा किए हैं। यह रकम नेट बैंकिंग के जरिए एक ही खाते से दस बार में सरकारी खाते में ट्रांसफर की गई है। इसके लिए पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया है। इसी पैन नंबर के जरिए पुलिस अब रकम ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति व उसके साथियों तक पहुंचेगी।
इस तरह होता था खेल
- अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों में छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से एक लेटर स्टेट बैंक की मुख्य शाखा को भेजा जाता था, जिसमें छात्रों के नाम, उनके एकाउंट नंबर और रकम का विवरण होता था। इसी लेटर के आधार पर लेटर में दर्शाए गए छात्रों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी जाती थी। फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग ने ऐसे ही लेटर बनाए और उन पर सीडीओ व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत बनाकर सीधे एसबीआई की करुला शाखा, पीली कोठी, भोजपुर और मुख्य शाखा को भेज दिया। यहां से रकम संबंधित बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई।