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ट्रेजरी घोटाले में चार आरोपी गिरफ्तार
Updated Mon, 16 Apr 2018 02:00 AM IST
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मुरादाबाद।
दस करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रेजरी घोटाले में पुलिस ने रविवार को एक पूर्व फौजी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक घोटाले की रकम का कुछ हिस्सा चारों आरोपियों के बैंक खातों में गया था। जिसे बैंक से निकालने के बाद आरोपियों ने अपना कमीशन काटकर मास्टरमाइंड दे दिया था। पुलिस इस मामले में फरार चल रहे मास्टर माइंड पूर्व लेखपाल अरुण भटनागर और उसके पांच रिश्तेदारों को पकड़ने में नाकाम है।
घोटाले में शामिल कर्मचारियों में आपस में झगड़ा होने के बाद 22 मार्च को ट्रेजरी घोटाला सामने आया था। एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अनिल कुमार मेहरोत्रा निवासी मिलन विहार को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। एडीएम के निर्देश पर भूलेख लिपिक प्रदीप कुमार ने अनिल मेहरोत्रा निवासी मिलन विहार, सोनू, हिमांशु सक्सेना, अरुण कुमार निवासी बिलारी, कांति देवी, ज्योति भटनागर और शकुंतला भटनागर निवासी बरवलान के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उस समय 1.24 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। लेकिन बाद में हुई जांच में घोटाले की रकम 10 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। विवेचक प्रेमपाल सिंह का कहना है कि ट्रेजरी घोटाले में पूर्व फौजी पवन कुमार यादव निवासी रामनगर गंधपुर बिलारी, बीएससी के छात्र विशाल यादव निवासी दयानंद कालोनी पीतल नगरी मुरादाबाद और बिलारी के बहादुरपुर निवासी किसान परवीन सिंह व महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है। विवेचक ने बताया कि घोटाले की रकम में से 1.75 लाख रुपये पवन यादव, 2.08 लाख रुपये विशाल यादव, 2.08 लाख रुपये परवीन सिंह और 1.59 लाख रुपये महेंद्र सिंह के बैंक खातों में गए थे। पूर्व लेखपाल अरुण भटनागर को इस घोटाले का मास्टर माइंड बताया जा रहा है। बाकी नामजद पांच अभियुक्त भी उसके रिश्तेदार हैं। इन सभी के खातों में भी घोटाले की रकम गई थी। लेकिन पुलिस अभी तक इन्हें पकड़ नहीं सकी है।
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दस करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रेजरी घोटाले में पुलिस ने रविवार को एक पूर्व फौजी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक घोटाले की रकम का कुछ हिस्सा चारों आरोपियों के बैंक खातों में गया था। जिसे बैंक से निकालने के बाद आरोपियों ने अपना कमीशन काटकर मास्टरमाइंड दे दिया था। पुलिस इस मामले में फरार चल रहे मास्टर माइंड पूर्व लेखपाल अरुण भटनागर और उसके पांच रिश्तेदारों को पकड़ने में नाकाम है।
घोटाले में शामिल कर्मचारियों में आपस में झगड़ा होने के बाद 22 मार्च को ट्रेजरी घोटाला सामने आया था। एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अनिल कुमार मेहरोत्रा निवासी मिलन विहार को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। एडीएम के निर्देश पर भूलेख लिपिक प्रदीप कुमार ने अनिल मेहरोत्रा निवासी मिलन विहार, सोनू, हिमांशु सक्सेना, अरुण कुमार निवासी बिलारी, कांति देवी, ज्योति भटनागर और शकुंतला भटनागर निवासी बरवलान के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उस समय 1.24 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। लेकिन बाद में हुई जांच में घोटाले की रकम 10 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। विवेचक प्रेमपाल सिंह का कहना है कि ट्रेजरी घोटाले में पूर्व फौजी पवन कुमार यादव निवासी रामनगर गंधपुर बिलारी, बीएससी के छात्र विशाल यादव निवासी दयानंद कालोनी पीतल नगरी मुरादाबाद और बिलारी के बहादुरपुर निवासी किसान परवीन सिंह व महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है। विवेचक ने बताया कि घोटाले की रकम में से 1.75 लाख रुपये पवन यादव, 2.08 लाख रुपये विशाल यादव, 2.08 लाख रुपये परवीन सिंह और 1.59 लाख रुपये महेंद्र सिंह के बैंक खातों में गए थे। पूर्व लेखपाल अरुण भटनागर को इस घोटाले का मास्टर माइंड बताया जा रहा है। बाकी नामजद पांच अभियुक्त भी उसके रिश्तेदार हैं। इन सभी के खातों में भी घोटाले की रकम गई थी। लेकिन पुलिस अभी तक इन्हें पकड़ नहीं सकी है।
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