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पीएम आवास के नाम पर हो रही वसूली
Updated Sat, 05 May 2018 02:08 AM IST
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मुरादाबाद।
शासन की प्राथमिकता वाली प्रधानमंत्री आवास योजना केनाम पर भी वसूली का खेल लगातार सामने आ रहा है। एक महीने में दूसरी बार पात्रों से वसूली का खुलासा हुआ है। डीएम को पात्रों से दो-दो हजार रुपये वसूलने की शिकायत मिली थी। उसकेबाद शुरू हुई जांच में पात्रों का सत्यापन के नाम पर वसूली करने में निजी कंपनी के दो कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। इस घटना के बाद डूडा ने तत्काल कंपनी से आफिस खाली करा लिया है।
शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना का संचालन डूडा के जरिए किया जा रहा है। आवास के लिए मिलने वाले आवेदनों में से पात्रों के चयन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने एक निजी कंपनी को सौंपी है। कंपनी के कर्मचारी जिले में रहकर पात्रों का सत्यापन करते हैं। कंपनी का आफिस न होने के कारण कई महीने से ये डूडा के एक कमरे में अपना कार्य कर रहे थे। डीएम को लगातार शिकायत मिल रही थीं कि मकान बनवाने के नाम पर दो से पांच हजार रुपये की वसूली की जा रही है। इसकेचलते डीएम ने पीओ डूडा को तलब किया था। उसके साथ ही अपने कर्मचारी को पीड़ितों के साथ भेजकर जांच कराई गई। जिसमें सत्यापन कंपनी के कर्मचारी प्रवीण मिश्रा और जितेंद्र सिंह की पहचान हुई। उसके बाद पीओ डूडा ने आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस भेजी तो वह भाग गए। इस घटना के बाद डूडा के अधिकारियों ने सत्यापन कंपनी के स्टाफ को अपने आफिस से बाहर कर दिया। उनकी दो हजार फाइलों को भी उठवा दिया गया है। बदनामी केचलते डूडा अपने आफिस से सत्यापन कंपनी का काम नहीं चलने देगा। इससे पहले डीएम इसी कंपनी के एक जेई को वसूली के आरोप में जेल भिजवा चुके हैं।
पीओ डूडा सतीश कुमार ने बताया कि सत्यापन कंपनी के दोनों कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी है। सत्यापन कंपनी ने दोनों युवकों की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई है।
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शासन की प्राथमिकता वाली प्रधानमंत्री आवास योजना केनाम पर भी वसूली का खेल लगातार सामने आ रहा है। एक महीने में दूसरी बार पात्रों से वसूली का खुलासा हुआ है। डीएम को पात्रों से दो-दो हजार रुपये वसूलने की शिकायत मिली थी। उसकेबाद शुरू हुई जांच में पात्रों का सत्यापन के नाम पर वसूली करने में निजी कंपनी के दो कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। इस घटना के बाद डूडा ने तत्काल कंपनी से आफिस खाली करा लिया है।
शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना का संचालन डूडा के जरिए किया जा रहा है। आवास के लिए मिलने वाले आवेदनों में से पात्रों के चयन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने एक निजी कंपनी को सौंपी है। कंपनी के कर्मचारी जिले में रहकर पात्रों का सत्यापन करते हैं। कंपनी का आफिस न होने के कारण कई महीने से ये डूडा के एक कमरे में अपना कार्य कर रहे थे। डीएम को लगातार शिकायत मिल रही थीं कि मकान बनवाने के नाम पर दो से पांच हजार रुपये की वसूली की जा रही है। इसकेचलते डीएम ने पीओ डूडा को तलब किया था। उसके साथ ही अपने कर्मचारी को पीड़ितों के साथ भेजकर जांच कराई गई। जिसमें सत्यापन कंपनी के कर्मचारी प्रवीण मिश्रा और जितेंद्र सिंह की पहचान हुई। उसके बाद पीओ डूडा ने आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस भेजी तो वह भाग गए। इस घटना के बाद डूडा के अधिकारियों ने सत्यापन कंपनी के स्टाफ को अपने आफिस से बाहर कर दिया। उनकी दो हजार फाइलों को भी उठवा दिया गया है। बदनामी केचलते डूडा अपने आफिस से सत्यापन कंपनी का काम नहीं चलने देगा। इससे पहले डीएम इसी कंपनी के एक जेई को वसूली के आरोप में जेल भिजवा चुके हैं।
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पीओ डूडा सतीश कुमार ने बताया कि सत्यापन कंपनी के दोनों कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी है। सत्यापन कंपनी ने दोनों युवकों की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई है।
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