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पुलिस की नाकामी पर एक बार फिर हाईकोर्ट की मुहर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2019 02:28 AM IST
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पुलिस की नाकामी पर  एक बार फिर हाईकोर्ट की मुहर
मुरादाबाद। जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएस डा. शैली मेहरोत्रा चौहरा हत्या कांड में पुलिस की नाकामी पर एक बार फिर हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी है। इस मामले की जांच में तीन बार सीजेएम और दो बार हाईकोर्ट ने विवेचना अधिकारियों के खिलाफ टिप्पणी की है। इतना सब कुछ होने को बावजूद पुलिस की ओर से लापरवाही होती जा रही है। जांच में पुलिस अधिकारी औपचारिकताएं पूरी करा रहे हैं।
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करीब तीन महीने से हाईकोर्ट डा. शैली हत्या कांड की गहराई से जांच के लिए स्थानीय स्तर पर पुलिस अधिकारियों को आदेश देता रहा है। दो बार विवेचना अधिकारी और सीओ तलब किए गए थे। उनके स्तर से जांच का आश्वासन दिया गया लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच के दौरान औपचारिकता ही निभाई गई। आखिर में 13 मार्च को अदालत को इस मामले की जांच कराने के आदेश डीजीपी को करने पड़े हैं। डा. शैली मेहरोत्रा हत्या कांड की पैरवी कर रहे वकील कुमार आशुतोष श्रीवास्तव का कहना है कि वादी के आवेदन पर जांच के लिए डीजीपी को पांच काबिल अफसरों की टीम बनानी है। यह टीम जांच करके दो महीने में रिपोर्ट पेश करेगी। उसी के बाद इस मामले में कार्रवाई की जा सकेगी।
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इस हत्याकांड की जांच में बारी बारी से सात विवेचनाधिकारी जुटे थे लेकिन वह सभी असफल साबित हुए। जिसकी वजह संदिग्धों का नारको टेस्ट नहीं कराया गया था । यदि उनका नारको टेस्ट और मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर गहनता से कार्रवाई की होती तो खुलासा हो सकता था। संदिग्धों के नार्को टेस्ट के लिए पहल नहीं की गई है।
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दोबारा जांच के दौरान बेटी ने नौकरों पर जताया था शक
मुरादाबाद। फोरेंसिक टीम की जांच में इस प्रकरण की विवेचना डॉ. शैली के रिश्तेदारों पर केंद्रित थी। दोबारा जांच के दौरान डॉ. शैली की बेटी डॉ. गुंजन के बयान रुद्रपुर जाकर लिए गए। उन्होंने अंदेशा जताया है कि वारदात में नौकर शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने पहली विवेचना के दौरान नौकरों से सख्ती से पूछताछ नहीं की, वरना यह मामला खुल सकता था। इस मुकदमे की वादी डॉ. गुंजन ने सीओ से मांग की है कि वह नौकरों के खिलाफ जांच करें, अंदेशा है कि वारदात में नौकर का हाथ है। इसके साथ एक और अहम पहलू यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीन लोगों की सर्जिकल ब्लेड से गला रेतकर हत्या की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि हत्यारे मेडिकल लाइन के हैं। इस बिंदु पर पुलिस की ओर से पहल ही नहीं हुई।
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