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नौवीं के छात्र ने फंदे पर लटक कर दी जान
Updated Wed, 05 Sep 2018 02:12 AM IST
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मुरादाबाद।
मझोला के कांशीराम नगर में मंगलवार दोपहर अधिवक्ता के इकलौते बेटे यशदीप ने फंदे पर लटक कर जान दे दी। छात्र द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम से उसके परिवार में कोहराम मच गया। परिजन जिंदगी की आस में उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब उसकी सांसें थम चुकी थीं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है।
अधिवक्ता सुनील कुमार का परिवार कांशीराम नगर में रहता है। परिवार में पत्नी मोर कली और बेटा यशदीप (13) व बेटी माधवी हैं। यशदीप पारकर इंटर कालेज में कक्षा नौ में पढ़ता था। वह अपने दादा बलजीत सिंह, दादी राज कुमारी और बुआ ललिता कुमारी के साथ कांशीराम नगर में ही दूसरे आवास में रहता था। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बलजीत सिंह ने बताया कि उनका पोता रोज की तरह मंगलवार को दोपहर सवा बजे ऑटो से घर लौटा। उनसे अपना बैग रख दिया। खाना खाने के बाद वह स्टूल लेकर मकान की ऊपरी मंजिल पर चला गया। काफी देर बाद जब वह नीचे नहीं आया तो उसकी दादी राजकुमारी ऊपरी मंजिल पर पहुंच गई। पोते को फंदे पर लटका देख उसने चीख पुकार मचा दी। शोर शराबा सुनकर बलजीत सिंह भी ऊपर पहुंचे। इसके बाद आस पड़ोस से भी लोग आ गए। यश दीप को फंदे से नीचे उतारकर अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन डाक्टरों ने जवाब दे दिया। छात्र की मौत से उसके परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। दादा बलजीत सिंह ने बताया कि पोते ने किसी तरह की कोई परेशानी नहीं बताई थी। पोते ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की है। इसकी हमें भी कोई जानकारी नहीं है। पुलिस अधीक्षक नगर अंकित मित्तल ने बताया कि आत्महत्या की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। परिजनों से पूछताछ व जांच पड़ताल की जा रही है।
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मझोला के कांशीराम नगर में मंगलवार दोपहर अधिवक्ता के इकलौते बेटे यशदीप ने फंदे पर लटक कर जान दे दी। छात्र द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम से उसके परिवार में कोहराम मच गया। परिजन जिंदगी की आस में उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब उसकी सांसें थम चुकी थीं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है।
अधिवक्ता सुनील कुमार का परिवार कांशीराम नगर में रहता है। परिवार में पत्नी मोर कली और बेटा यशदीप (13) व बेटी माधवी हैं। यशदीप पारकर इंटर कालेज में कक्षा नौ में पढ़ता था। वह अपने दादा बलजीत सिंह, दादी राज कुमारी और बुआ ललिता कुमारी के साथ कांशीराम नगर में ही दूसरे आवास में रहता था। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बलजीत सिंह ने बताया कि उनका पोता रोज की तरह मंगलवार को दोपहर सवा बजे ऑटो से घर लौटा। उनसे अपना बैग रख दिया। खाना खाने के बाद वह स्टूल लेकर मकान की ऊपरी मंजिल पर चला गया। काफी देर बाद जब वह नीचे नहीं आया तो उसकी दादी राजकुमारी ऊपरी मंजिल पर पहुंच गई। पोते को फंदे पर लटका देख उसने चीख पुकार मचा दी। शोर शराबा सुनकर बलजीत सिंह भी ऊपर पहुंचे। इसके बाद आस पड़ोस से भी लोग आ गए। यश दीप को फंदे से नीचे उतारकर अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन डाक्टरों ने जवाब दे दिया। छात्र की मौत से उसके परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। दादा बलजीत सिंह ने बताया कि पोते ने किसी तरह की कोई परेशानी नहीं बताई थी। पोते ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की है। इसकी हमें भी कोई जानकारी नहीं है। पुलिस अधीक्षक नगर अंकित मित्तल ने बताया कि आत्महत्या की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। परिजनों से पूछताछ व जांच पड़ताल की जा रही है।
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