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जिंदगी संवारने के बाद मिला सात जन्मों का साथ
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मुरादाबाद।
प्रेम का मौसम चल रहा है। फिजाओं में इश्क की खुशबू बिखर रही है। सतरंगी माहौल में कुछ ऐसे भी युवा हैं, जिन्होंने पहले अपने लक्ष्य से प्रेम किया। जिंदगी संवारने के बाद प्रेम की दस्तक हुई। समाज की बनाई हुई तमाम रूढ़ियों ने अड़चन बनने की कोशिश की, लेकिन अंत में जीत सच्चे प्यार की हुई। परिजनों के आशीष से हंसी-खुशी सात जन्मों के लिए एक हो गए।
रात-रात भर जगकर कराई पढ़ाई
मूलरूप से गोरखपुर और वर्तमान में रामगंगा विहार निवासी रितेश श्रीवास्तव ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमबीए किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में जब वह पढ़ाई कर रहे थे तो किडनी में स्टोन की समस्या हो गई। परेशानी बढ़ने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उस वक्त परीक्षाएं भी चल रही थीं। ऐसी परिस्थिति में लगा कि पूरा करियर ही चौपट हो गया। तभी उनके पिता के दोस्त की पुत्री और उनकी सहपाठी सारिका फरिश्ता बनकर आईं। वह परिजनों के साथ अस्पताल में रुकतीं और रात-रात भर जगकर पढ़ाई करवातीं। उनकी इस देखभाल वह सहयोगी रैवेये की वजह से वह न सिर्फ शीघ्र स्वस्थ हुए, बल्कि 79 फीसदी अंकों के साथ एमबीए उत्तीर्ण किया। कैंपस प्लेसमेंट में नोएडा में नौकरी लग गई। इस वक्त तक सारिका के प्रति भावनाएं भी पैदा हो गई थीं। परिजन पहले से ही इस रिश्ते के लिए तैयार थे। रितेश और सारिका की सहमति मिलने के बाद उन्होंने दोनों की शादी करा दी। रितेश ने बताया कि सारिका ने जब सरप्राइज गिफ्ट में उन्हें बाइक दी तो वह उनकी जिंदगी का अनमोल पल बन गया था। वह कहते हैं कि एक-दूसरे के प्रति सहयोगी, ईमानदार रहेंगे तो जिंदगी में कभी परेशानी नहीं आएगी।
विदेशी धरती पर मिली देशी
बुद्धि विहार निवासी अंकुर गुप्ता ने मुरादाबाद से इंटरमीडिएट और गाजियाबाद से स्नातक किया था। वह बताते हैं कि पहली बार परिजनों से दूर गाजियाबाद में रहना उनके लिए सबसे मुश्किल पलों में से था। सबसे ज्यादा मम्मी की याद आती थी, लेकिन करियर भी बनाना था तो वह पढ़ाई पर ध्यान देने लगे। उनकी पहली नौकरी बैंगलोर में लगी। वर्ष 2011 में वह मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने यूएस चले गए थे। वर्ष 2014 में वह पहली बार चेन्नई निवासी ऐश्वर्या चंद्रशेखर से मिले थे। वह भी उसी कंपनी में काम करती थीं। ऐसे में काफी समय एक-दूसरे के साथ बीतने लगा। करीब छह माह बाद उन्हें एक-दूसरे के प्रति प्रेम का अहसास हुआ। ऐश्वर्या ने बताया कि जब मम्मी को बताया तो वह अंकुर की दूसरी संस्कृति और समाज से होने की वजह से घबरा गईं, लेकिन पापा ने स्थिति को संभाल लिया। परिजनों की सहमति से वर्ष 2016 में शादी के बंधन में बंधे। ऐश्वर्या ने बताया कि सबसे हसीन पलों में सुबह में दक्षिण भारतीय शादी और शाम को उत्तर भारतीय परंपराओं से शादी होना है। अंकुर बताते हैं कि एक-दूसरे बहुत अच्छी तरह से समझने की वजह से कुछ बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
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विवेक का पूरा संसार है निधि
मानसरोवर निवासी विवेक जैन और बुद्धि विहार निवासी निधि शर्मा कक्षा 11 से एक-दूसरे के साथ पढ़े हैं। इसके बाद साथ में बीकॉम और एमबीए किया। निधि ने बताया कि ज्यादातर आदतें और पसंद मिलने की वजह से वह एक-दूसरे के साथ काफी सहज महसूस करते थे। जब भी पढ़ाई में कोई परेशानी आती तो सबसे पहले एक-दूसरे का नाम ही दिमाग में आता। करीब सात साल साथ बिताने में कब प्रेम हो गया पता ही नहीं चला। नौकरी लगने के बाद इसका अहसास हुआ। निधि ने बताया कि रिश्ते के बारे में जब भैया और मम्मी-पापा को पता लगा तो विवेक के दूसरे धर्म से होने की वजह से वह मना करने लगे। यह पल उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर है। वह बताती हैं कि विवेक के सकारात्मक विचारों का होने की वजह से धीरे-धीरे उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। वर्ष 2017 में वह शादी के बंधन में बंध गए। निधि कहती हैं कि जब ससुरालीजन उनके रिश्ते की बात करने आए और सगाई हुई तो वह जिंदगी के बेशकीमती पल थे। विवेक का दोनों परिवारों का बहुत खयाल रखना निधि को पसंद है तो वहीं विवेक कहते हैं कि निधि उनका पूरा संसार है। इसे शब्दों और लाइनों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।
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प्रेम का मौसम चल रहा है। फिजाओं में इश्क की खुशबू बिखर रही है। सतरंगी माहौल में कुछ ऐसे भी युवा हैं, जिन्होंने पहले अपने लक्ष्य से प्रेम किया। जिंदगी संवारने के बाद प्रेम की दस्तक हुई। समाज की बनाई हुई तमाम रूढ़ियों ने अड़चन बनने की कोशिश की, लेकिन अंत में जीत सच्चे प्यार की हुई। परिजनों के आशीष से हंसी-खुशी सात जन्मों के लिए एक हो गए।
रात-रात भर जगकर कराई पढ़ाई
मूलरूप से गोरखपुर और वर्तमान में रामगंगा विहार निवासी रितेश श्रीवास्तव ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमबीए किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में जब वह पढ़ाई कर रहे थे तो किडनी में स्टोन की समस्या हो गई। परेशानी बढ़ने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उस वक्त परीक्षाएं भी चल रही थीं। ऐसी परिस्थिति में लगा कि पूरा करियर ही चौपट हो गया। तभी उनके पिता के दोस्त की पुत्री और उनकी सहपाठी सारिका फरिश्ता बनकर आईं। वह परिजनों के साथ अस्पताल में रुकतीं और रात-रात भर जगकर पढ़ाई करवातीं। उनकी इस देखभाल वह सहयोगी रैवेये की वजह से वह न सिर्फ शीघ्र स्वस्थ हुए, बल्कि 79 फीसदी अंकों के साथ एमबीए उत्तीर्ण किया। कैंपस प्लेसमेंट में नोएडा में नौकरी लग गई। इस वक्त तक सारिका के प्रति भावनाएं भी पैदा हो गई थीं। परिजन पहले से ही इस रिश्ते के लिए तैयार थे। रितेश और सारिका की सहमति मिलने के बाद उन्होंने दोनों की शादी करा दी। रितेश ने बताया कि सारिका ने जब सरप्राइज गिफ्ट में उन्हें बाइक दी तो वह उनकी जिंदगी का अनमोल पल बन गया था। वह कहते हैं कि एक-दूसरे के प्रति सहयोगी, ईमानदार रहेंगे तो जिंदगी में कभी परेशानी नहीं आएगी।
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विदेशी धरती पर मिली देशी
बुद्धि विहार निवासी अंकुर गुप्ता ने मुरादाबाद से इंटरमीडिएट और गाजियाबाद से स्नातक किया था। वह बताते हैं कि पहली बार परिजनों से दूर गाजियाबाद में रहना उनके लिए सबसे मुश्किल पलों में से था। सबसे ज्यादा मम्मी की याद आती थी, लेकिन करियर भी बनाना था तो वह पढ़ाई पर ध्यान देने लगे। उनकी पहली नौकरी बैंगलोर में लगी। वर्ष 2011 में वह मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने यूएस चले गए थे। वर्ष 2014 में वह पहली बार चेन्नई निवासी ऐश्वर्या चंद्रशेखर से मिले थे। वह भी उसी कंपनी में काम करती थीं। ऐसे में काफी समय एक-दूसरे के साथ बीतने लगा। करीब छह माह बाद उन्हें एक-दूसरे के प्रति प्रेम का अहसास हुआ। ऐश्वर्या ने बताया कि जब मम्मी को बताया तो वह अंकुर की दूसरी संस्कृति और समाज से होने की वजह से घबरा गईं, लेकिन पापा ने स्थिति को संभाल लिया। परिजनों की सहमति से वर्ष 2016 में शादी के बंधन में बंधे। ऐश्वर्या ने बताया कि सबसे हसीन पलों में सुबह में दक्षिण भारतीय शादी और शाम को उत्तर भारतीय परंपराओं से शादी होना है। अंकुर बताते हैं कि एक-दूसरे बहुत अच्छी तरह से समझने की वजह से कुछ बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
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विवेक का पूरा संसार है निधि
मानसरोवर निवासी विवेक जैन और बुद्धि विहार निवासी निधि शर्मा कक्षा 11 से एक-दूसरे के साथ पढ़े हैं। इसके बाद साथ में बीकॉम और एमबीए किया। निधि ने बताया कि ज्यादातर आदतें और पसंद मिलने की वजह से वह एक-दूसरे के साथ काफी सहज महसूस करते थे। जब भी पढ़ाई में कोई परेशानी आती तो सबसे पहले एक-दूसरे का नाम ही दिमाग में आता। करीब सात साल साथ बिताने में कब प्रेम हो गया पता ही नहीं चला। नौकरी लगने के बाद इसका अहसास हुआ। निधि ने बताया कि रिश्ते के बारे में जब भैया और मम्मी-पापा को पता लगा तो विवेक के दूसरे धर्म से होने की वजह से वह मना करने लगे। यह पल उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर है। वह बताती हैं कि विवेक के सकारात्मक विचारों का होने की वजह से धीरे-धीरे उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। वर्ष 2017 में वह शादी के बंधन में बंध गए। निधि कहती हैं कि जब ससुरालीजन उनके रिश्ते की बात करने आए और सगाई हुई तो वह जिंदगी के बेशकीमती पल थे। विवेक का दोनों परिवारों का बहुत खयाल रखना निधि को पसंद है तो वहीं विवेक कहते हैं कि निधि उनका पूरा संसार है। इसे शब्दों और लाइनों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।