{"_id":"5b9834df867a55019a1f809f","slug":"131536701663-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिपाही के नाम पर फर्जीवाड़ा कर बैंक से पास कराए नौ लोन","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सिपाही के नाम पर फर्जीवाड़ा कर बैंक से पास कराए नौ लोन
Updated Wed, 12 Sep 2018 03:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
पुलिस कार्यालय स्थित सीओ कार्यालय में कार्यरत एक सिपाही के नाम पर 15 लाख रुपये के नौ लोन फर्जी तरीके से कराए जाने का खुलासा हुआ है। फर्जीवाड़ा कर कराए गए इस लोन से सिपाही सकते में आ गया। उसने मंगलवार को एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी ने रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
पीड़ित सिपाही संजीव कुमार मेरठ के शास्त्री नगर का रहने वाला है। उसने बताया कि तीन माह पहले पीली कोठी स्थित भारतीय स्टेट बैंक में उसने लोन के लिए आवेदन किया। इस दौरान बैंक में पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जमा कराए गए। लोन देने से पहले बैंक अधिकारियों ने जानकारी की तो पता चला कि सिपाही के नाम पर करीब नौ लोन पहले से ही अलग-अलग बैंकों से कराए गए हैं। दस्तावेज में सिपाही का पैनकार्ड लगाया गया है। मामले की जानकारी होने पर सिपाही ने बताया कि उसने एक भी लोन पहले नहीं लिया है। सभी लोन चेक कराए जाने पर पता चला कि लोन लेने वाले व्यक्ति ने जो दस्तावेज जमा कराए हैं, उन पर फोटो सिपाही का नहीं है। अलग-अलग लोगों के फोटो थे, लोन लुधियाना में लिया गया है। इनमें से कुछ लोन ऐसे भी हैं, जिन्हें दो साल का समय हो चुका है। एक रेलकर्मी के खाते से किस्त भी बैंक में जमा की जा रही है। मंगलवार को सिपाही ने इस संबंध में एसएसपी से शिकायत की और फर्जीवाड़ा कर लोन लेेने वाले आरोपियाें पर कार्रवाई की मांग की है। एसएसपी जे रविंदर गौड ने सिविल लाइन पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
किसी ने खरीदी बाइक तो किसी ने कार
मुरादाबाद। सिपाही के नाम पर अलग अलग बैंकों से लोन लेकर बाजार से खरीदारी की गई है। किसी व्यक्ति ने महंगी बाइक खरीदी है तो किसी ने कार के लिए लोन लिया है। फर्जीवाड़ा कर एक के बाद करीब नौ लोन बैंक से सिपाही के नाम पर पास करा लिए गए और इस दौरान बैंक अधिकारी अंजान बने रहे। न तो किसी ने सिपाही से संपर्क किया न ही दस्तावेजों की सही से जांच की गई। सिपाही का आरोप है कि लोन देते वक्त अगर संबंधित बैंक के अधिकारियों ने सतर्कता दिखाई होती तो आरोपियों को पकड़ा जा सकता था। खुद बैंक के कर्मचारियों पर इस मामले में आरोपियों की मिलीभगत का आरोप है। पुलिस से इस संबंध में जांच की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस कार्यालय स्थित सीओ कार्यालय में कार्यरत एक सिपाही के नाम पर 15 लाख रुपये के नौ लोन फर्जी तरीके से कराए जाने का खुलासा हुआ है। फर्जीवाड़ा कर कराए गए इस लोन से सिपाही सकते में आ गया। उसने मंगलवार को एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी ने रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
पीड़ित सिपाही संजीव कुमार मेरठ के शास्त्री नगर का रहने वाला है। उसने बताया कि तीन माह पहले पीली कोठी स्थित भारतीय स्टेट बैंक में उसने लोन के लिए आवेदन किया। इस दौरान बैंक में पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जमा कराए गए। लोन देने से पहले बैंक अधिकारियों ने जानकारी की तो पता चला कि सिपाही के नाम पर करीब नौ लोन पहले से ही अलग-अलग बैंकों से कराए गए हैं। दस्तावेज में सिपाही का पैनकार्ड लगाया गया है। मामले की जानकारी होने पर सिपाही ने बताया कि उसने एक भी लोन पहले नहीं लिया है। सभी लोन चेक कराए जाने पर पता चला कि लोन लेने वाले व्यक्ति ने जो दस्तावेज जमा कराए हैं, उन पर फोटो सिपाही का नहीं है। अलग-अलग लोगों के फोटो थे, लोन लुधियाना में लिया गया है। इनमें से कुछ लोन ऐसे भी हैं, जिन्हें दो साल का समय हो चुका है। एक रेलकर्मी के खाते से किस्त भी बैंक में जमा की जा रही है। मंगलवार को सिपाही ने इस संबंध में एसएसपी से शिकायत की और फर्जीवाड़ा कर लोन लेेने वाले आरोपियाें पर कार्रवाई की मांग की है। एसएसपी जे रविंदर गौड ने सिविल लाइन पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
किसी ने खरीदी बाइक तो किसी ने कार
मुरादाबाद। सिपाही के नाम पर अलग अलग बैंकों से लोन लेकर बाजार से खरीदारी की गई है। किसी व्यक्ति ने महंगी बाइक खरीदी है तो किसी ने कार के लिए लोन लिया है। फर्जीवाड़ा कर एक के बाद करीब नौ लोन बैंक से सिपाही के नाम पर पास करा लिए गए और इस दौरान बैंक अधिकारी अंजान बने रहे। न तो किसी ने सिपाही से संपर्क किया न ही दस्तावेजों की सही से जांच की गई। सिपाही का आरोप है कि लोन देते वक्त अगर संबंधित बैंक के अधिकारियों ने सतर्कता दिखाई होती तो आरोपियों को पकड़ा जा सकता था। खुद बैंक के कर्मचारियों पर इस मामले में आरोपियों की मिलीभगत का आरोप है। पुलिस से इस संबंध में जांच की जाएगी।
विज्ञापन