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छह घंटे की रिमांड पर कुछ भी बरामद नहीं कर पाई पुलिस
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मुरादाबाद। शहर के चर्चित आहूजा सुपारी प्रकरण में पुलिस ने मंगलवार को मामले में बंद दो कथित शूटरों को सुपारी की रकम बरामद करने के लिए छह घंटे के कस्टडी रिमांड पर लिया। लेकिन पुलिस कुछ भी बरामद नहीं कर सकी। खुलासे के करीब 15 दिन बाद भी पुलिस साजिश की कड़ियां जोड़ने में नाकाम है। मोहरों को जेल भेजकर मुख्य आरोपी को थाने से छोड़ देने की वजह से पुलिस पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। कस्टडी रिमांड पर पुलिस के हाथ लगी नाकामी इस बहुचर्चित मामले में समझौते की पटकथा तैयार होने का संकेत दे रही है। जेल में बंद तीनों कथित शूटरों की जमानत अर्जी पर अब 26 मार्च को सुनवाई होनी है।
सिविल लाइंस पुलिस ने सात मार्च को खुलासा किया था कि पीएमएस पब्लिक स्कूल के पूर्व डायरेक्टर हरिओम अग्रवाल ने आहूजा ग्रुप के एमडी मनोज आहूजा की हत्या की सुपारी तीन शूटरों केशव शर्मा, शरद रस्तौगी और उमेश भट्ठा को दी थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों शूटरों को सात मार्च को ही जेल भेज चुकी पुलिस ने मुख्य आरोपी हरिओम अग्रवाल को तीन दिन थाने पर बैठाने के बाद थाने से ही छोड़ दिया। अब पुलिस हरिओम की तलाश में छापामारी के दावे कर रही है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि हरिओम अपने घर ही है और फ्रांस से आए बेटी - दामाद की मदद से समझौते की कोशिशों में जुटा है। घटना के मूल में पीएमएस ट्रस्ट का विवाद और अरबों रुपये की संपत्ति है। ट्रस्ट से जुड़े पुराने मुकदमों और पूर्व में निकाले गए ट्रस्टियों से भी सवाल जवाब की तैयारी थी। लेकिन साजिश का राजफाश करने से पहले ही अचानक मामले को सुस्त कर दिया गया।
मंगलवार को पुलिस ने आरोपी शूटर केशव शर्मा और शरद रस्तोगी को सुबह 10 बजे छह घंटे की कस्टडी रिमांड पर जेल से लिया। दोनों को पुलिस पहले केशव शर्मा के गांव गिंदौड़ा ले गई। इसके बाद अमरोहा में भी कुछ ठिकानों पर इन्हें ले जाया गया। पुलिस ने रिमांड का तर्क दिया था कि उसे सुपारी की एक करोड़ रुपये की रकम में से पेशगी दिए गए 15 लाख रुपये बरामद करने हैं। लेकिन दोपहर तीन बजे पुलिस खाली हाथ लौट आई। एसपी सिटी अंकित मित्तल ने बताया कि रिमांड पर कुछ बरामद नहीं हुआ है। दोनों आरोपियों को जेल वापस भेज दिया गया है। इंस्पेक्टर शक्ति सिंह का कहना है कि फरार आरोपी हरिओम की तलाश की जा रही है। 26 मार्च को अभियुक्तों की जमानत पर सुनवाई होगी। कस्टडी रिमांड में पुलिस की नाकामी अभियुक्तों को जेल से बाहर आने में मदद करेगी।
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सिविल लाइंस पुलिस ने सात मार्च को खुलासा किया था कि पीएमएस पब्लिक स्कूल के पूर्व डायरेक्टर हरिओम अग्रवाल ने आहूजा ग्रुप के एमडी मनोज आहूजा की हत्या की सुपारी तीन शूटरों केशव शर्मा, शरद रस्तौगी और उमेश भट्ठा को दी थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों शूटरों को सात मार्च को ही जेल भेज चुकी पुलिस ने मुख्य आरोपी हरिओम अग्रवाल को तीन दिन थाने पर बैठाने के बाद थाने से ही छोड़ दिया। अब पुलिस हरिओम की तलाश में छापामारी के दावे कर रही है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि हरिओम अपने घर ही है और फ्रांस से आए बेटी - दामाद की मदद से समझौते की कोशिशों में जुटा है। घटना के मूल में पीएमएस ट्रस्ट का विवाद और अरबों रुपये की संपत्ति है। ट्रस्ट से जुड़े पुराने मुकदमों और पूर्व में निकाले गए ट्रस्टियों से भी सवाल जवाब की तैयारी थी। लेकिन साजिश का राजफाश करने से पहले ही अचानक मामले को सुस्त कर दिया गया।
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मंगलवार को पुलिस ने आरोपी शूटर केशव शर्मा और शरद रस्तोगी को सुबह 10 बजे छह घंटे की कस्टडी रिमांड पर जेल से लिया। दोनों को पुलिस पहले केशव शर्मा के गांव गिंदौड़ा ले गई। इसके बाद अमरोहा में भी कुछ ठिकानों पर इन्हें ले जाया गया। पुलिस ने रिमांड का तर्क दिया था कि उसे सुपारी की एक करोड़ रुपये की रकम में से पेशगी दिए गए 15 लाख रुपये बरामद करने हैं। लेकिन दोपहर तीन बजे पुलिस खाली हाथ लौट आई। एसपी सिटी अंकित मित्तल ने बताया कि रिमांड पर कुछ बरामद नहीं हुआ है। दोनों आरोपियों को जेल वापस भेज दिया गया है। इंस्पेक्टर शक्ति सिंह का कहना है कि फरार आरोपी हरिओम की तलाश की जा रही है। 26 मार्च को अभियुक्तों की जमानत पर सुनवाई होगी। कस्टडी रिमांड में पुलिस की नाकामी अभियुक्तों को जेल से बाहर आने में मदद करेगी।
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