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Moradabad News: ठाकुरद्वारा में 30 तेंदुओं का शोर...अब इनमें कैसे पहचाना जाए आदमखोर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 02:34 AM IST
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Buzz about 30 leopards in Thakurdwara... now, how to identify the man-eater among them?
मुरादाबाद। तीन अगस्त से लेकर 29 अगस्त तक तेंदुआ ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तीन महिलाओं समेत चार की जान ले चुका है। 17 को लहूलुहान किया। अकेले बाहपुर बलिया में ही तेंदुए ने तीन को मार डाला है। जबकि लालापुर पीपलसाना में भी एक महिला की जान ली थी। अब तेंदुआ प्रभावित 26 गांवों में आदमखोर को खत्म करने की आवाज उठने लगी है। वन विभाग ने भी मुख्यालय को पत्र भेजकर इंसानों पर हमला करने वाले को मारने की अनुमति मांगी है। लेकिन जगह-जगह दिखने वाले तेंदुओं की भीड़ में आदमखोर की पहचान कैसे हो। वन विभाग मान रहा है कि क्षेत्र में 30 से ज्यादा तेंदुए हैं। 25 पिंजरे भी लगे हुए हैं। हालांकि वन अफसरों का कहना है कि सबसे ज्यादा प्रभावित बाहपुर बलिया और आसपास में 25 कैमरे लगाए गए हैं। जिनके जरिए पहचान की कोशिश की जाएगी।
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बहापुर बलिया में 18 अगस्त को तेंदुए ने ब्रह्मो देवी को मार डाला था। घटना के एक सप्ताह बाद 25 अगस्त को गांव की मिथलेश देवी को निवाला बना लिया। इसके बाद 29 अगस्त को तेंदुआ घर में सो रहे जगराज सैनी को उठा ले गया और मार डाला। अगले दिन उनका शव खेत में क्षत-विक्षत हालत में मिला था। सिर्फ दो सप्ताह में एक ही गांव में तेंदुए के हमलों में तीन लोगों की मौतों ने ग्रामीणों को झकझोर दिया है। सबसे पहले तीन अगस्त को लालापुर पीपलसाना में संतोष देवी को खेत पर काम करते समय तेंदुए ने मारा था।
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वन विभाग ने तेंदुए को आदमखोर घोषित कर गोली मारने के आदेश के लिए वन मुख्यालय से अपील है। हालांकि विभाग का तर्क है कि इलाके में मौजूद हर तेंदुए को आदमखोर मानकर गोली नहीं चलाई जा सकती। पहले हमलावर तेंदुए की पहचान जरूरी है। इसी वजह से निगरानी बढ़ाई गई है। कैमरा ट्रैप से तेंदुओं की तस्वीरें जुटाकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कौन-सा तेंदुआ बार-बार आबादी और घटनास्थल के आसपास दिखाई दे रहा है।
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30 पिंजरे खाली, खेतों में छिपे तेंदुए

तेंदुओं को पकड़ने के लिए वन विभाग ने ठाकुरद्वारा के करीब 18 गांवों में 30 पिंजरे लगा रखे हैं। एक सितंबर को लौंगी खुर्द गांव में एक तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ था। इसके बाद से वन विभाग को सफलता नहीं मिली है। अकेले बहापुर बलिया गांव में सात पिंजरे लगे हैं, लेकिन एक भी तेंदुआ यहां गिरफ्त में नहीं आया है, जबकि इसी गांव में तेंदुए के हमले में तीन मौतें हुई हैं। अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाने के अलावा वन विभाग ड्रोन से गन्ने के खेतों की निगरानी कर रहा है। कांबिंग भी की जा रही है लेकिन सफलता नहीं मिली। वहीं सात अगस्त से आज तक का आंकड़ा देखें तो वन विभाग 11 तेंदुओं को पकड़ चुका है। इनमें से एक भी बहापुर बलिया गांव में नहीं पकड़ा गया।



हर तेंदुए को आदमखोर घोषित कर गोली नहीं मारी जा सकती, इसलिए बहापुर बलिया में ज्यादा कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिससे यह देखा जा सके कि एक ही तेंदुआ बार-बार गांव में आ रहा है या अलग-अलग तेंदुए। इसी के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, डीएफओ
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