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यादें बप्पी लाहिड़ी की: रजा मुराद बोले- कभी अलविदा न कहना गीत देकर मेरा बचपन का यार कह गया अलविदा

Wed, 16 Feb 2022 07:23 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 16 Feb 2022 07:23 PM IST
सार

मूल रूप से रामपुर निवासी और बालीवुड के चर्चित कलाकार रजा मुराद ने कहा कि उनका और बप्पी दा का बचपन एक साथ बीता। एक साथ पढ़ाई की और कैरियर की शुरुआत भी एक साथ की।

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Bappi lahiri passes away Raza Murad remembers his childhood friend and his sweet memories
बप्पी लाहिड़ी और रजा मुराद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालीवुड में डिस्को का परिचय कराने वाले बप्पी लाहिड़ी अब इस दुनिया में नहीं रहे। बप्पी लाहिड़ी और रजा मुराद बचपन के दोस्त थे। बप्पी लाहिड़ी के निधन पर बालीवुड कलाकार रजा मुराद ने उनसे जुड़ी यादें अमर उजाला से साझा कीं। कहा कि कभी अलविदा न कहना गीत देकर मेरा बचपन का यार अलविदा कह गया।

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मूल रूप से रामपुर निवासी और बालीवुड के चर्चित कलाकार रजा मुराद ने कहा कि उनका और बप्पी दा का बचपन एक साथ बीता। एक साथ पढ़ाई की और करियर की शुरुआत भी एक साथ की। उन्होंने कहा कि बप्पी जैसा दोस्त मिलना मुश्किल है। उनके जाने के बाद उनके गीत यार बिना चैन कहां रे....के बोल जेहन में गूंज रहे हैं।
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रजा मुराद कहते हैं कि उनके जैसे सरल स्वभाव के कलाकार कम ही मिलते हैं। रजा मुराद ने बताया कि साल 2014 में एक लम्हा ऐसा भी आया जब उन्होंने अपने हाथ से बप्पी लाहिड़ी को पुरस्कार दिया। ये लम्हा साल 2014 में ऑल इंडिया अचीवर अवार्ड फंक्शन में मिला।
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रजा मुराद ने कहा कि बप्पी लाहिड़ी जी के साथ आखिरी बार करीब एक-डेढ़ साल पहले मस्कट में एक शो करने का अवसर मिला था, इसके बाद उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला और कोरोना संक्रमण के कारण मुलाकातों का सिलसिला भी सिमट गया था।

बचपन में खींचते थे बप्पी लाहिड़ी के गाल, बप्पी बुलाते थे राजा

रजा मुराद ने बचपन से जुड़ी यादों को साझा कर कहा कि वो और बप्पी लाहिड़ी मुंबई के खार इलाके में पड़ोस में रहते थे। उनकी बप्पी दा से अच्छी दोस्ती थी। करीब छह-सात साल की उम्र थी और बप्पी लाहिड़ी उस वक्त भी काफी गोल-मटोल थे। जिस पर वो उनके गालों को खींचते थे। ऐसा करने पर बप्पी लाहिड़ी रोते हुए अपने पिता से उनकी शिकायत करते थे, जिस पर वो सफाई देते थे। रजा मुराद ने बताया कि बप्पी लाहिड़ी उन्हें रजा नहीं बल्कि राजा कहते थे।

बच्चों का स्कूल बनता था दो दोस्तों के साथ वक्त बिताने का जरिया

रजा मुराद ने बताया कि उनके बच्चे और बप्पी लाहिड़ी के बच्चे मुंबई के एक ही स्कूल में पढ़ते थे। इसलिए लगभग रोजाना ही उनसे मुलाकात होती थी। वो बच्चों को कार से ही स्कूल भेजते थे, ऐसे में कभी बच्चों को स्कूल ले जाते वक्त तो कभी छुट्टी में दोनों मिलते थे। इस दौरान वो अक्सर 10-15 मिनट पहले पहुंच जाते थे और दोनों दोस्त आपस में बात करते थे।

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