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देश में सबसे खराब रही मुरादाबाद की हवा
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मुरादाबाद के सिविल लाइन में छाया कोहरा। अमर उजाला।
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मुरादाबाद। शहर के जहरीली हवा नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने तमाम कवायदें कर लीं, लेकिन प्रदूषण घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार को दर्ज किए गए 435 वायु गुणवत्ता सूचकांक की वजह से दिनभर आसमान में धुंध की मोटी-घनी परत छाई रही, जिससे शहर की आबोहवा बिगड़ गई। इससे हालात गैस के चैंबर जैसी हो गई। इस प्रदूषण को बढ़ाने में ईंट-भट्ठा, पीतल की अवैध भट्ठियां, कबाड़ को लगाए जाने वाली आग प्रमुख भूमिका निभा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अब लोगों को जागरूक होकर प्रदूषण कम करने वाले पौधे लगाने चाहिए।
बुधवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहने वाला मुरादाबाद गुरुवार को पहले स्थान पर पहुंच गया। प्रदूषण के इस स्तर ने अधिकारियों के स्थिति के नियंत्रण में आने के दावों की कलई खोल दी। प्रदूषण नियंत्रण विभाग और एमडीए द्वारा बनाई गईं निगरानी समितियों, नगर निगम द्वारा जुर्माने की कार्रवाई के बावजूद आग लगाने के मामलों पर रोक नहीं लग सकी। कई स्थानों पर सड़क किनारे कूड़ा जलाया गया।
आसमान को काला कर रहीं चिमनियां
प्रदूषण के बढ़ते स्तर से चिंतित होकर सुप्रीम कोर्ट ने जनरेटर तक बंद कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शहर में अवैध पीतल भट्ठी और ईंट-भट्ठा संचालकों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। वह बेखौफ होकर अपनी कार्यप्रणाली को अंजाम दे रहे हैं। गुरुवार को भी नवाबपुरा में पीतल भट्ठी, पाकबड़ा में ईंट भट्ठियों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं आसमान को काला करता रहा।
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कबाड़ में भी लगा रहे आग
शहर की गलियों में कबाड़ में से धातु बीनने का कार्य किया जा रहा है। यह कबाड़ आस-पास के शहरों से ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से लाया जा रहा है। कबाड़ को पिघलाने के लिए भट्ठियों में उसे जलाया जाता है। इसके बाद धातु निकालकर राख को छानकर काली मिट्टी के रूप में बेचा जा रहा है। गुरुवार को बरबलान क्षेत्र में कबाड़ को आग लगाई गई।
दिन में जलीं वाहनों की लाइटें
गुरुवार को जहरीली हवा से धुंध का आलम यह था कि दिन में सूरज की किरणों की तपिश नहीं महसूस हुई। सुबह से लेकर शाम तक सूरज की लुका-छिपी चलती रही। दोपहर में तो धुंध की यह स्थिति हो गई कि राहगीरों को अपने वाहनों की लाइटें जलाकर गंतव्य तक जाना पड़ा।
पौधों से करें वायु शुद्ध
कोलकाता में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में ज्यूरी सदस्य के तौर पर प्रतिभाग कर रहीं पर्यावरणविद् डॉ. अनामिका त्रिपाठी का कहना है कि जब तक वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से नीचे नहीं आ जाता, लोगों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। मॉस बहुत सस्ता पौधा है, इसे एयर प्यूरीफायर की तरह प्रयोग कर सकते हैं। मदर इन लॉ टंग, स्पाइडर लिली, पीस लिली, मनी प्लांट, अरेका पॉम, सिंगर पॉम आदि पौधे लगाने से कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, बैंजीन आदि गैसों के दुष्प्रभाव से राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि कोलकाता में चल रहा फेस्टिवल आठ नवंबर तक चलेगा। इसमें देशभर से आए विद्यार्थी, शोधार्थी स्मार्ट सिटी के रूप में शहर को विकसित करने के विषय पर प्रतिभाग कर रहे हैं। इसमें वक्ताओं ने वायु गुणवत्ता सूचकांक में कमी लाने के लिए निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया है।
नोट...
गुरुवार को नेशनल एयर मानीटरिंग इंडेक्स द्वारा जारी प्रदूषण के आंकड़े
शहर एक्यूआई
मुरादाबाद 435
लखनऊ 417
कानपुर 366
बागपत 362
गाजियाबाद 360
हावड़ा 342
पटना 346
नोएडा 346
बैंगलूरू 341
गुरूग्राम 339
बागपत 337
उड़ीसा (तलचेर) 337
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बुधवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहने वाला मुरादाबाद गुरुवार को पहले स्थान पर पहुंच गया। प्रदूषण के इस स्तर ने अधिकारियों के स्थिति के नियंत्रण में आने के दावों की कलई खोल दी। प्रदूषण नियंत्रण विभाग और एमडीए द्वारा बनाई गईं निगरानी समितियों, नगर निगम द्वारा जुर्माने की कार्रवाई के बावजूद आग लगाने के मामलों पर रोक नहीं लग सकी। कई स्थानों पर सड़क किनारे कूड़ा जलाया गया।
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आसमान को काला कर रहीं चिमनियां
प्रदूषण के बढ़ते स्तर से चिंतित होकर सुप्रीम कोर्ट ने जनरेटर तक बंद कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शहर में अवैध पीतल भट्ठी और ईंट-भट्ठा संचालकों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। वह बेखौफ होकर अपनी कार्यप्रणाली को अंजाम दे रहे हैं। गुरुवार को भी नवाबपुरा में पीतल भट्ठी, पाकबड़ा में ईंट भट्ठियों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं आसमान को काला करता रहा।
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कबाड़ में भी लगा रहे आग
शहर की गलियों में कबाड़ में से धातु बीनने का कार्य किया जा रहा है। यह कबाड़ आस-पास के शहरों से ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से लाया जा रहा है। कबाड़ को पिघलाने के लिए भट्ठियों में उसे जलाया जाता है। इसके बाद धातु निकालकर राख को छानकर काली मिट्टी के रूप में बेचा जा रहा है। गुरुवार को बरबलान क्षेत्र में कबाड़ को आग लगाई गई।
दिन में जलीं वाहनों की लाइटें
गुरुवार को जहरीली हवा से धुंध का आलम यह था कि दिन में सूरज की किरणों की तपिश नहीं महसूस हुई। सुबह से लेकर शाम तक सूरज की लुका-छिपी चलती रही। दोपहर में तो धुंध की यह स्थिति हो गई कि राहगीरों को अपने वाहनों की लाइटें जलाकर गंतव्य तक जाना पड़ा।
पौधों से करें वायु शुद्ध
कोलकाता में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में ज्यूरी सदस्य के तौर पर प्रतिभाग कर रहीं पर्यावरणविद् डॉ. अनामिका त्रिपाठी का कहना है कि जब तक वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से नीचे नहीं आ जाता, लोगों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। मॉस बहुत सस्ता पौधा है, इसे एयर प्यूरीफायर की तरह प्रयोग कर सकते हैं। मदर इन लॉ टंग, स्पाइडर लिली, पीस लिली, मनी प्लांट, अरेका पॉम, सिंगर पॉम आदि पौधे लगाने से कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, बैंजीन आदि गैसों के दुष्प्रभाव से राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि कोलकाता में चल रहा फेस्टिवल आठ नवंबर तक चलेगा। इसमें देशभर से आए विद्यार्थी, शोधार्थी स्मार्ट सिटी के रूप में शहर को विकसित करने के विषय पर प्रतिभाग कर रहे हैं। इसमें वक्ताओं ने वायु गुणवत्ता सूचकांक में कमी लाने के लिए निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया है।
नोट...
गुरुवार को नेशनल एयर मानीटरिंग इंडेक्स द्वारा जारी प्रदूषण के आंकड़े
शहर एक्यूआई
मुरादाबाद 435
लखनऊ 417
कानपुर 366
बागपत 362
गाजियाबाद 360
हावड़ा 342
पटना 346
नोएडा 346
बैंगलूरू 341
गुरूग्राम 339
बागपत 337
उड़ीसा (तलचेर) 337