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एनसीआर ही नहीं, रामपुर की हवा भी हुई दमघोंटू
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रामपुर। दिल्ली सहित पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) धुंध छाई हुई है। इसका असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित रामपुर में दिखने लगा है। शुक्रवार को पूरे दिन धुंध की चादर छाई रही। धूप भी पूरी तरह से नहीं निकली। रामपुर में वायु गुणवत्ता का सूचकांक (एक्यूआई) 305 के स्तर पर पहुंच गया जो खतरनाक स्तर है। एक्यूआई के 300 के पार पहुंचने से सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह है कि घर से बाहर न निकले। अगर बाहर निकलना ही पड़े तो मास्क का इस्तेमाल करें।
दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में गिरावट जारी है। दिल्ली-एनसीआर में छाई धुंध का असर रामपुर में भी दिखने लगा है। रामपुर में भी एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया है। जो खराब श्रेणी में आता है। जिले में हवा की गुणवत्ता दिवाली के बाद से खराब हो रही है। अभी रामपुर की हवा जितनी प्रदूषण है उतना प्रदूषण तो दिवाली वाले दिन भी नहीं था। दिवाली के अगले दिन रामपुर में एक्यूआई 196 के स्तर पर था। 28 अक्तूबर के बाद से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। 28 अक्तूबर को यहां एक्यूआई का स्तर 220 के स्तर था। एक सप्ताह के अंदर यह 305 के स्तर पर पहुंच गया है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के लिए पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने की तैयारी कर रखी है। इसके बाद अभी तक लगभग 55 मामले सामने आए हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर अस्थमा के मरीजों को दिक्कत हो रही है। घर से बाहर निकलने पर कई लोगों को आंखों में जलन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों के गले में भी दिक्कत हो रही है। ऐसे डॉक्टरों की लोगों की सलाह है कि वो अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकले। घर से बाहर निकलने की स्थिति में मास्क का इस्तेमाल करें।
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दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में गिरावट जारी है। दिल्ली-एनसीआर में छाई धुंध का असर रामपुर में भी दिखने लगा है। रामपुर में भी एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया है। जो खराब श्रेणी में आता है। जिले में हवा की गुणवत्ता दिवाली के बाद से खराब हो रही है। अभी रामपुर की हवा जितनी प्रदूषण है उतना प्रदूषण तो दिवाली वाले दिन भी नहीं था। दिवाली के अगले दिन रामपुर में एक्यूआई 196 के स्तर पर था। 28 अक्तूबर के बाद से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। 28 अक्तूबर को यहां एक्यूआई का स्तर 220 के स्तर था। एक सप्ताह के अंदर यह 305 के स्तर पर पहुंच गया है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के लिए पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने की तैयारी कर रखी है। इसके बाद अभी तक लगभग 55 मामले सामने आए हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर अस्थमा के मरीजों को दिक्कत हो रही है। घर से बाहर निकलने पर कई लोगों को आंखों में जलन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों के गले में भी दिक्कत हो रही है। ऐसे डॉक्टरों की लोगों की सलाह है कि वो अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकले। घर से बाहर निकलने की स्थिति में मास्क का इस्तेमाल करें।
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