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जन्म से पहले ही हो जाता है चरित्र निर्माण

Wed, 05 Dec 2018 02:15 AM IST
Updated Wed, 05 Dec 2018 02:15 AM IST
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जन्म से पहले ही हो जाता है चरित्र निर्माण
मुरादाबाद।
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जीरो प्वाइंट पर मंगलवार को बाबा जयगुरुदेव संगत के माध्यम से विशाल आध्यात्मिक सत्संग समागम और नामदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बाबा जयगुरुदेव महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी संत उमाकांत महाराज ने अपने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को मनुष्य जीवन में दायित्वों का निर्वहन कर लक्ष्य प्राप्ति का आह्वान किया।

मुरादाबाद के अलावा आस-पास के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सत्संग में पहुंचे। गुलाबी रंग की टोपी और दुपट्टा पहने श्रद्धालु जयगुरुदेव का जयघोष कर रहे थे। इससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बहुत से श्रद्धालु अपने बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों को लेकर पहुंचे थे। जब उमाकांत महाराज प्रवचन सुना रहे थे, तो श्रद्धालु ध्यानमग्न होकर उनके प्रवचनों में खो गए। उमाकांत महाराज ने बताया कि शिशु जब मां के गर्भ में होता है तो उस वक्त मां के आस-पास का वातावरण सकारात्मक और आध्यात्मिक होना बहुत आवश्यक है। उस वक्त मां के मन में जैसे विचार आएंगे, बच्चे का चरित्र निर्माण उसी के अनुरूप होता है। उन्होंने बताया कि सतयुग सत्य पर आधारित था, जबकि कलियुग को सबसे मलिन युग माना जाता है। इसमें बुराइयां हावी होती हैं, जबकि यह सर्वविदित है कि व्यक्ति जैसा व्यवहार करेगा, उसके कर्मों के आधार पर ही उसे फल मिलेगा। उन्होंने बताया कि जब बच्चा चार-पांच वर्ष का होता है तो उस वक्त माता-पिता का फर्ज बनता है कि वह उसे सच्चाई और ईमानदारी का पाठ पढ़ाएं। क्योंकि बच्चा उस वक्त नासमझ होता है। उस वक्त के कर्मों का फल उसके माता-पिता को भोगना पड़ता है। उन्होंने बताया कि आने वाली पीढ़ियों को भ्रम से बचाने के लिए धर्म-शास्त्र लिखवाए गए थे। जब जीव ने सच्चे संत, महापुरुषों के पास जाना बंद कर दिया और सत्संग सुनना बंद कर दिया तो उन्हें धार्मिक किताबें समझ में नहीं आतीं। इसके कारण उनका सच्चे भजन से रास्ता छूट गया। खान-पान दूषित हो गया ओर चरित्र भी गिर गया। अच्छे बुरे का ज्ञान समाप्त होने पर दुख झेलने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि मनुष्य शरीर से ही जीवात्मा के द्वार पर बैठकर तीसरे नेत्र से गुरु के द्वारा दिए गए परमात्मा के नाम के द्वारा जागृत होकर भगवान से साक्षात्कार कर सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से शाकाहारी रहने और गो माता की सेवा करने का आह्वान किया। संयोजक सत्यपाल सिंह ने बताया कि उमाकांत महाराज के बारे में बाबा जयगुरुदेव महाराज ने कहा था कि वह नए लोगों को नामदान देने के अलावा पुराने सत्संगियों को संभाल लेंगे। इस दौरान संजय विश्नोई, धर्मेेंद्र सिंह, दीपक यादव, डॉ. संजीव सक्सेना, सौराज सिंह आदि मौजूद रहे।
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