{"_id":"5b77351342c7924650408554","slug":"81534539027-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्थि विसर्जन याद दिलाएगा अटल स्वप्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्थि विसर्जन याद दिलाएगा अटल स्वप्न
Updated Sat, 18 Aug 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
सरकार ने भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई की अस्थियों को सूबे के प्रत्येक जिले की प्रमुख नदियों में विसर्जित कराने का निर्णय लिया है। इसमें जिले की रामगंगा को भी शामिल किया गया है। अस्थि विसर्जन के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री का वह स्वप्न भी लोगों को याद आएगा, जिसमें उन्होंने नदियों का आपस में जोड़ने को कहा था। उसे सूखे और बाढ़ की बड़ी समस्याओं का समाधान हो जाता।
रामगंगा किनारे की ज्यादातर कालोनियों में बाढ़ जैसे हालात हैं। यहां पानी रास्तों में भरकर लोगों के घरों तक जा पहुंचा है। इस क्षेत्र के बाढ़ से डरे लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। वहीं भाकियू नेताओं ने दोपहर में कमिश्नर से मुलाकात कर गांगन नदी में पानी छोड़ने की मांग की। गांगन के सूखा रह जाने से आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर गिरने लगा है। यदि रामगंगा और गांगन नदी आपस में जुड़ जातीं तो दोनाें क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान हो जाता। यही अटल जी वह सपना था, जो प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन्होंने देखा था। सामजस्य के अभाव में ज्यादातर नदियों का हाल बेहाल है। एक ओर ज्यादा पानी से हाहाकार मचता है तो दूसरी ओर सूखे से परेशानी आती है।
अब अटल जी की अस्थियों के विसर्जन के साथ ही उनके संकल्प का स्मरण होना स्वाभाविक है। सरकार बड़ी न सही, शुरूआत में जिलों की छोटी-छोटी नदियों को आपस में जोड़ने की पहल शुरू करती है तो सूखे और बाढ़ की स्थानीय समस्याओं से निजात मिल सकेगी।
विज्ञापन
...
स्थानीय नदियों में जल प्रवास का असंतुलन है। यही कारण है कि रामगंगा में ज्यादा पानी है और गांगन नदी सूखी पड़ी है। यदि थोड़ा पानी गांगन को दिया जाना संभव हो तो बरसात में दोनों नदियों का सामजस्य लोगों को राहत देगा। - मनोज कुमार, एक्सईएन बाढ़ नियंत्रण।
..
विज्ञापन
सरकार ने भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई की अस्थियों को सूबे के प्रत्येक जिले की प्रमुख नदियों में विसर्जित कराने का निर्णय लिया है। इसमें जिले की रामगंगा को भी शामिल किया गया है। अस्थि विसर्जन के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री का वह स्वप्न भी लोगों को याद आएगा, जिसमें उन्होंने नदियों का आपस में जोड़ने को कहा था। उसे सूखे और बाढ़ की बड़ी समस्याओं का समाधान हो जाता।
रामगंगा किनारे की ज्यादातर कालोनियों में बाढ़ जैसे हालात हैं। यहां पानी रास्तों में भरकर लोगों के घरों तक जा पहुंचा है। इस क्षेत्र के बाढ़ से डरे लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। वहीं भाकियू नेताओं ने दोपहर में कमिश्नर से मुलाकात कर गांगन नदी में पानी छोड़ने की मांग की। गांगन के सूखा रह जाने से आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर गिरने लगा है। यदि रामगंगा और गांगन नदी आपस में जुड़ जातीं तो दोनाें क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान हो जाता। यही अटल जी वह सपना था, जो प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन्होंने देखा था। सामजस्य के अभाव में ज्यादातर नदियों का हाल बेहाल है। एक ओर ज्यादा पानी से हाहाकार मचता है तो दूसरी ओर सूखे से परेशानी आती है।
विज्ञापन
अब अटल जी की अस्थियों के विसर्जन के साथ ही उनके संकल्प का स्मरण होना स्वाभाविक है। सरकार बड़ी न सही, शुरूआत में जिलों की छोटी-छोटी नदियों को आपस में जोड़ने की पहल शुरू करती है तो सूखे और बाढ़ की स्थानीय समस्याओं से निजात मिल सकेगी।
विज्ञापन
...
स्थानीय नदियों में जल प्रवास का असंतुलन है। यही कारण है कि रामगंगा में ज्यादा पानी है और गांगन नदी सूखी पड़ी है। यदि थोड़ा पानी गांगन को दिया जाना संभव हो तो बरसात में दोनों नदियों का सामजस्य लोगों को राहत देगा। - मनोज कुमार, एक्सईएन बाढ़ नियंत्रण।
..