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खादर में एक चौथाई गन्ने की फसल बर्बाद
Updated Tue, 28 Aug 2018 01:09 AM IST
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गजरौला। खादर के खेतों में पिछले डेढ़ महीने से पानी खड़ा हुआ है। जिसके चलते देरी से बोया गया करीब एक चौथाई गन्ना खत्म हो चुका है। वहीं करीब दो हजार बीघा धान पूरी तरह से बर्बाद हो गया। कुछेक किसानों का ही थोड़ा बहुत धान बचा है जोकि, गांव के बिल्कुल करीब में था।
गंगा की बाढ़ खादर के किसानों के लिए काफी कष्टकारी साबित हो गई है। खेत जुताई से लेकर फसल बुआई और लागत लगाने के बाद भी खेत में फसल नहीं बची है। दरअसल पिछले डेढ़ महीने से खेतों में पानी भरा हुआ है। धान तो काफी पहले ही बर्बाद हो चुका था। अब गन्ना भी पानी की टक्कर नहीं झेल पाया। देरी से बोया गया गन्ना पूरी तरह से खत्म हो चुका है। खादर के ग्रामीणों का मानना है कि करीब 25 प्रतिशत गन्ने की फसल खराब हो गई। जिसमें एक गन्ना भी बेचने के लिए नहीं बचा है। इसके अलावा काफी फसल गंगा के कटान की भेंट चढ़ रही है। बाढ़ ने किसानों के सामने समस्या खड़ी कर दी है। कर्ज लेकर फसलों की बुआई की थी अब कर्ज बाकी रह गया और फसल भी नहीं आई। छोटे और गरीब किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। शीशपाल का 25 बीघा धान, रुपचंद का 22 बीघा धान, महराज का 40 बीघा धान, चेतराम का 15 बीघा धान बर्बाद हो गया है। धान की फसल खराब होने वाले किसानों की फेहरिस्त अभी और भी लंबी है।
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गंगा की बाढ़ खादर के किसानों के लिए काफी कष्टकारी साबित हो गई है। खेत जुताई से लेकर फसल बुआई और लागत लगाने के बाद भी खेत में फसल नहीं बची है। दरअसल पिछले डेढ़ महीने से खेतों में पानी भरा हुआ है। धान तो काफी पहले ही बर्बाद हो चुका था। अब गन्ना भी पानी की टक्कर नहीं झेल पाया। देरी से बोया गया गन्ना पूरी तरह से खत्म हो चुका है। खादर के ग्रामीणों का मानना है कि करीब 25 प्रतिशत गन्ने की फसल खराब हो गई। जिसमें एक गन्ना भी बेचने के लिए नहीं बचा है। इसके अलावा काफी फसल गंगा के कटान की भेंट चढ़ रही है। बाढ़ ने किसानों के सामने समस्या खड़ी कर दी है। कर्ज लेकर फसलों की बुआई की थी अब कर्ज बाकी रह गया और फसल भी नहीं आई। छोटे और गरीब किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। शीशपाल का 25 बीघा धान, रुपचंद का 22 बीघा धान, महराज का 40 बीघा धान, चेतराम का 15 बीघा धान बर्बाद हो गया है। धान की फसल खराब होने वाले किसानों की फेहरिस्त अभी और भी लंबी है।
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