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दिल्ली और यूपी में अलग-अलग हैं प्रदूषण के मानक
Updated Sun, 04 Nov 2018 03:00 AM IST
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मुरादाबाद। प्रदूषण जांच केंद्रों पर मानक भी अलग-अलग बना रखे हैं। दिल्ली और यूपी में वाहन प्रदूषण के प्रमाण पत्र की मान्यता भी अलग-अलग हैं। एक बार वाहन प्रदूषण नियंत्रण का सर्टीफिकेट लेने पर यूपी में जहां छह महीने तक वैध रहता है, वहीं दिल्ली में तीन महीने में ही एक्सपायर हो जाता है। ऐसे में दिल्ली जाने वाले वाहनों को हर तीन महीने पर नया प्रमाण पत्र बनवाना पड़ रहा है।
वाहन प्रदूषण के मानकों की जांच और रिपोर्ट में जमकर खेल किया जा रहा है। एक ओर जहां प्रदूषण के मानक अलग-अलग जारी कर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। वाहन प्रदूषण की जांच के चार मानक हैं। इसमें सीओ, एचसी, सीओ-2 और ओ-2 के स्तर की जांच की जाती है। मौजूदा समय में ज्यादातर क्रेंदों पर केवल सीओ और एचसी की ही जांच की जा रही है। कार्बन डाई आक्साइड और आक्सीजन का स्तर नहीं मांपा जा रहा है। इसके साथ ही प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र भी अलग-अलग मान्य है। दिल्ली में जहां तीन महीने तक ही प्रमाण पत्र की मान्यता है, वहीं यूपी में इसको छह महीने तक स्वीकार किया जाता है। वाहन जांच केंद्रों पर मानक भी अलग-अलग बना रखे हैं। सीओ का मानक जहां कई जांच केंद्रों पर तीन है, वहीं कई अन्य पर 3.5 है। इसी तरह एचसी का मानक प्रत्येक केंद्र पर अलग-अलग है। यह 45 सौ से 3000 तक माना जा रहा है। इसका असर पर्यावरण पर पड़ना तय है।
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वाहन प्रदूषण के मानकों की जांच और रिपोर्ट में जमकर खेल किया जा रहा है। एक ओर जहां प्रदूषण के मानक अलग-अलग जारी कर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। वाहन प्रदूषण की जांच के चार मानक हैं। इसमें सीओ, एचसी, सीओ-2 और ओ-2 के स्तर की जांच की जाती है। मौजूदा समय में ज्यादातर क्रेंदों पर केवल सीओ और एचसी की ही जांच की जा रही है। कार्बन डाई आक्साइड और आक्सीजन का स्तर नहीं मांपा जा रहा है। इसके साथ ही प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र भी अलग-अलग मान्य है। दिल्ली में जहां तीन महीने तक ही प्रमाण पत्र की मान्यता है, वहीं यूपी में इसको छह महीने तक स्वीकार किया जाता है। वाहन जांच केंद्रों पर मानक भी अलग-अलग बना रखे हैं। सीओ का मानक जहां कई जांच केंद्रों पर तीन है, वहीं कई अन्य पर 3.5 है। इसी तरह एचसी का मानक प्रत्येक केंद्र पर अलग-अलग है। यह 45 सौ से 3000 तक माना जा रहा है। इसका असर पर्यावरण पर पड़ना तय है।
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