{"_id":"6a99874da64fce1a88006df2","slug":"fssai-cg-foods-bhujia-stock-seized-food-safety-action-maharashtra-fda-2026-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"टूटे नूडल्स से बनाया भुजिया: 32 हजार किलो स्टॉक जब्त, एफएसएसएआई ने उत्पादन भी रुकवाया; कहां का है मामला?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
टूटे नूडल्स से बनाया भुजिया: 32 हजार किलो स्टॉक जब्त, एफएसएसएआई ने उत्पादन भी रुकवाया; कहां का है मामला?
Thu, 03 Sep 2026 08:12 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 03 Sep 2026 08:12 PM IST
सार
अजमेर में एफएसएसएआई की जांच के दौरान सीजी फूड्स इंडिया की यूनिट में कई खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिला। फर्श पर गिरे टूटे नूडल्स के दोबारा इस्तेमाल, बिना लाइसेंस उत्पादन और पैकेजिंग की तारीख से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। एफएसएसएआई ने 32,107.2 किलो स्टॉक जब्त किया और 1,925 बॉक्स एक्सपायर्ड तैयार सामान रोका। वहीं महाराष्ट्र एफडीए ने त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा जांच के लिए सालभर का स्थायी कैलेंडर जारी किया है।
विज्ञापन
एफएसएसएआई की कार्रवाई
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की है। राजस्थान के अजमेर में सीजी फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की यूनिट में जांच के दौरान कई नियमों का उल्लंघन मिला। भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कंपनी को वेज भुजिया नमकीन का उत्पादन बंद करने का निर्देश दिया है। जांच में साफ-सफाई से लेकर लाइसेंस और पैकेजिंग तक कई गड़बड़ियां सामने आईं।
सवाल: अजमेर की यूनिट में क्या मिला?
जवाब: एफएसएसएआई ने अजमेर के रूपनगढ़ स्थित सीजी फूड्स इंडिया की यूनिट का निरीक्षण किया था। इसका मकसद वहां उत्पादन और स्वच्छता से जुड़े नियमों की जांच करना था। जांच में सामने आया कि फर्श पर गिरे और टूटे हुए नूडल्स को दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा था। इन टूटे नूडल्स को बिना हीट ट्रीटमेंट के भुजिया उत्पादों में इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच में सामने आई प्रमुख बातें:-
सवाल: कितनी मात्रा में स्टॉक जब्त हुआ?
जवाब: जांच के दौरान एफएसएसएआई ने मौके से 32,107.2 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया। इसमें खुले और टूटे हुए नूडल्स भी शामिल थे। यानी मामला सिर्फ साफ-सफाई की कमी तक सीमित नहीं था। उत्पादन प्रक्रिया और लाइसेंस से जुड़े नियमों को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए।
सवाल: क्या एक्सपायर्ड सामान भी मिला?
जवाब: हां... एफएसएसएआई के मुताबिक, यूनिट में 1,925 बॉक्स एक्सपायर्ड तैयार उत्पाद मिले। इन्हें मौके पर ही रोक दिया गया। जांच में पेस्ट कंट्रोल से जुड़े रिकॉर्ड भी पर्याप्त नहीं मिले। इसके अलावा खाद्य स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों में भी कमियां सामने आईं।
यह भी पढ़ें: टीएमसी के 20 बागी सांसदों पर लटकी तलवार: स्पीकर ने 22 सितंबर तक दिया वक्त; अब बचेंगे या जाएगी सदस्यता?
सवाल: महाराष्ट्र एफडीए ने क्या नया फैसला लिया?
जवाब: महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने पूरे साल के लिए एक स्थायी खाद्य सुरक्षा कैलेंडर जारी किया है। यह पहली बार इस तरह की स्थायी और व्यापक व्यवस्था है। इसका मकसद यह है कि हर त्योहार के समय अलग-अलग आदेश जारी करने के बजाय पहले से ही खाद्य सुरक्षा जांच की तैयारी की जा सके।
इन त्योहारों पर होगी खास निगरानी
सवाल: त्योहारों की जांच कैसे होगी?
जवाब: एफडीए ने त्योहारों को तीन स्तरों में बांटा है। बड़े राज्यस्तरीय त्योहार लेवल- 1 में होंगे। क्षेत्रीय त्योहार लेवल-2 में और स्थानीय त्योहार, मेले और गांव स्तर के आयोजन लेवल-3 में रखे गए हैं।
जांच की व्यवस्था चार चरणों में होगी
सवाल: किन खाद्य पदार्थों पर खास नजर होगी?
जवाब: त्योहार के हिसाब से अलग-अलग खाद्य पदार्थों को निगरानी में रखा गया है। महाशिवरात्रि और नवरात्रि में भगर, कुट्टू और राजगिरा के आटे की जांच होगी। ईद, रमजान, गणेशोत्सव, दिवाली और होली के दौरान दूध और डेयरी उत्पादों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
एफडीए की निगरानी में ये चीजें भी रहेंगी
सवाल: भंडारे और इफ्तार के लिए क्या नियम है?
जवाब: महाप्रसाद, इफ्तार, अन्नदान, लंगर और भंडारे जैसे बड़े सामुदायिक भोजन आयोजनों के लिए भी नियम तय किए गए हैं। आयोजकों को अधिकृत फूड कैटरर रखना होगा। साथ ही संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी को इसकी जानकारी पहले देनी होगी।
खाद्य कारोबारियों को अपना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन और क्यूआर कोड प्रमुख जगह पर दिखाना होगा। कच्चा माल केवल अधिकृत या पंजीकृत सप्लायर से खरीदना होगा। प्रतिबंधित रंगों और औद्योगिक रसायनों के इस्तेमाल से बचना होगा। खाद्य कर्मचारियों के लिए सालाना मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी जरूरी होगा। 25 या उससे ज्यादा खाद्य कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान में कम से कम एक FoSTaC प्रमाणित खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षक रखना होगा।
विज्ञापन
सवाल: अजमेर की यूनिट में क्या मिला?
जवाब: एफएसएसएआई ने अजमेर के रूपनगढ़ स्थित सीजी फूड्स इंडिया की यूनिट का निरीक्षण किया था। इसका मकसद वहां उत्पादन और स्वच्छता से जुड़े नियमों की जांच करना था। जांच में सामने आया कि फर्श पर गिरे और टूटे हुए नूडल्स को दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा था। इन टूटे नूडल्स को बिना हीट ट्रीटमेंट के भुजिया उत्पादों में इस्तेमाल किया जा रहा था।
विज्ञापन
जांच में सामने आई प्रमुख बातें:-
- फर्श पर गिरे और टूटे नूडल्स को दोबारा भुजिया में इस्तेमाल किया जा रहा था। इन नूडल्स को इस्तेमाल से पहले हीट ट्रीटमेंट भी नहीं दिया जा रहा था।
- पैकेजिंग पर पहले की तारीख डालने का मामला भी सामने आया। एफएसएसएआई ने इसे भी नियमों के उल्लंघन में शामिल किया है।
- ‘वाई-वाई मामा’ और ‘वाई-वाई मामा पुंटे’ भुजिया के वेरिएंट बिना लाइसेंस बनाए जा रहे थे। एफएसएसएआई ने इसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 31(1) का उल्लंघन बताया।
विज्ञापन
सवाल: कितनी मात्रा में स्टॉक जब्त हुआ?
जवाब: जांच के दौरान एफएसएसएआई ने मौके से 32,107.2 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया। इसमें खुले और टूटे हुए नूडल्स भी शामिल थे। यानी मामला सिर्फ साफ-सफाई की कमी तक सीमित नहीं था। उत्पादन प्रक्रिया और लाइसेंस से जुड़े नियमों को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए।
सवाल: क्या एक्सपायर्ड सामान भी मिला?
जवाब: हां... एफएसएसएआई के मुताबिक, यूनिट में 1,925 बॉक्स एक्सपायर्ड तैयार उत्पाद मिले। इन्हें मौके पर ही रोक दिया गया। जांच में पेस्ट कंट्रोल से जुड़े रिकॉर्ड भी पर्याप्त नहीं मिले। इसके अलावा खाद्य स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों में भी कमियां सामने आईं।
- एफएसएसएआई ने कंपनी से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं। इन नमूनों को लैब जांच के लिए भेजा गया है।
- नियामक के मुताबिक, लैब रिपोर्ट और निरीक्षण में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
- एफएसएसएआई ने कंपनी को बिना जरूरी मंजूरी और सुरक्षा उपायों के वेज भुजिया नमकीन का उत्पादन बंद करने को कहा है।
यह भी पढ़ें: टीएमसी के 20 बागी सांसदों पर लटकी तलवार: स्पीकर ने 22 सितंबर तक दिया वक्त; अब बचेंगे या जाएगी सदस्यता?
सवाल: महाराष्ट्र एफडीए ने क्या नया फैसला लिया?
जवाब: महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने पूरे साल के लिए एक स्थायी खाद्य सुरक्षा कैलेंडर जारी किया है। यह पहली बार इस तरह की स्थायी और व्यापक व्यवस्था है। इसका मकसद यह है कि हर त्योहार के समय अलग-अलग आदेश जारी करने के बजाय पहले से ही खाद्य सुरक्षा जांच की तैयारी की जा सके।
इन त्योहारों पर होगी खास निगरानी
- इस कैलेंडर में गणेशोत्सव, नवरात्रि, दिवाली, ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा, क्रिसमस और न्यू ईयर जैसे बड़े त्योहार शामिल हैं।
- इसके साथ मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि, होली, रंगपंचमी, गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, वट पूर्णिमा, रक्षाबंधन, नाग पंचमी, जन्माष्टमी, दहीहांडी, दशहरा, कोजागिरी पूर्णिमा, तुलसी विवाह और गुरु नानक जयंती भी शामिल हैं।
सवाल: त्योहारों की जांच कैसे होगी?
जवाब: एफडीए ने त्योहारों को तीन स्तरों में बांटा है। बड़े राज्यस्तरीय त्योहार लेवल- 1 में होंगे। क्षेत्रीय त्योहार लेवल-2 में और स्थानीय त्योहार, मेले और गांव स्तर के आयोजन लेवल-3 में रखे गए हैं।
जांच की व्यवस्था चार चरणों में होगी
- त्योहार से 15 से 21 दिन पहले जोखिम वाले इलाकों और खाद्य प्रतिष्ठानों की पहचान होगी। नमूने लेने और लैब जांच की भी तैयारी की जाएगी। त्योहार से 14 दिन पहले उत्पादन केंद्रों, गोदामों और परिवहन की जांच होगी। कच्चे माल की जांच के साथ नमूने भी लिए जाएंगे।
- त्योहार वाले दिन बाजारों, मिठाई दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी होगी। खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जांच की जाएगी। त्योहार के बाद 30 दिन तक नमूनों की जांच, रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर असुरक्षित खाद्य पदार्थ जब्त कर नष्ट किए जाएंगे।
सवाल: किन खाद्य पदार्थों पर खास नजर होगी?
जवाब: त्योहार के हिसाब से अलग-अलग खाद्य पदार्थों को निगरानी में रखा गया है। महाशिवरात्रि और नवरात्रि में भगर, कुट्टू और राजगिरा के आटे की जांच होगी। ईद, रमजान, गणेशोत्सव, दिवाली और होली के दौरान दूध और डेयरी उत्पादों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
एफडीए की निगरानी में ये चीजें भी रहेंगी
- ईद और अन्य मौकों पर मीट की दुकानों में साफ-सफाई और कोल्ड-चेन की जांच होगी। यानी मांस के सुरक्षित तापमान पर रखे जाने की व्यवस्था भी देखी जाएगी।
- मिठाई, खोया, खाने का तेल, फल, सूखे मेवे, बेकरी उत्पाद और केक की भी त्योहारों के दौरान जांच की जाएगी।
- इस्तेमाल किए गए तेल को लेकर क्या नियम है?
- खाने के तेल पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। अगर तलने वाले तेल में टीपीसी 25 फीसदी से ज्यादा पाए जाते हैं, तो वह मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त माना जाएगा। ऐसे तेल का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
सवाल: भंडारे और इफ्तार के लिए क्या नियम है?
जवाब: महाप्रसाद, इफ्तार, अन्नदान, लंगर और भंडारे जैसे बड़े सामुदायिक भोजन आयोजनों के लिए भी नियम तय किए गए हैं। आयोजकों को अधिकृत फूड कैटरर रखना होगा। साथ ही संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी को इसकी जानकारी पहले देनी होगी।
खाद्य कारोबारियों को अपना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन और क्यूआर कोड प्रमुख जगह पर दिखाना होगा। कच्चा माल केवल अधिकृत या पंजीकृत सप्लायर से खरीदना होगा। प्रतिबंधित रंगों और औद्योगिक रसायनों के इस्तेमाल से बचना होगा। खाद्य कर्मचारियों के लिए सालाना मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी जरूरी होगा। 25 या उससे ज्यादा खाद्य कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान में कम से कम एक FoSTaC प्रमाणित खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षक रखना होगा।