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Moradabad News: 40 प्रतिशत धनराशि को विकास कार्यो पर, 20 प्रतिशत धनराशि पंचायत के प्रदर्शन पर आधारित होगी
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मुरादाबाद। 16 वें वित्त आयोग की निधि में एक महत्वपूर्ण बदलाव कर इसका श्रेणीकरण किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों को 40 प्रतिशत राशि का खर्च पर्यावरण, स्वच्छता, पेयजल व जल निकासी जैसे कार्यो पर अनिवार्य रूप से करना होगा। कुल राशि में 20 प्रतिशत धनराशि का व्यय ग्राम पंचायत के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा, यदि वह बेहतर कार्य करेंगे तो ही उन्हें धनराशि मिल सकेगी।
पंचायत राज व्यवस्था में 15वां पंचायती आयोग का कार्यकाल 26 मई को पूरा होने वाला है। इसके बाद अब 16वां वित्त आयोग (2026 से 2031) लागू होगा, जिसमें शासन ने 15वें वित्त आयोग से करीब 84 प्रतिशत अधिक धनराशि का आवंटन किया है लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। 16वें वित्त आयोग के लिए अभी पंचायतों का चुनाव होना शेष है, जबकि मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने में सिर्फ 14 दिन ही शेष हैं। इसके बाद अब प्रधानों की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को संचालन का कार्य सौंपे जाने की संभावना है। हालांकि अभी तक प्रदेश शासन ने इसकी स्थिति को स्पष्ट नहीं किया है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 16वें वित्त आयोग की राशि में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब धनराशि का श्रेणीकरण होगा। अब ग्राम पंचायतें पूरी धनराशि को अपने हिसाब से व्यय करती थीं। लेकिन अब 16वेें वित्त की कुल धनराशि का 40 प्रतिशत ग्राम पंचायत की स्वच्छता, जल निकासी, वातावरण को शुद्ध करने और शुद्ध पेयजल मुहैया कराने आदि के कार्यो पर व्यय होगा। जिससे ग्राम पंचायतों का माहौल बेहतर होगा और लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा 40 प्रतिशत धनराशि को ग्राम पंचायतें अपने हिसाब से कार्ययोजना तैयार करके विकास कार्यो पर व्यय कर सकेंगी। साथ ही 20 प्रतिशत धनराशि ग्राम पंचायत के प्रदर्शन पर आधारित रहेगी। ग्राम पंचायतों को अपनी आय के संसाधन विकसित करने होंगे, उसी आधार पर उन्हें धनराशि भी मिल पाएगी। जिससे प्रकार 1500 तक की आबादी वाली छोटी ग्राम पंचायतों को भी उनकी खुद की आय की पांच गुना धनराशि शासन से मिलेगी। इन कार्यो से ग्राम पंचायत खुद की आय को बढ़ाने के प्रति गंभीर होंगी, जिससे विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे।
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पंचायत राज व्यवस्था में 15वां पंचायती आयोग का कार्यकाल 26 मई को पूरा होने वाला है। इसके बाद अब 16वां वित्त आयोग (2026 से 2031) लागू होगा, जिसमें शासन ने 15वें वित्त आयोग से करीब 84 प्रतिशत अधिक धनराशि का आवंटन किया है लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। 16वें वित्त आयोग के लिए अभी पंचायतों का चुनाव होना शेष है, जबकि मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने में सिर्फ 14 दिन ही शेष हैं। इसके बाद अब प्रधानों की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को संचालन का कार्य सौंपे जाने की संभावना है। हालांकि अभी तक प्रदेश शासन ने इसकी स्थिति को स्पष्ट नहीं किया है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 16वें वित्त आयोग की राशि में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब धनराशि का श्रेणीकरण होगा। अब ग्राम पंचायतें पूरी धनराशि को अपने हिसाब से व्यय करती थीं। लेकिन अब 16वेें वित्त की कुल धनराशि का 40 प्रतिशत ग्राम पंचायत की स्वच्छता, जल निकासी, वातावरण को शुद्ध करने और शुद्ध पेयजल मुहैया कराने आदि के कार्यो पर व्यय होगा। जिससे ग्राम पंचायतों का माहौल बेहतर होगा और लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा 40 प्रतिशत धनराशि को ग्राम पंचायतें अपने हिसाब से कार्ययोजना तैयार करके विकास कार्यो पर व्यय कर सकेंगी। साथ ही 20 प्रतिशत धनराशि ग्राम पंचायत के प्रदर्शन पर आधारित रहेगी। ग्राम पंचायतों को अपनी आय के संसाधन विकसित करने होंगे, उसी आधार पर उन्हें धनराशि भी मिल पाएगी। जिससे प्रकार 1500 तक की आबादी वाली छोटी ग्राम पंचायतों को भी उनकी खुद की आय की पांच गुना धनराशि शासन से मिलेगी। इन कार्यो से ग्राम पंचायत खुद की आय को बढ़ाने के प्रति गंभीर होंगी, जिससे विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे।
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