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भाजपा ने मेरठ बुलाए पश्चिमी यूपी के सांसद
Updated Mon, 18 Jun 2018 02:16 AM IST
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मुरादाबाद।
भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने सभी सांसदों को सोमवार को मेरठ बुलाया है। पार्टी 2019 की तैयारियों में जुटी है। मीटिंग का एजेंडा सांसदों को फिलहाल नहीं बताया गया है। माना जा रहा है कि सपा - बसपा के गठबंधन से उपजे हालात में 2019 के लिए चुनावी समीकरण तैयार करने पर चर्चा होगी। पार्टी नेता बेशक कहते रहें कि गठबंधन उनके लिए कोई चुनौती नहीं है, लेकिन गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर को गंवा चुकी पार्टी अंदरखाने इसे लेकर संजीदा है।
उपचुनाव में गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों को हारने के बाद भाजपा ने कैराना और नूरपुर उपचुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। इसके बावजूद पार्टी इन दोनों सीटों को नहीं बचा सकी। हार के बाद पार्टी नेताओं ने बयान दिए थे कि अच्छा लड़ने के बावजूद वह चुनावी समीकरणों की वजह से चुनाव हार गए। 2019 में बसपा और सपा मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो कमोबेश ऐसे ही समीकरण पूरे प्रदेश में होंगे। 2019 को लेकर अंदरखाने पार्टी में बेचैनी है। ग्राम स्वराज योजना के बहाने भाजपा नेता दिनरात जनसंपर्क अभियान में जुटे हैं। सांसदों की गांवों में रात्रि चौपाल हो रही हैं। संगठन के तमाम बड़े ओहदेदार उत्तर प्रदेश में पसीना बहा रहे हैं। सोमवार को सांसदों को मेरठ बुलाने के पीछे भी यही वजह बताई जा रही है। पार्टी की कोशिश है कि किसी तरह दलित समाज को भाजपा से जोड़ा जाए। इसके लिए सोमवार को मेरठ से सांसदों को कोई नया मंत्र मिल सकता है। संभल सांसद सत्यपाल सिंह सैनी का कहना है कि उन्हें मेरठ पहुंचने के लिए कहा गया है। मुरादाबाद के सांसद कुुंवर सर्वेश सिंह ने भी बताया कि सोमवार को मेरठ बुलाया गया है। एजेंडा की जानकारी फिलहाल नहीं है।
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भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने सभी सांसदों को सोमवार को मेरठ बुलाया है। पार्टी 2019 की तैयारियों में जुटी है। मीटिंग का एजेंडा सांसदों को फिलहाल नहीं बताया गया है। माना जा रहा है कि सपा - बसपा के गठबंधन से उपजे हालात में 2019 के लिए चुनावी समीकरण तैयार करने पर चर्चा होगी। पार्टी नेता बेशक कहते रहें कि गठबंधन उनके लिए कोई चुनौती नहीं है, लेकिन गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर को गंवा चुकी पार्टी अंदरखाने इसे लेकर संजीदा है।
उपचुनाव में गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों को हारने के बाद भाजपा ने कैराना और नूरपुर उपचुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। इसके बावजूद पार्टी इन दोनों सीटों को नहीं बचा सकी। हार के बाद पार्टी नेताओं ने बयान दिए थे कि अच्छा लड़ने के बावजूद वह चुनावी समीकरणों की वजह से चुनाव हार गए। 2019 में बसपा और सपा मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो कमोबेश ऐसे ही समीकरण पूरे प्रदेश में होंगे। 2019 को लेकर अंदरखाने पार्टी में बेचैनी है। ग्राम स्वराज योजना के बहाने भाजपा नेता दिनरात जनसंपर्क अभियान में जुटे हैं। सांसदों की गांवों में रात्रि चौपाल हो रही हैं। संगठन के तमाम बड़े ओहदेदार उत्तर प्रदेश में पसीना बहा रहे हैं। सोमवार को सांसदों को मेरठ बुलाने के पीछे भी यही वजह बताई जा रही है। पार्टी की कोशिश है कि किसी तरह दलित समाज को भाजपा से जोड़ा जाए। इसके लिए सोमवार को मेरठ से सांसदों को कोई नया मंत्र मिल सकता है। संभल सांसद सत्यपाल सिंह सैनी का कहना है कि उन्हें मेरठ पहुंचने के लिए कहा गया है। मुरादाबाद के सांसद कुुंवर सर्वेश सिंह ने भी बताया कि सोमवार को मेरठ बुलाया गया है। एजेंडा की जानकारी फिलहाल नहीं है।
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