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पीले टमाटरों से पीले पड़े किसान
Updated Mon, 17 Jul 2017 01:26 AM IST
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महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल के अलावा नेपाल भी सप्लाई होता है सलारपुर का टमाटर
कपिल कांत शर्मा
अमरोहा।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल के अलावा नेपाल तक अपने लाल, खूबसूरत और स्वादिष्ट टमाटर की आपूर्ति करने वाले जोया के गांव सलारपुर के किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो कुदरत के कहर से टमाटर में कीड़े लगने से पैदावार तीन चौथाई घट गई, दूसरे जो टमाटर बचा वह पीला पड़ गया जिसके खरीददार हिचकने लगे।
टमाटर की देश-विदेश में धाक है। नासिक, कोलकाता, बनारस, नेपाल, बंगलूरू, महाराष्ट्र आदि के व्यापारी यहां टमाटर खरीदने आते हैं। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भी जोया के टमाटर स्वाद भाता है। अब तक टमाटर की पैदावार 40 क्विंटल प्रति बीघा होती थी। कीड़ा लगने के कारण यह पैदावार 10 क्विंटल प्रति बीघा रह गई है। उसमें से भी पचास प्रतिशत टमाटर पीला पड़ गया। किसानों का कहना है कि सीजन शुरू होते ही व्यापारी आने लगे। लेकिन, टमाटर की फसल बर्बाद होने के कारण उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इस कारण फसल की लागत निकालना भारी हो गया है। बीते साल टमाटर 500-600 रुपये प्रति क्रेट के हिसाब से बिका था। जबकि, इस बार प्रति क्रेट (25 किलो) के दाम 80 से 100 रुपये मिल रहे हैं।
बार्डर पर तनाव के चलते भी लगी चपत
सलारपुर के टमाटरों को अमृतसर होते हुए पाकिस्तान भेजा जाता है। लेकिन, इस वक्त बार्डर पर तनाव के चलते टमाटरों के ट्रांसपोर्ट पर रोक लगा दी है। जिससे किसानों की स्थिति और दयनीय हो गई है।
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बोले किसान
गांव के किसान मारूफ खान ने बताया कि 1999 में टमाटर के दामों में भारी उछाल आया था। टमाटर काफी महंगा बिका था। इसकी के चलते उन्होंने टमाटर की खेतीबाड़ी शुरू की। लेकिन, इस बार बीमारी लगने के कारण फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
किसान शमशाद खां ने बताया कि इस बार 14 बीघा टमाटर किया था, शुरूआत में ही फसल में फफूंदी लग गई। 25 प्रतिशत फसल खराब हो गई। फफूंदी लगने से टमाटर पीला पड़ गया, जिससे दाम घट गए।
किसान इंतखाब खां ने बताया कि तीन एकड़ में टमाटर किया था, रोग लगने से पैदावार घट गई। जिससे उन पर आर्थिक मार पड़ी है। उन्होंने कहा नुकसान को पूरा करने के लिए जल्द ही दोबारा टमाटर की फसल करेेंगे।
खुदरा बाजार में 60-80 रुपये किलो बिक रहा टमाटर
मुरादाबाद। स्थानीय मंडी में फड़ लगाने वाले संजीव बताते हैं कि इस वक्त अमरोहा से बहुत कम टमाटर आ रहा है। बीच में जीएसटी के चक्कर में टमाटरों ट्रक नासिक और बंगलुरू से नहीं आ रहे थे, लेकिन इधर कुछ ट्रक आए हैं। लेकिन बाजार में टमाटरों की आवक कम होने की वजह खुदरा रेट 60 रुपये से नीचे नहीं हो पा रहे। टमाटर भी दागी आ रहे हैं।
मंडी के ही एक अन्य विक्रेता कल्लू सिंह ने बताया कि इस सीजन में अमरोहा के टमाटर खत्म हो जाते हैं। नासिक और बंगलुरू के टमाटरों पर निर्भर रहना पड़ता है। कम आवक की वजह से टमाटर महंगे बिक रहे हैं।
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कपिल कांत शर्मा
अमरोहा।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल के अलावा नेपाल तक अपने लाल, खूबसूरत और स्वादिष्ट टमाटर की आपूर्ति करने वाले जोया के गांव सलारपुर के किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो कुदरत के कहर से टमाटर में कीड़े लगने से पैदावार तीन चौथाई घट गई, दूसरे जो टमाटर बचा वह पीला पड़ गया जिसके खरीददार हिचकने लगे।
टमाटर की देश-विदेश में धाक है। नासिक, कोलकाता, बनारस, नेपाल, बंगलूरू, महाराष्ट्र आदि के व्यापारी यहां टमाटर खरीदने आते हैं। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भी जोया के टमाटर स्वाद भाता है। अब तक टमाटर की पैदावार 40 क्विंटल प्रति बीघा होती थी। कीड़ा लगने के कारण यह पैदावार 10 क्विंटल प्रति बीघा रह गई है। उसमें से भी पचास प्रतिशत टमाटर पीला पड़ गया। किसानों का कहना है कि सीजन शुरू होते ही व्यापारी आने लगे। लेकिन, टमाटर की फसल बर्बाद होने के कारण उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इस कारण फसल की लागत निकालना भारी हो गया है। बीते साल टमाटर 500-600 रुपये प्रति क्रेट के हिसाब से बिका था। जबकि, इस बार प्रति क्रेट (25 किलो) के दाम 80 से 100 रुपये मिल रहे हैं।
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बार्डर पर तनाव के चलते भी लगी चपत
सलारपुर के टमाटरों को अमृतसर होते हुए पाकिस्तान भेजा जाता है। लेकिन, इस वक्त बार्डर पर तनाव के चलते टमाटरों के ट्रांसपोर्ट पर रोक लगा दी है। जिससे किसानों की स्थिति और दयनीय हो गई है।
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बोले किसान
गांव के किसान मारूफ खान ने बताया कि 1999 में टमाटर के दामों में भारी उछाल आया था। टमाटर काफी महंगा बिका था। इसकी के चलते उन्होंने टमाटर की खेतीबाड़ी शुरू की। लेकिन, इस बार बीमारी लगने के कारण फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
किसान शमशाद खां ने बताया कि इस बार 14 बीघा टमाटर किया था, शुरूआत में ही फसल में फफूंदी लग गई। 25 प्रतिशत फसल खराब हो गई। फफूंदी लगने से टमाटर पीला पड़ गया, जिससे दाम घट गए।
किसान इंतखाब खां ने बताया कि तीन एकड़ में टमाटर किया था, रोग लगने से पैदावार घट गई। जिससे उन पर आर्थिक मार पड़ी है। उन्होंने कहा नुकसान को पूरा करने के लिए जल्द ही दोबारा टमाटर की फसल करेेंगे।
खुदरा बाजार में 60-80 रुपये किलो बिक रहा टमाटर
मुरादाबाद। स्थानीय मंडी में फड़ लगाने वाले संजीव बताते हैं कि इस वक्त अमरोहा से बहुत कम टमाटर आ रहा है। बीच में जीएसटी के चक्कर में टमाटरों ट्रक नासिक और बंगलुरू से नहीं आ रहे थे, लेकिन इधर कुछ ट्रक आए हैं। लेकिन बाजार में टमाटरों की आवक कम होने की वजह खुदरा रेट 60 रुपये से नीचे नहीं हो पा रहे। टमाटर भी दागी आ रहे हैं।
मंडी के ही एक अन्य विक्रेता कल्लू सिंह ने बताया कि इस सीजन में अमरोहा के टमाटर खत्म हो जाते हैं। नासिक और बंगलुरू के टमाटरों पर निर्भर रहना पड़ता है। कम आवक की वजह से टमाटर महंगे बिक रहे हैं।