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पीएम आवास योजना के आवेदन कबाड़ में पड़े मिले
Updated Sun, 11 Nov 2018 01:57 AM IST
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मुरादाबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना के सैकड़ों आवेदन शनिवार देर शाम पीतल बस्ती क्षेत्र में कबाड़ में पड़े मिलने से अफसरों में हड़कंप मच गया । ये फार्म कबाड़ में कैसे पहुंचने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। इन आवेदनों के साथ घर पाने को आवेदन करने वालों की बैंक पासबुक, आधार कार्ड की फोटो कांपी तथा शपथ पत्र भी हैं। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाली योजना से जुड़ा होने के कारण अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है और वह जिम्मेदारी से बचने के लिए एक दूसरे विभाग पर पल्ला झाड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों का घर बनाने के लिए अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। जिसमें शासन से ढ़ाई लाख रुपये तक दिया जाता है। आवास योजना के आवेदन मार्च तक आन आनलाइन भरवाए गए थे। उसके बाद बचे हुए लोगों के मैनुअल आवेदन भरवाए जा रहे हैं। शनिवार को पीतल बस्ती क्षेत्र के कबाड़ में दो बोरों में भरे पीएम आवास योजना के सैकड़ों आवेदन पड़े मिले। शपथ पत्र के साथ लोगों के आवेदन देखे तो वहां पर भीड़ लग गई। तीस से ज्यादा ऐसे आवेदक भी वहां पर पहुंच गए। इसकी जानकारी होते ही अफसरों में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने आवेदनों से भरे बोरों को कब्जे में ले लिया। तब तक 30-35 आवेदक उसमें से अपने आवेदन निकाल चुके थे। डूडा के पीओ इसकी जिम्मेदारी नगर निगम पर डाल रहे हैं।
पीओ डूडा दीपक कुमार का कहना है कि हमने फार्म नगर निगम को दिए थे। वहां से सफाई कर्मचारियों के द्वारा लोगों से भरवाए जाने थे। विभाग ने आवेदन की जिम्मेदारी लखनऊ की एजेंसी को दी हुई है। ऐसे में कहीं पर भी विभाग के अधिकारी - कर्मचारी जिम्मेदार नहीं हैं। इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दे दी गई है। रविवार को विभाग की टीम इसकी जांच करेगी। मार्च तक फार्म आन लाइन जमा कराए जा रहे थे लेकिन बाद में छूटे हुए लोगों के आफ लाइन आवेदन लिए गए हैं।
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प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों का घर बनाने के लिए अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। जिसमें शासन से ढ़ाई लाख रुपये तक दिया जाता है। आवास योजना के आवेदन मार्च तक आन आनलाइन भरवाए गए थे। उसके बाद बचे हुए लोगों के मैनुअल आवेदन भरवाए जा रहे हैं। शनिवार को पीतल बस्ती क्षेत्र के कबाड़ में दो बोरों में भरे पीएम आवास योजना के सैकड़ों आवेदन पड़े मिले। शपथ पत्र के साथ लोगों के आवेदन देखे तो वहां पर भीड़ लग गई। तीस से ज्यादा ऐसे आवेदक भी वहां पर पहुंच गए। इसकी जानकारी होते ही अफसरों में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने आवेदनों से भरे बोरों को कब्जे में ले लिया। तब तक 30-35 आवेदक उसमें से अपने आवेदन निकाल चुके थे। डूडा के पीओ इसकी जिम्मेदारी नगर निगम पर डाल रहे हैं।
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पीओ डूडा दीपक कुमार का कहना है कि हमने फार्म नगर निगम को दिए थे। वहां से सफाई कर्मचारियों के द्वारा लोगों से भरवाए जाने थे। विभाग ने आवेदन की जिम्मेदारी लखनऊ की एजेंसी को दी हुई है। ऐसे में कहीं पर भी विभाग के अधिकारी - कर्मचारी जिम्मेदार नहीं हैं। इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दे दी गई है। रविवार को विभाग की टीम इसकी जांच करेगी। मार्च तक फार्म आन लाइन जमा कराए जा रहे थे लेकिन बाद में छूटे हुए लोगों के आफ लाइन आवेदन लिए गए हैं।
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