{"_id":"5c97e8b2bdec22140b209c0c","slug":"161553459378-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वोटों का ध्रुवीकरण बिगाड़ सकता है भाजपा का गणित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वोटों का ध्रुवीकरण बिगाड़ सकता है भाजपा का गणित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद। मुरादाबाद सीट पर वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। मुरादाबाद लोकसभा सीट पर करीब 45 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। यदि इन्हें 10 फीसदी अनुसूचित जाति के मतदाताओं को साथ मिला तो भाजपा का गणित बिगड़ सकता है। ध्रुवीकरण की स्थिति में भाजपा के सामने सपा का वोट बैंक माने जाने वाले यादवों और बसपा के कट्टर समर्थकों में शुमार अनुसूचित जाति के वोटों को साधने की बड़ी चुनौती होगी। सपा और बसपा के गठबंधन ने सीट के परंपरागत जातीय समीकरणों को पलट दिया है। 2014 में 485224 वोट पाकर सांसद बने सर्वेश के लिए राह उतनी आसान नहीं होगी।
मुरादाबाद लोकसभा में मतदाताओं की कुल संख्या करीब 1941200 है। इसमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 880000 है। जो कुल मतों का 45 फीसदी से अधिक है। अनुसूचित जाति में जाटव मतदाताओं की संख्या करीब 180000 और वाल्मीकि मतदाताओं की संख्या करीब 43000 है। जो कुल मतों का करीब 10 प्रतिशत है। सपा के वोटर माने जाने वाले यादव मतदाताओं की संख्या करीब 29000 है। यदि ध्रुवीकरण होता है तो मुस्लिम मतदाताओं के साथ गठबंधन के तहत बसपा के वोट जोड़कर आंकड़ा 11 लाख से अधिक पहुंच रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए सीट बचा पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। बसपा सुप्रीमो की अपील को ठुकराकर अनुसूचित जाति के मतदाता भाजपा के साथ खड़े हाेंगे इसका पक्का यकीन खुद भाजपा नेताओं को भी नहीं है। हालांकि भाजपा ने अनुसूचित जाति के मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए पिछले एक साल से पूरी ताकत झोंक रखी है।
बाकी बचे मतदाताओं में करीब 150000 ठाकुर, 149000 सैनी, 74000 वैश्य, 71000 कश्यप, 50000 जाट, 55000 प्रजापति, 48000 पाल, 45000 ब्राहम्मण, 42000 पंजाबी, 15000 विश्नोई वोटों को एकजुट करना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी। आरक्षण के मुद्दे पर जाट मतदाताओं में भाजपा को लेकर कुछ गुस्सा भी है। इनका गुस्सा शांत करना भी भाजपा के लिए चुनौती है। इन सबसे भी ज्यादा बड़ी चुनौती भाजपा के लिए अपने मतदाताओं को घरों से निकालने की होगी। मतदान प्रतिशत यदि कम रहता है तो इसका सीधा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी और सांसद सर्वेश सिंह कह चुके हैं कि उन्हें समाज के हर वर्ग का समर्थन हासिल है। उन्होंने बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के भी अपने साथ होने का दावा किया है। सांसद का कहना है कि 2014 में भी उन्हें बड़ी तादाद में मुस्लिम मत मिले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद लोकसभा में मतदाताओं की कुल संख्या करीब 1941200 है। इसमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 880000 है। जो कुल मतों का 45 फीसदी से अधिक है। अनुसूचित जाति में जाटव मतदाताओं की संख्या करीब 180000 और वाल्मीकि मतदाताओं की संख्या करीब 43000 है। जो कुल मतों का करीब 10 प्रतिशत है। सपा के वोटर माने जाने वाले यादव मतदाताओं की संख्या करीब 29000 है। यदि ध्रुवीकरण होता है तो मुस्लिम मतदाताओं के साथ गठबंधन के तहत बसपा के वोट जोड़कर आंकड़ा 11 लाख से अधिक पहुंच रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए सीट बचा पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। बसपा सुप्रीमो की अपील को ठुकराकर अनुसूचित जाति के मतदाता भाजपा के साथ खड़े हाेंगे इसका पक्का यकीन खुद भाजपा नेताओं को भी नहीं है। हालांकि भाजपा ने अनुसूचित जाति के मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए पिछले एक साल से पूरी ताकत झोंक रखी है।
विज्ञापन
बाकी बचे मतदाताओं में करीब 150000 ठाकुर, 149000 सैनी, 74000 वैश्य, 71000 कश्यप, 50000 जाट, 55000 प्रजापति, 48000 पाल, 45000 ब्राहम्मण, 42000 पंजाबी, 15000 विश्नोई वोटों को एकजुट करना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी। आरक्षण के मुद्दे पर जाट मतदाताओं में भाजपा को लेकर कुछ गुस्सा भी है। इनका गुस्सा शांत करना भी भाजपा के लिए चुनौती है। इन सबसे भी ज्यादा बड़ी चुनौती भाजपा के लिए अपने मतदाताओं को घरों से निकालने की होगी। मतदान प्रतिशत यदि कम रहता है तो इसका सीधा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी और सांसद सर्वेश सिंह कह चुके हैं कि उन्हें समाज के हर वर्ग का समर्थन हासिल है। उन्होंने बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के भी अपने साथ होने का दावा किया है। सांसद का कहना है कि 2014 में भी उन्हें बड़ी तादाद में मुस्लिम मत मिले थे।
विज्ञापन