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बाप के इलाज केलिए गांव में भीख मांग रहे है बच्चे
Updated Thu, 04 Oct 2018 02:20 AM IST
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पाकबड़ा(मुरादाबाद)।
पिता के इलाज के लिए घर - घर झोली फैला रहे इन बच्चों का मजदूर पिता महीनाभर बिस्तर पर पड़ा रहने के बाद अब एक निजी अस्पताल के आईसीयू में मौत से जंग लड़ रहा है। पिता की कमाई से घर का दो वक्त का चूल्हा ही बमुश्किल जल पाता था। अब बीमारी में दवा के बोझ ने इन बच्चों के सामने निवाले का भी संकट खड़ा कर दिया है। गरीबों के इलाज को शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना के बावजूद ये बच्चे भीख मांगकर अपने पिता का इलाज कराने को मजबूर हैं। आयुष्मान के लाभार्थियों से इस परिवार का नाम गायब है।
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को बयां करने वाला यह वाकया पाकबड़ा से पांच किमी दूर स्थित बिलारी तहसील के गांव भांडली का है। चालीस बरस का जयपाल सिंह मजदूरी करके अपनी पत्नी और पांच बच्चों का पेट पाल रहा था। एक महीना पहले उसे बुखार आया तो उसकी गृहस्थी की गाड़ी पटरी से उतर गई। उसकी पत्नी मालवती और पांच छोटे - छोटे बच्चों के सामने पेट की आग बुझाने के लिए निवाले का संकट खड़ा हो गया है। मालवती ने घर में जो चार पैसे बुरे वक्त के लिए बचाकर रखे थे वो दो- चार दिन में ही पति के इलाज में खर्च हो गए। इसके बावजूद जयपाल की बीमारी ठीक नहीं हुई। इलाज के लिए उसे हायर सेंटर भेजा गया। अब वो आईसीयू में सांसे गिन रहा है। इलाज का खर्च बढ़ा तो पत्नी और बच्चों ने पहले नाते - रिश्तेदारों और फिर मजबूरन गांव वालों के आगे झोली फैलाई। पूरा परिवार दिनभर लोगों से मदद लेकर किसी तरह जयपाल का इलाज करा रहा है। गांव वालाें से मिले चंदे के पैसों से ही मालवती किसी तरह बच्चों के लिए निवाले का इंतजाम कर रही है। मालवती का कहना है कि गांव वाले भी कहां तक मदद करेंगे। कई बार पैसे दे चुके गांव वालों ने भी अब हाथ खड़े कर दिए हैं।
ग्राम प्रधान के पति इरशाद हुसैन ने बताया की जयपाल गरीब मजदूर है। गांव के लोग चंदा करके उसका इलाज कर रहे है। अब उसकी हालत खराब है तो सरकारी मदद कराई जाएगी। एसडीएम बिलारी ने बताया की वह मामले की जांच कराएंगे।
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ग्राम विकास अधिकारी सत्यपाल सिंह ने बताया की जयपाल का नाम गरीबों की सूची में है। गुरुवार को उसे दस हजार रुपये की आर्थिक मदद दे दी जाएगी। स्वास्थ्य सेविका को जयपाल के घर भेजा गया है। आयुष्मान भारत योजना में उसका पंजीकरण कराया जाएगा। परिवार को अनाज उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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पिता के इलाज के लिए घर - घर झोली फैला रहे इन बच्चों का मजदूर पिता महीनाभर बिस्तर पर पड़ा रहने के बाद अब एक निजी अस्पताल के आईसीयू में मौत से जंग लड़ रहा है। पिता की कमाई से घर का दो वक्त का चूल्हा ही बमुश्किल जल पाता था। अब बीमारी में दवा के बोझ ने इन बच्चों के सामने निवाले का भी संकट खड़ा कर दिया है। गरीबों के इलाज को शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना के बावजूद ये बच्चे भीख मांगकर अपने पिता का इलाज कराने को मजबूर हैं। आयुष्मान के लाभार्थियों से इस परिवार का नाम गायब है।
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को बयां करने वाला यह वाकया पाकबड़ा से पांच किमी दूर स्थित बिलारी तहसील के गांव भांडली का है। चालीस बरस का जयपाल सिंह मजदूरी करके अपनी पत्नी और पांच बच्चों का पेट पाल रहा था। एक महीना पहले उसे बुखार आया तो उसकी गृहस्थी की गाड़ी पटरी से उतर गई। उसकी पत्नी मालवती और पांच छोटे - छोटे बच्चों के सामने पेट की आग बुझाने के लिए निवाले का संकट खड़ा हो गया है। मालवती ने घर में जो चार पैसे बुरे वक्त के लिए बचाकर रखे थे वो दो- चार दिन में ही पति के इलाज में खर्च हो गए। इसके बावजूद जयपाल की बीमारी ठीक नहीं हुई। इलाज के लिए उसे हायर सेंटर भेजा गया। अब वो आईसीयू में सांसे गिन रहा है। इलाज का खर्च बढ़ा तो पत्नी और बच्चों ने पहले नाते - रिश्तेदारों और फिर मजबूरन गांव वालों के आगे झोली फैलाई। पूरा परिवार दिनभर लोगों से मदद लेकर किसी तरह जयपाल का इलाज करा रहा है। गांव वालाें से मिले चंदे के पैसों से ही मालवती किसी तरह बच्चों के लिए निवाले का इंतजाम कर रही है। मालवती का कहना है कि गांव वाले भी कहां तक मदद करेंगे। कई बार पैसे दे चुके गांव वालों ने भी अब हाथ खड़े कर दिए हैं।
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ग्राम प्रधान के पति इरशाद हुसैन ने बताया की जयपाल गरीब मजदूर है। गांव के लोग चंदा करके उसका इलाज कर रहे है। अब उसकी हालत खराब है तो सरकारी मदद कराई जाएगी। एसडीएम बिलारी ने बताया की वह मामले की जांच कराएंगे।
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ग्राम विकास अधिकारी सत्यपाल सिंह ने बताया की जयपाल का नाम गरीबों की सूची में है। गुरुवार को उसे दस हजार रुपये की आर्थिक मदद दे दी जाएगी। स्वास्थ्य सेविका को जयपाल के घर भेजा गया है। आयुष्मान भारत योजना में उसका पंजीकरण कराया जाएगा। परिवार को अनाज उपलब्ध करा दिया जाएगा।