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गौ पालन ही भारत देश की संस्कृति व परंपरा
Updated Sat, 22 Sep 2018 01:08 AM IST
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बहजोई। आर्य समाज बहजोई के वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन वैदिक यज्ञ के साथ शुभारंभ किया गया। आर्य कन्या गुरुकुल हाथरस के वेदपाठी कन्याओं व शिव शास्त्री ने वेद मंत्रों के साथ यज्ञ संपन्न कराते हुए यज्ञ की महिमा व इसके वैज्ञानिक लाभ पर प्रकाश डाला। पंडित दिनेश पथिक ने ऋषि दयानंद व यज्ञ की महिमा से संबंधित भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
दूसरे सत्र में गाोरक्षा व मातृ रक्षा विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया। वक्ताओं ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत में गौ पालन से हमारे देश की परंपरा, संस्कृति व आयुर्वेद से संबंध रहा है। गाय पर्यावरण व स्वास्थ्य के अंतर्गत वैज्ञानिक प्रमाणित हो चुकी है। संचालन राजेंद्र सिंह आर्य ने किया। इस मौके पर लवकुमार आर्य, लक्ष्मी नारायन आर्य, नरेश चंद्र आर्य, प्रदीप आर्य आदि मौजूद रहे।
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दूसरे सत्र में गाोरक्षा व मातृ रक्षा विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया। वक्ताओं ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत में गौ पालन से हमारे देश की परंपरा, संस्कृति व आयुर्वेद से संबंध रहा है। गाय पर्यावरण व स्वास्थ्य के अंतर्गत वैज्ञानिक प्रमाणित हो चुकी है। संचालन राजेंद्र सिंह आर्य ने किया। इस मौके पर लवकुमार आर्य, लक्ष्मी नारायन आर्य, नरेश चंद्र आर्य, प्रदीप आर्य आदि मौजूद रहे।
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