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हुजूर ताजुश्शरी आह मियां के तीजे में शामिल हुए हजारों मुरीद
Updated Tue, 24 Jul 2018 01:40 AM IST
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जुनावई/चंदौसी। तीन दिन पहले मुफ्ती आजम हिंद ताजुश्शरिया आह अख्तर रजा अजहरी मियां के पर्दा कर जाने पर जगह-जगह पर सुन्नी मुसलमानों के द्वारा तीजे की रश्म को अदा किया गया। वहीं जुनावई क्षेत्र के गढ़ी बिचौला गांव में कई स्थानों से आए हजारों लोगों ने शामिल होकर तीजे की रश्म में भाग लिया।
बरेली में बीस जुलाई को आला हजरत के नवाशे ताजुश्शरिया आह मुफ्ती अख्तर रजा खां अजहरी मियां के पर्दा कर जाने पर बीते दिन रविवार को हुजूर को बरेली अजहरी होस्टल में ही दफन किया गया। वहीं हुजूर के नमाजे जनाजा में शरीक होने के लिए विश्व के कोने-कोने से करोड़ो अकीदतमंद एवं मुरादीन लोगों ने भाग लिया। सोमवार को उनके तीजे को लेकर क्षेत्र में कई स्थानों पर अकीदतमंद एवं मुरीदो ने तीजे की रश्म को अदा की। जुनावई के सुल्तानगढ़, हिम्मतपुर, सुल्तानपुर, सहफुल्लागंज सहित अन्य गांव के लोगों ने गढ़ी बिचौला गांव की जामा मस्जिद में हजारों की संख्या में एकत्र होकर हुजूर के तीजे की रश्म अदा की। 50 किलो चनों को अकीदतमंदों द्वारा पढ़ा गया। इमाम मैसर अली ने पढ़े हुए चनों पर फातेहा पढने के बाद सभी लोगों में चने वितरित किए गए।
इस मौके पर मौलाना आरिफ रजा खां ने बताया कि हुजूर ने इल्म को फैलाने के लिए बड़े से बड़ा काम करते बहुत मेहनत की। उलेमा इकराम ने इन्हें शरियत के ताज का खिताब दे दिया। आज दुनियां में इन्हें हुजूर ताजुश्शरीया अख्तर रजा खां अजहरी मियां के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर अब्दुल सलाम, भूरे खां,मैसर अली, जावेद, निहाल, राशिद एवं तमाम सदस्य मौजूद रहे।
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बरेली में बीस जुलाई को आला हजरत के नवाशे ताजुश्शरिया आह मुफ्ती अख्तर रजा खां अजहरी मियां के पर्दा कर जाने पर बीते दिन रविवार को हुजूर को बरेली अजहरी होस्टल में ही दफन किया गया। वहीं हुजूर के नमाजे जनाजा में शरीक होने के लिए विश्व के कोने-कोने से करोड़ो अकीदतमंद एवं मुरादीन लोगों ने भाग लिया। सोमवार को उनके तीजे को लेकर क्षेत्र में कई स्थानों पर अकीदतमंद एवं मुरीदो ने तीजे की रश्म को अदा की। जुनावई के सुल्तानगढ़, हिम्मतपुर, सुल्तानपुर, सहफुल्लागंज सहित अन्य गांव के लोगों ने गढ़ी बिचौला गांव की जामा मस्जिद में हजारों की संख्या में एकत्र होकर हुजूर के तीजे की रश्म अदा की। 50 किलो चनों को अकीदतमंदों द्वारा पढ़ा गया। इमाम मैसर अली ने पढ़े हुए चनों पर फातेहा पढने के बाद सभी लोगों में चने वितरित किए गए।
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इस मौके पर मौलाना आरिफ रजा खां ने बताया कि हुजूर ने इल्म को फैलाने के लिए बड़े से बड़ा काम करते बहुत मेहनत की। उलेमा इकराम ने इन्हें शरियत के ताज का खिताब दे दिया। आज दुनियां में इन्हें हुजूर ताजुश्शरीया अख्तर रजा खां अजहरी मियां के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर अब्दुल सलाम, भूरे खां,मैसर अली, जावेद, निहाल, राशिद एवं तमाम सदस्य मौजूद रहे।
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