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स्वच्छता सर्वेक्षण में अब तीन बार परीक्षा
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मुरादाबाद। देशभर में शहर का रुतबा तय करने वाली स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर निगम को साल में तीन बार परीक्षा देनी होगी। शहरी विकास मंत्रालय ने 2020 में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए 5000 के स्थान पर 4000 अंकों की मार्किंग तय कर दी है। इस फेरबदल के बार महानगर की पिछली रैकिंग में आए मामूली सुधार को बरकरार रखने की चुनौती नगर निगम के सामने आ गई है।
नई गाइड लाइन के मुताबिक महानगर की साल में तीन बार मार्किंग तय की जानी है। इन अंकों को अंतिम बार की मार्किंग में जोड़कर देशभर के 4237 शहरों में महानगर की जगह तय की जाएगी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2017-18 में 274 रैकिंग के बाद कड़ी मेहनत से सर्वेक्षण 2018-19 में मामूली सुधार 195 रैंक के साथ दर्ज किया गया था। लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में यह सुधार बनाए रखना निगम के लिए ज्यादा कठिन होने वाला है।
एक वार्ड की खामी भी डालेगी असर
इस दफा वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण अधिक होगा। अब एक भी वार्ड में मिलने वाली खामी पूरी मार्किंग को प्रभावित करेगी। अहम यह है कि निगम के ज्यादातर वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन सुविधा लागू नहीं हो सकी है। खुले डलावघर के बाहर बिखरा कूड़ा शहर की सूरत बिगाड़ता है।
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केंद्र सरकार की टीम पूछेगी यह सवाल
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन गाड़ी आती है। सूखा-गीला कूड़ा अलग-अलग किया जाता है। वार्ड की सफाई से संतुष्टि है। प्लास्टिक की प्लेट, गिलास और बेग पर बैन लागू है या नहीं। होम कंपोस्टिंग होती है या नहीं। जैसे 12 सवाल केंद्र से आने वाली टीम सीधे पूछी जाएंगे।
इन चरणों में बंटा सर्वेक्षण
सर्वेक्षण का पहला चरण अप्रैल से जून महीने तक होगा। इसके बाद जुलाई से सितंबर तक दूसरा, जबकि अक्तूबर से दिसंबर के बीच तीसरे चरण में केंद्र सरकार की टीम शहर में आएगी।
मार्किंग प्रभावित करेंगी यह समस्याएं :
- सड़कोें का गड्ढा मुक्त न होना
- बिजली के झुलते तार
- खुले में हरियाली नहीं होना
- सड़कों पर घूमते आवारा पशु
- कचरा प्रबंधन नहीं होना
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का शुरू न होगा
इस तरह तय होगी मार्किंग :
सिटीजन फीडबैक 1000
डायरेक्ट ऑब्जरवेशन 1000
सर्टिफिकेशन 1000
सर्विस लेवल प्रोग्रेस 1000
स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 को लेकर हमारी तैयारी पूरी है। अप्रैल से जून तक पहले चरण की अपनी रिपोर्ट भी तैयार कर रहे हैं। हमारी रैंक पिछले साल से बेहतर होगी। - संजय चौहान, नगर आयुक्त
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नई गाइड लाइन के मुताबिक महानगर की साल में तीन बार मार्किंग तय की जानी है। इन अंकों को अंतिम बार की मार्किंग में जोड़कर देशभर के 4237 शहरों में महानगर की जगह तय की जाएगी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2017-18 में 274 रैकिंग के बाद कड़ी मेहनत से सर्वेक्षण 2018-19 में मामूली सुधार 195 रैंक के साथ दर्ज किया गया था। लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में यह सुधार बनाए रखना निगम के लिए ज्यादा कठिन होने वाला है।
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एक वार्ड की खामी भी डालेगी असर
इस दफा वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण अधिक होगा। अब एक भी वार्ड में मिलने वाली खामी पूरी मार्किंग को प्रभावित करेगी। अहम यह है कि निगम के ज्यादातर वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन सुविधा लागू नहीं हो सकी है। खुले डलावघर के बाहर बिखरा कूड़ा शहर की सूरत बिगाड़ता है।
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केंद्र सरकार की टीम पूछेगी यह सवाल
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन गाड़ी आती है। सूखा-गीला कूड़ा अलग-अलग किया जाता है। वार्ड की सफाई से संतुष्टि है। प्लास्टिक की प्लेट, गिलास और बेग पर बैन लागू है या नहीं। होम कंपोस्टिंग होती है या नहीं। जैसे 12 सवाल केंद्र से आने वाली टीम सीधे पूछी जाएंगे।
इन चरणों में बंटा सर्वेक्षण
सर्वेक्षण का पहला चरण अप्रैल से जून महीने तक होगा। इसके बाद जुलाई से सितंबर तक दूसरा, जबकि अक्तूबर से दिसंबर के बीच तीसरे चरण में केंद्र सरकार की टीम शहर में आएगी।
मार्किंग प्रभावित करेंगी यह समस्याएं :
- सड़कोें का गड्ढा मुक्त न होना
- बिजली के झुलते तार
- खुले में हरियाली नहीं होना
- सड़कों पर घूमते आवारा पशु
- कचरा प्रबंधन नहीं होना
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का शुरू न होगा
इस तरह तय होगी मार्किंग :
सिटीजन फीडबैक 1000
डायरेक्ट ऑब्जरवेशन 1000
सर्टिफिकेशन 1000
सर्विस लेवल प्रोग्रेस 1000
स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 को लेकर हमारी तैयारी पूरी है। अप्रैल से जून तक पहले चरण की अपनी रिपोर्ट भी तैयार कर रहे हैं। हमारी रैंक पिछले साल से बेहतर होगी। - संजय चौहान, नगर आयुक्त