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शिक्षकों के बिना कैसे सुधरेगी शैक्षिक गुणवता
Updated Fri, 14 Dec 2018 02:08 AM IST
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मुरादाबाद।
बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र के स्कूलों में छात्र नामांकन संख्या के मानक से अभी भी शिक्षकों का संकट है। कई स्कूल एकल संचालित हो रहे हैं। जबकि कइयों में शिक्षा मित्र हैं। फरवरी में लर्निंग कम आउट के आधार पर स्कूलों की ग्रेडिंग होनी है। ग्रेडिंग के लिए बच्चों की परीक्षा होगी। ग्रेडिंग को लेकर शिक्षकों के साथ बच्चे भी दबाव में हैं।
ग्रामीण और नगर क्षेत्र में शिक्षकों की तैनाती के अलग-अलग मानक हैं। शहरी क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में छात्र संख्या के हिसाब से शिक्षकों की तैनाती नहीं है। नवाबपुरा बालक और मऊ समेत कई स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे हैं। शिक्षक के बीमार पड़ने या फिर किसी कारण अवकाश पर रहने से स्कूल बंद रहते हैं। कई स्कूलों में एक शिक्षक के साथ एक शिक्षा मित्र हैं। जबकि स्कूलों में छात्र संख्या अधिक है। एकल शिक्षक को ही सभी कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पढ़ता है और पाठ्यक्रम तक पूरा नहीं हो पाता है।
सरकार ने स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए ग्रेडिंग व्यवस्था लागू कर दी है। ग्रेडिंग से ही शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी। इसमें 80 फीसदी से अधिक नंबर वाले स्कूल ए श्रेणी में तो 34 फीसदी वाले एफ श्रेणी में आएंगे। अलग-अलग पांच श्रेणियों से स्कूलों में पढ़ाई का मूल्यांकन होगा। एकल स्कूलों के शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय से रिक्त पदों पर शिक्षकों की तैनाती की मांग की है। शिक्षकों ने कहा कि रिक्त पदों पर तैनाती नहीं हुई तो ग्रेडिंग प्रभावित होगी और ठीकरा उनके सिर फूटेगा।
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- शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। कुछ स्कूल एकल संचालित हो रहे हैं। कइयों में एक शिक्षक के साथ शिक्षा मित्र तैनात हैं। फरवरी से पहले शिक्षकों की तैनाती संभव नहीं है। - योगेंद्र कुमार, बीएसए
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बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र के स्कूलों में छात्र नामांकन संख्या के मानक से अभी भी शिक्षकों का संकट है। कई स्कूल एकल संचालित हो रहे हैं। जबकि कइयों में शिक्षा मित्र हैं। फरवरी में लर्निंग कम आउट के आधार पर स्कूलों की ग्रेडिंग होनी है। ग्रेडिंग के लिए बच्चों की परीक्षा होगी। ग्रेडिंग को लेकर शिक्षकों के साथ बच्चे भी दबाव में हैं।
ग्रामीण और नगर क्षेत्र में शिक्षकों की तैनाती के अलग-अलग मानक हैं। शहरी क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में छात्र संख्या के हिसाब से शिक्षकों की तैनाती नहीं है। नवाबपुरा बालक और मऊ समेत कई स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे हैं। शिक्षक के बीमार पड़ने या फिर किसी कारण अवकाश पर रहने से स्कूल बंद रहते हैं। कई स्कूलों में एक शिक्षक के साथ एक शिक्षा मित्र हैं। जबकि स्कूलों में छात्र संख्या अधिक है। एकल शिक्षक को ही सभी कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पढ़ता है और पाठ्यक्रम तक पूरा नहीं हो पाता है।
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सरकार ने स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए ग्रेडिंग व्यवस्था लागू कर दी है। ग्रेडिंग से ही शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी। इसमें 80 फीसदी से अधिक नंबर वाले स्कूल ए श्रेणी में तो 34 फीसदी वाले एफ श्रेणी में आएंगे। अलग-अलग पांच श्रेणियों से स्कूलों में पढ़ाई का मूल्यांकन होगा। एकल स्कूलों के शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय से रिक्त पदों पर शिक्षकों की तैनाती की मांग की है। शिक्षकों ने कहा कि रिक्त पदों पर तैनाती नहीं हुई तो ग्रेडिंग प्रभावित होगी और ठीकरा उनके सिर फूटेगा।
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- शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। कुछ स्कूल एकल संचालित हो रहे हैं। कइयों में एक शिक्षक के साथ शिक्षा मित्र तैनात हैं। फरवरी से पहले शिक्षकों की तैनाती संभव नहीं है। - योगेंद्र कुमार, बीएसए