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फिर से हाईकोर्ट पहुंचा मुरादाबाद क्लब का विवाद
Updated Wed, 20 Jun 2018 02:16 AM IST
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मुरादाबाद।
मुरादाबाद क्लब का विवाद एक बार फिर से हाईकोर्ट पहुंच गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने क्लब को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड में तब्दील करने के आदेश दिए थे। इन आदेशों का पालन नहीं होने की वजह से क्लब के पूर्व सदस्यों ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की है। इन सदस्यों का नाम कमेटी द्वारा कुछ समय पहले क्लब की सदस्यता सूची से हटा दिया गया था।
मुरादाबाद क्लब में सदस्यता को लेकर पिछले कई वर्षों से विवाद है। वर्ष 2014 से कमेटी का चुनाव भी नहीं हुआ है। पूर्व में कमेटी ने कई सदस्यों की सदस्यता खत्म कर दी थी। कमेटी के मतदान में चुनाव का अधिकार सिर्फ पुराने 50 सदस्यों तक सीमित रखा गया था। इन सभी विवादाें को लेकर कुछ पूर्व सदस्य नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में पहुंचे थे। एनसीएलटी ने क्लब को प्राइवेट लिमिटेड से बदलकर पब्लिक लिमिटेड के रूप में संचालित करने का आदेश दिया था। कार्पोंरेट कार्य मंत्रालय ने भी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और जिला प्रशासन को तलब करके इस मामले में कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
कार्पोरेट कार्य मंत्रालय का आदेश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने क्लब को टेकओवर करने की प्रक्रिया शुरू की थी। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर से इसके लिए टीम नियुक्त नहीं किए जाने की वजह से इस प्रक्रिया को बीच में ही रोक देना पड़ा। सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह ने बताया कि क्लब को पब्लिक लिमिटेड में तब्दील करने और टेकओवर करने की प्रक्रिया रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के स्तर पर पूरी होनी थी। जिला प्रशासन को उसमें सहयोग करना था। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि क्लब को पब्लिक लिमिटेड में तब्दील नहीं किए जाने पर कुछ पूर्व सदस्यों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है।
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मुरादाबाद क्लब का विवाद एक बार फिर से हाईकोर्ट पहुंच गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने क्लब को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड में तब्दील करने के आदेश दिए थे। इन आदेशों का पालन नहीं होने की वजह से क्लब के पूर्व सदस्यों ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की है। इन सदस्यों का नाम कमेटी द्वारा कुछ समय पहले क्लब की सदस्यता सूची से हटा दिया गया था।
मुरादाबाद क्लब में सदस्यता को लेकर पिछले कई वर्षों से विवाद है। वर्ष 2014 से कमेटी का चुनाव भी नहीं हुआ है। पूर्व में कमेटी ने कई सदस्यों की सदस्यता खत्म कर दी थी। कमेटी के मतदान में चुनाव का अधिकार सिर्फ पुराने 50 सदस्यों तक सीमित रखा गया था। इन सभी विवादाें को लेकर कुछ पूर्व सदस्य नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में पहुंचे थे। एनसीएलटी ने क्लब को प्राइवेट लिमिटेड से बदलकर पब्लिक लिमिटेड के रूप में संचालित करने का आदेश दिया था। कार्पोंरेट कार्य मंत्रालय ने भी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और जिला प्रशासन को तलब करके इस मामले में कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
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कार्पोरेट कार्य मंत्रालय का आदेश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने क्लब को टेकओवर करने की प्रक्रिया शुरू की थी। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर से इसके लिए टीम नियुक्त नहीं किए जाने की वजह से इस प्रक्रिया को बीच में ही रोक देना पड़ा। सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह ने बताया कि क्लब को पब्लिक लिमिटेड में तब्दील करने और टेकओवर करने की प्रक्रिया रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के स्तर पर पूरी होनी थी। जिला प्रशासन को उसमें सहयोग करना था। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि क्लब को पब्लिक लिमिटेड में तब्दील नहीं किए जाने पर कुछ पूर्व सदस्यों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है।
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