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मुरादाबाद से रहा है बापू का गहरा नाता

Tue, 02 Oct 2018 02:24 AM IST
Updated Tue, 02 Oct 2018 02:24 AM IST
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मुरादाबाद से रहा है बापू का गहरा नाता
मुरादाबाद।
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स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में मुरादाबाद का प्रमुखता से नाम लिया जाता है। महात्मा गांधी का भी यहां से विशेष लगाव रहा है। इसका महत्व इसी बात से आंका जा सकता है सितंबर वर्ष 1920 में डॉ. भगवान दास की अध्यक्षता में मुरादाबाद में एक सम्मेलन हुआ, जिसमें महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय, पंडित मोती लाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. अंसारी, हकीम अजमत खां, मौलाना मोहम्मद अली, शौकत अली आदि पधारे थे और असहयोग प्रस्ताव पास हुआ। इस प्रकार मुरादाबाद से ही इस आंदोलन की नींव पड़ी। इसके अलावा गांधी जी के नमक सत्याग्रह, व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में यहां के जांबाजों ने अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया था। आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहने की वजह से गांधी जी ने बैठकों और परिचर्चा के लिए ब्रज रतन पुस्तकालय की स्थापना की थी।
अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के जिला अध्यक्ष इशरत उल्ला खान ने बताया कि महात्मा गांधी एक बार कलकत्ता जा रहे थे। जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची तो वहां शहर भर से लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। स्वर्गीय कुसुम सिंघल जो उस वक्त बालिका थीं, गांधी जी से मिलने गई थीं। छोटी बच्ची होने के कारण कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने उन्हें आगे बढ़ाया। गांधी ने उन्हें खूब दुलार किया था।
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पहले मंडी बांस और वर्तमान में दीन दयाल नगर निवासी महेंद्र कुमार ने बताया कि गांधी जी पान का दरीबा के पास साहू रघुवीर सरन खत्री के घर रुके थे और उन्हीं की बग्घी में सवार होकर ब्रज रतन पुस्तकालय के उद्घाटन में आए थे। मेरे पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मास्टर रामकुमार की ब्रज रतन पुस्तकालय के पास दुकान किताबों की थी। उनकी बग्घी रोककर टीका दिया था। उस वक्त 11 सौ रुपये दान दिए थे। पूरे बाजार में पैर रखने के लिए जगह नहीं थी। वह दिव्य पुरुष थे। पिता जी महात्मा गांधी के अलावा पंडित गोविंद बल्लभ पंत आदि के साथ रहे। वह ताउम्र कांग्रेस पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष रहे। महात्मा गांधी के आह्वान पर नमक आंदोलन गिरफ्तारियां दीं और स्वदेशी आंदोलन को सफल बनाने के लिए विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी।
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