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दहलीज पर नहीं मोबाइल पर दे रहे दस्तक
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मुरादाबाद। बात बहुत पुरानी नहीं.. कुछ चुनाव पहले तक पार्टियों के एजेंट लोगों के घरों में बैठकर ही हारजीत तय कर लिया करते थे। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से लेकर बूथों तक घर की महिलाओं-पुरुषों को पहुंचाने की जिम्मेदारी यही एजेंट निभाया करते थे। सांसद प्रत्याशी को अपने मोहल्लों में लाकर घरों की कुंडी खटखटाकर जनसंपर्क कराया जाता था। पूरे चुनाव हाथ जोड़े विभिन्न पार्टियों के यह एजेंट अपनी पार्टी के पक्ष में वोट देने की मान मनौव्वर करते नजर आते थे। पार्टी कोई भी हो, अब यह एजेंट गायब हो गए हैं। मोबाइल पर मेसेज ही एजेंटों की भूमिका अदा किया कर रहा है। लोगों के मोबाइल पर आने वाले मेसेज में सांसद प्रत्याशी की बढ़ाई और विरोधी प्रत्याशी की बुराई लिखकर भेज रहे हैं। शहर के मौजिज लोगों की माने तो नेता जी ही घरों तक नहीं आते तो एजेंट क्यों सक्रिय होने लगे।
नागफनी के दसवां घाट के पास रहने वाले अमित शर्मा के मुताबिक पहले चुनावों में विभिन्न पार्टियों के एजेंट घरों में पहले ही आकर मतदाता पर्ची बनाने, निर्वाचन लिस्ट में नाम देखने के साथ मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट देने की पहल करते थे। ऐन मौके तक घरों से लोगों को निकालकर पोलिंग बूथ तक लेकर आते थे। लेकिन अब चुनाव प्रचार से लेकर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के सभी तरीके डिजिटल हो चुके हैं।
पार्टी कोई भी हो, एजेंट आते थे। हमसे पूछा जाता था कि मतदाता लिस्ट में नाम है कि नहीं। नहीं होने पर जुड़वाने से लेकर मतदान कराने की जिम्मेदारी भी निभाते थे। - मोहनलाल प्रजापति, मतदाता
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नेताजी नहीं आते। उनकी पार्टी के एजेंट भी नहीं आते। मोबाइल पर मेसेज जरूर आते है कि वोट हमें ही दें। पहले चुनावों में रौनक हुआ करती थी। - राजपाल, मतदाता
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नागफनी के दसवां घाट के पास रहने वाले अमित शर्मा के मुताबिक पहले चुनावों में विभिन्न पार्टियों के एजेंट घरों में पहले ही आकर मतदाता पर्ची बनाने, निर्वाचन लिस्ट में नाम देखने के साथ मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट देने की पहल करते थे। ऐन मौके तक घरों से लोगों को निकालकर पोलिंग बूथ तक लेकर आते थे। लेकिन अब चुनाव प्रचार से लेकर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के सभी तरीके डिजिटल हो चुके हैं।
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पार्टी कोई भी हो, एजेंट आते थे। हमसे पूछा जाता था कि मतदाता लिस्ट में नाम है कि नहीं। नहीं होने पर जुड़वाने से लेकर मतदान कराने की जिम्मेदारी भी निभाते थे। - मोहनलाल प्रजापति, मतदाता
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नेताजी नहीं आते। उनकी पार्टी के एजेंट भी नहीं आते। मोबाइल पर मेसेज जरूर आते है कि वोट हमें ही दें। पहले चुनावों में रौनक हुआ करती थी। - राजपाल, मतदाता