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ई-डस्ट को तटबंध बनाकर भरा जाए
Updated Wed, 18 Jul 2018 02:20 AM IST
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मुरादाबाद।
एनजीटी ने रामगंगा किनारे की ई-डस्ट को डंप करने के लिए एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही नगर निगम और सिंचाई विभाग को रामगंगा किनारे की ई-डस्ट के मामले में पार्टी बना लिया गया है। इससे कार्रवाई प्रभावी हो सकेगी।
रामगंगा किनारे सैकड़ों टन जहरीली ई-डस्ट पड़ी हुई है। इससे रामगंगा और उसकेसाथ ही गंगा जहरीली हो रही है। महानगर के बड़े हिस्से पर जहरीली डस्ट का असर पड़ रहा है। इसकेधूल में उड़ने से हवा में जहरीले रसायन मिल रहे हैं। इसका मामला एनजीटी में विचाराधीन है। अबकी बार एनजीटी ने अधिकारियों को कड़े तेवर दिखाते हुए कार्रवाई करने को कहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार ई-डस्ट को सड़कों के फ्लाईओवर निर्माण में डंप किया जाए। इसकी रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक सप्ताह में एनजीटी को देगा। यदि विशेषज्ञ फ्लाई ओर में ई-डस्ट को डंप करने की अनुमति नहीं देते हैं तो रामगंगा किनारे तटबंध बनाया जाए। 20 फीट चौड़ा और 30 फीट गहरा कंक्रीट का सुरक्षित तटबंध बनाकर डस्ट को उसमें भर दिया जाए। जहां-जहां डस्ट पड़ी है, वहीं पर तटबंध बना दिया जाए। इससे अतिक्रमण भी रुक सकेगा। इसकेसाथ ही एनजीटी ने नगर निगम और सिंचाई विभाग को भी ई-डस्ट केमामले मेें पार्टी बना लिया। इससे रामगंगा को सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकेगी।
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एनजीटी ने रामगंगा किनारे की ई-डस्ट को डंप करने के लिए एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही नगर निगम और सिंचाई विभाग को रामगंगा किनारे की ई-डस्ट के मामले में पार्टी बना लिया गया है। इससे कार्रवाई प्रभावी हो सकेगी।
रामगंगा किनारे सैकड़ों टन जहरीली ई-डस्ट पड़ी हुई है। इससे रामगंगा और उसकेसाथ ही गंगा जहरीली हो रही है। महानगर के बड़े हिस्से पर जहरीली डस्ट का असर पड़ रहा है। इसकेधूल में उड़ने से हवा में जहरीले रसायन मिल रहे हैं। इसका मामला एनजीटी में विचाराधीन है। अबकी बार एनजीटी ने अधिकारियों को कड़े तेवर दिखाते हुए कार्रवाई करने को कहा है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार ई-डस्ट को सड़कों के फ्लाईओवर निर्माण में डंप किया जाए। इसकी रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक सप्ताह में एनजीटी को देगा। यदि विशेषज्ञ फ्लाई ओर में ई-डस्ट को डंप करने की अनुमति नहीं देते हैं तो रामगंगा किनारे तटबंध बनाया जाए। 20 फीट चौड़ा और 30 फीट गहरा कंक्रीट का सुरक्षित तटबंध बनाकर डस्ट को उसमें भर दिया जाए। जहां-जहां डस्ट पड़ी है, वहीं पर तटबंध बना दिया जाए। इससे अतिक्रमण भी रुक सकेगा। इसकेसाथ ही एनजीटी ने नगर निगम और सिंचाई विभाग को भी ई-डस्ट केमामले मेें पार्टी बना लिया। इससे रामगंगा को सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकेगी।
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