{"_id":"5ce0602fbdec22072925630f","slug":"11558208559-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मासूम से दुष्कर्म में दोषी को दस साल की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मासूम से दुष्कर्म में दोषी को दस साल की कैद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद। मझोला के दो वर्ष पुराने पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में एडीजे आठ / विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) संजीव कुमार त्यागी की अदालत ने मुलजिम प्रमोद को दोषी करार देते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई है, जबकि बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता एमपी सिंह ने बताया कि मझोला थाने में मझोला क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 10 मई 2017 को प्रमोद निवासी मिलन विहार थाना मझोला के खिलाफ पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट, एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज कराया था। वादी ने बताया था कि उसकी पांच वर्षीय पोती घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी प्रमोद बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने अपने घर ले गया था। आरोपी ने बच्ची का मुंह दबाकर उसके साथ दुष्कर्म किय। बच्ची अपने घर पहुंची तो वह खून से लथपथ थी। बच्ची की दादी ने जब उससे पूछताछ की तो उसने अपने साथ घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन बच्ची को लेकर थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कराया था। मझोला पुलिस ने इस केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद आरोपी प्रमोद के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आठ/ विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) संजीव कुमार त्यागी की अदालत में चली। जिसमें अभियोजन पक्ष से एडीजीसी एमपी सिंह पक्ष रखा और मुलजिम को सजा दिलाने के लिए दलीलें दीं। बहस के दौरान अभियुक्त पक्ष से अधिवक्ता ने तर्क रखा कि अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। इसलिए उसे कम से कम सजा से दंडित किया जाए। अभियोजन पक्ष की ओर से उपरोक्त तर्क का विरोध किया गया और यह कहा गया कि अभियुक्त द्वारा पांच वर्षीय अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध किया गया है। इस लिए उसे अधिक से अधिक दंड से दंडित किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुलजिम प्रमोद को दोषी करार देते हुए दस साल की कैद और बीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। जुर्माना की धनराशि जमा न करने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने ये भी आदेश दिए कि जुर्माना की धनराशि में 18 हजार रुपये पीड़िता के दादा को दिए जाएं।
विज्ञापन
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता एमपी सिंह ने बताया कि मझोला थाने में मझोला क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 10 मई 2017 को प्रमोद निवासी मिलन विहार थाना मझोला के खिलाफ पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट, एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज कराया था। वादी ने बताया था कि उसकी पांच वर्षीय पोती घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी प्रमोद बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने अपने घर ले गया था। आरोपी ने बच्ची का मुंह दबाकर उसके साथ दुष्कर्म किय। बच्ची अपने घर पहुंची तो वह खून से लथपथ थी। बच्ची की दादी ने जब उससे पूछताछ की तो उसने अपने साथ घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन बच्ची को लेकर थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कराया था। मझोला पुलिस ने इस केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद आरोपी प्रमोद के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आठ/ विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) संजीव कुमार त्यागी की अदालत में चली। जिसमें अभियोजन पक्ष से एडीजीसी एमपी सिंह पक्ष रखा और मुलजिम को सजा दिलाने के लिए दलीलें दीं। बहस के दौरान अभियुक्त पक्ष से अधिवक्ता ने तर्क रखा कि अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। इसलिए उसे कम से कम सजा से दंडित किया जाए। अभियोजन पक्ष की ओर से उपरोक्त तर्क का विरोध किया गया और यह कहा गया कि अभियुक्त द्वारा पांच वर्षीय अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध किया गया है। इस लिए उसे अधिक से अधिक दंड से दंडित किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुलजिम प्रमोद को दोषी करार देते हुए दस साल की कैद और बीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। जुर्माना की धनराशि जमा न करने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने ये भी आदेश दिए कि जुर्माना की धनराशि में 18 हजार रुपये पीड़िता के दादा को दिए जाएं।
विज्ञापन