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प्रकृति की रक्षा का महापर्व है छठ
Updated Sun, 11 Nov 2018 02:01 AM IST
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मुरादाबाद। छठ महापर्व केवल देवी शक्ति के पूजन का ही नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा व सदुपयोग का अहसास भी कराता है। छठ पूजन में प्रयुक्त होने वाले सभी पदार्थ और इसमें अपनाई जाने वाली विधियां कदम-कदम पर प्रकृति से जुड़ी हैं।
मानव विकास के साथ ही प्रकृति से जुड़ता गया। इसके चलते प्रकृति की रक्षा का संकल्प लोगों की आस्था बनकर सामने आया। पर्यावरण की सुरक्षा को लोगों ने धर्म और पर्व के साथ जोड़कर उनकी रक्षा को शाश्वत बना दिया। ऐसा ही छठ पूजन के साथ भी है। छठ पूजन में प्रयुक्त होने वाले सामान में कोई भी औद्योगिक नहीं है। ये सभी घरेलू और प्राकृतिक हैं। मसलन सूप (छाज) , गन्ना, केला, चना, चावल, धान, लौकी, गुड़, गन्ना और फल मुख्यत: छठ पूजन में प्रयोग किए जाते हैं। छठ पूजन में सबसे ज्यादा जरूरत जल स्रोत यानि नदी या तालाब की होती है। इससे लोगों को प्रकृति और जल संसाधनों की सुरक्षा का संदेश मिलता है। जल स्रोतों को साफ रखने का संदेश भी छठ महापर्व देता है। इसके साथ ही छठ महापर्व का मुख आधार है शक्ति स्वरूपा छठ मैय्या की आराधना। यह पर्व महिलाओं के अक्षत सुहाग, समृद्ध परिवार और सुखी संसार से जुड़ा है। पूर्वांचल सेवा समिति के पदाधिकारी परमजीत सिंह ने बताया कि छठ महापर्व आध्यात्मिक और प्राकृतिक शक्तियों के सामूहिक पूजन का प्रतीक है। यही कारण है कि अब इसको देश के सभी भागों में मनाया जाने लगा है।
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मानव विकास के साथ ही प्रकृति से जुड़ता गया। इसके चलते प्रकृति की रक्षा का संकल्प लोगों की आस्था बनकर सामने आया। पर्यावरण की सुरक्षा को लोगों ने धर्म और पर्व के साथ जोड़कर उनकी रक्षा को शाश्वत बना दिया। ऐसा ही छठ पूजन के साथ भी है। छठ पूजन में प्रयुक्त होने वाले सामान में कोई भी औद्योगिक नहीं है। ये सभी घरेलू और प्राकृतिक हैं। मसलन सूप (छाज) , गन्ना, केला, चना, चावल, धान, लौकी, गुड़, गन्ना और फल मुख्यत: छठ पूजन में प्रयोग किए जाते हैं। छठ पूजन में सबसे ज्यादा जरूरत जल स्रोत यानि नदी या तालाब की होती है। इससे लोगों को प्रकृति और जल संसाधनों की सुरक्षा का संदेश मिलता है। जल स्रोतों को साफ रखने का संदेश भी छठ महापर्व देता है। इसके साथ ही छठ महापर्व का मुख आधार है शक्ति स्वरूपा छठ मैय्या की आराधना। यह पर्व महिलाओं के अक्षत सुहाग, समृद्ध परिवार और सुखी संसार से जुड़ा है। पूर्वांचल सेवा समिति के पदाधिकारी परमजीत सिंह ने बताया कि छठ महापर्व आध्यात्मिक और प्राकृतिक शक्तियों के सामूहिक पूजन का प्रतीक है। यही कारण है कि अब इसको देश के सभी भागों में मनाया जाने लगा है।
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