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आरबीआई से पूछा...कहां रखें सिक्के
Updated Thu, 28 Jun 2018 02:16 AM IST
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मुरादाबाद।
जेबों में खनखनाने वाले सिक्के अब बाजार में सामान खरीदने से लेकर बैंकों में जमा करने तक उपभोक्ता और बैंक अधिकारियों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। उपभोक्ता जहां बैंकों के सिक्के लेने में आनाकानी की बात कह रहे हैं तो वहीं, बैंक अधिकारियों का कहना है कि अब सिक्के रखने की जगह ही नहीं बची है। इसके लिए आरबीआई को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है।
बैंक में सिक्कों के डंप होने का सिलसिला जारी है। एक बार जो सिक्के बैंक पहुंच गए, उन्हें फिर ग्राहक लेना पसंद नहीं करते हैं। ग्राहकों का कहना है कि परचून, डेयरी और सब्जी खरीदने में सबसे ज्यादा दो, पांच और दस के सिक्कों का प्रयोग होता है, लेकिन दुकानदार सिक्कों के बजाय नोट की मांग करते हैं। सिक्कों के आकार की वजह से नकली-असली की समस्या भी उत्पन्न हो रही है। वहीं, दुकानदार बैंक में जमा करने वाली परेशानी का हवाला दे रहे हैं।
कितने आकार, नहीं पता
दो, पांच और दस के सिक्कों में रंग, धातु के अलावा आकार का भी अंतर होता है। जहां एक और दो के सिक्के आकार में एक जैसे होते हैं तो वहीं पांच के सिक्के अलग-अलग धातुओं में आ रहे हैं। दस के सिक्कों में डिजाइन का अंतर है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि सिक्के जारी करने का अलग-अलग वर्ष के होने की वजह से वह कितने प्रकार के हैं, इसकी जानकारी नहीं है।
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आरबीआई की गाइड लाइन
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइंस के मुताबिक एक दिन में एक ग्राहक बैंक में एक हजार रुपये तक के सिक्के जमा कर सकेगा। इसे लेने से बैंक इन्कार नहीं कर सकते हैं।
वर्जन...
मुझे मोबाइल में रिचार्ज करवाना था। इंपीरियल तिराहे पर जब मैंने दस-दस के पांच सिक्के दिए तो दुकानदार ने सिक्के लेने से इन्कार करते हुए नोट देने को कहा। बाद में दूसरे दुकानदार से लेकर उसे नोट दिया।
सुमित कुमार।
परचून की दुकान है। सिक्के से ही ज्यादा लेनदेन होता है। दिल्ली रोड स्थिति एक शाखा में बैंक अधिकारी जमा नहीं करते और ग्राहक को दें तो वह जेब से गिरने का बहाना बनाकर मना कर देते हैं। इससे हमें परेशानी होती है।
शनि कुमार, दुकानदार।
सिक्के बाजार में चलन के लिए होते हैं। फिर भी नियम की वजह से जमा करने पड़ते हैं। चेस्ट में सिक्के रखने की जगह नहीं है, इसलिए शाखाओं में ही सिक्के जमा हैं। आरबीआई को पत्र लिखकर उनके रखने की जगह पूछी है। अभी तक जवाब नहीं मिला है।
यूके शर्मा, करेंसी चेस्ट इंचार्ज, प्रथमा बैंक।
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जेबों में खनखनाने वाले सिक्के अब बाजार में सामान खरीदने से लेकर बैंकों में जमा करने तक उपभोक्ता और बैंक अधिकारियों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। उपभोक्ता जहां बैंकों के सिक्के लेने में आनाकानी की बात कह रहे हैं तो वहीं, बैंक अधिकारियों का कहना है कि अब सिक्के रखने की जगह ही नहीं बची है। इसके लिए आरबीआई को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है।
बैंक में सिक्कों के डंप होने का सिलसिला जारी है। एक बार जो सिक्के बैंक पहुंच गए, उन्हें फिर ग्राहक लेना पसंद नहीं करते हैं। ग्राहकों का कहना है कि परचून, डेयरी और सब्जी खरीदने में सबसे ज्यादा दो, पांच और दस के सिक्कों का प्रयोग होता है, लेकिन दुकानदार सिक्कों के बजाय नोट की मांग करते हैं। सिक्कों के आकार की वजह से नकली-असली की समस्या भी उत्पन्न हो रही है। वहीं, दुकानदार बैंक में जमा करने वाली परेशानी का हवाला दे रहे हैं।
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कितने आकार, नहीं पता
दो, पांच और दस के सिक्कों में रंग, धातु के अलावा आकार का भी अंतर होता है। जहां एक और दो के सिक्के आकार में एक जैसे होते हैं तो वहीं पांच के सिक्के अलग-अलग धातुओं में आ रहे हैं। दस के सिक्कों में डिजाइन का अंतर है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि सिक्के जारी करने का अलग-अलग वर्ष के होने की वजह से वह कितने प्रकार के हैं, इसकी जानकारी नहीं है।
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आरबीआई की गाइड लाइन
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइंस के मुताबिक एक दिन में एक ग्राहक बैंक में एक हजार रुपये तक के सिक्के जमा कर सकेगा। इसे लेने से बैंक इन्कार नहीं कर सकते हैं।
वर्जन...
मुझे मोबाइल में रिचार्ज करवाना था। इंपीरियल तिराहे पर जब मैंने दस-दस के पांच सिक्के दिए तो दुकानदार ने सिक्के लेने से इन्कार करते हुए नोट देने को कहा। बाद में दूसरे दुकानदार से लेकर उसे नोट दिया।
सुमित कुमार।
परचून की दुकान है। सिक्के से ही ज्यादा लेनदेन होता है। दिल्ली रोड स्थिति एक शाखा में बैंक अधिकारी जमा नहीं करते और ग्राहक को दें तो वह जेब से गिरने का बहाना बनाकर मना कर देते हैं। इससे हमें परेशानी होती है।
शनि कुमार, दुकानदार।
सिक्के बाजार में चलन के लिए होते हैं। फिर भी नियम की वजह से जमा करने पड़ते हैं। चेस्ट में सिक्के रखने की जगह नहीं है, इसलिए शाखाओं में ही सिक्के जमा हैं। आरबीआई को पत्र लिखकर उनके रखने की जगह पूछी है। अभी तक जवाब नहीं मिला है।
यूके शर्मा, करेंसी चेस्ट इंचार्ज, प्रथमा बैंक।