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योग दिवस : संघ को 'अछूत' मानने वाले झूमे संघ के गीतों पर
Updated Thu, 22 Jun 2017 08:39 PM IST
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योग से शुरू हुआ बदलाव का दौर..संकेत कुछ और
मंत्री से संतरी तक सबने वेद मंत्रों के साथ किया आसन
नगेश शर्मा
मुरादाबाद।
योग दिवस का आयोजन राजनीति से कोसोें दूर है, लेकिन मंत्री से लेकर संतरी तक का एक पंक्ति में खड़े होकर वेद मंत्रों के साथ आसन की मुद्रा में दिखाई देना कुछ अलग संकेत तो दे ही रहा है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि देश की राह किसी बडे़ बदलाव की ओर हो। कारण साफ है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक घंटे की शाखा में देश भक्ति और शारीरिक पुष्ठता की जो शिक्षा दी जाती है साल में एक बार ही सही, लेकिन पूरा देश योग के नाम पर पंक्तिबद्ध खड़ा हो जाता है। मोदी और योगी सरकार के अधिकांश मंत्री ऐसे हैं जो संघ की शाखा में गए होंगे, लेकिन उन अधिकारियों की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है जो संघ को ‘अछूत’ मानकार बचते रहे पर अब संघ के गीतों पर झूम रहे हैं।
सोनकपुर स्टेडियम में जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने योग शिविर का उद्घाटन किया। मंत्री को वेद-मंत्रों की अच्छी जानकारी है, इसका पता उस समय चला जब उन्होंने मंच से कुछ देर का संबोधन किया। इसी तरह कमिश्नर एम वेंक्टेश्वर लू को आध्यात्मिक भाषण के लिए ही जाना जाने लगा है। लोग तो उनके भाषण को प्रवचन कहने लगे हैं, जैसा कि हाल ही में जीएसटी की सेमिनार में उनका उद्बोधन था। जीएसटी से ज्यादा आध्यात्म पर ही उनका संबोधन केंद्रित था। यह बातें अब ज्यादा महत्व इसलिए दे रही हैं, क्योंकि प्रदेश की सरकार का मुखिया एक योगी है। ऐसे में ब्यूरोक्रेसी के रुख में बदलाव बड़ी बात नहीं है।
स्टेडियम में प्रशासनिक अमले के अलावा नगर निगम, विकास भवन, स्वास्थ्य, पूर्ति विभाग, लोनिवि, एमडीए समेत लगभग सभी सरकारी महकमों के मुखिया मौजूद थे। बहुत से अधिकारी ऐसे थे जो मंच के मार्गदर्शन के अनुसार बैठने, खड़े होने, पीछे झुकने, आगे झुकने में बड़ा असहज महसूस कर रहे थे। लग रहा था कि सरकारी फरमान के कारण ही वह वहां मौजूद थे, योग में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। अगर इसे सही मान लें तो क्या यह किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं।
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शाखा के गीतों पर बही देशभक्ति की बयार
मुरादाबाद। उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, पुकारता है देश, पुकारती मां भारती। हो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयार, अगर देश के काम न आए तो जीवन बेकार। इस तरह के अन्य गीत भी योग शिविर के स्थल पर बज रहे थे। संघ की शाखा में भी ऐसे ही गीत बच्चे गाते-सुनाते हैं। स्टेडियम में योग शिविर का शुभारंभ भी इन्हीं गीतों से हुआ। इसके अतिरिक्त जो भी आसन हुए सभी वेद-मंत्रों पर आधारित थे। लोगों ने पहले मंत्र बोला फिर योग की क्रिया की। कभी एक पैर पर खड़ा होना पड़ा तो कभी सिर को घुटनों से छुलाया। जैसा आसन वैसी क्रिया की। शिविर में ताड़ासन, शिथिलीकरण अभ्यास, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, शशांकासन, उतानमंडूकासन, वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन, कपाल भाति, अनुलोम विलोम के साथ प्राणायाम व ध्यान क्रियाएं कराई र्गइं। सभी ने एक स्वर में ऊं संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसीजानातम देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते।। ऊं सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:। सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद् दु:खभाग्भवेत्।। मंत्र बोले।
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मंत्री से संतरी तक सबने वेद मंत्रों के साथ किया आसन
नगेश शर्मा
मुरादाबाद।
योग दिवस का आयोजन राजनीति से कोसोें दूर है, लेकिन मंत्री से लेकर संतरी तक का एक पंक्ति में खड़े होकर वेद मंत्रों के साथ आसन की मुद्रा में दिखाई देना कुछ अलग संकेत तो दे ही रहा है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि देश की राह किसी बडे़ बदलाव की ओर हो। कारण साफ है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक घंटे की शाखा में देश भक्ति और शारीरिक पुष्ठता की जो शिक्षा दी जाती है साल में एक बार ही सही, लेकिन पूरा देश योग के नाम पर पंक्तिबद्ध खड़ा हो जाता है। मोदी और योगी सरकार के अधिकांश मंत्री ऐसे हैं जो संघ की शाखा में गए होंगे, लेकिन उन अधिकारियों की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है जो संघ को ‘अछूत’ मानकार बचते रहे पर अब संघ के गीतों पर झूम रहे हैं।
सोनकपुर स्टेडियम में जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने योग शिविर का उद्घाटन किया। मंत्री को वेद-मंत्रों की अच्छी जानकारी है, इसका पता उस समय चला जब उन्होंने मंच से कुछ देर का संबोधन किया। इसी तरह कमिश्नर एम वेंक्टेश्वर लू को आध्यात्मिक भाषण के लिए ही जाना जाने लगा है। लोग तो उनके भाषण को प्रवचन कहने लगे हैं, जैसा कि हाल ही में जीएसटी की सेमिनार में उनका उद्बोधन था। जीएसटी से ज्यादा आध्यात्म पर ही उनका संबोधन केंद्रित था। यह बातें अब ज्यादा महत्व इसलिए दे रही हैं, क्योंकि प्रदेश की सरकार का मुखिया एक योगी है। ऐसे में ब्यूरोक्रेसी के रुख में बदलाव बड़ी बात नहीं है।
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स्टेडियम में प्रशासनिक अमले के अलावा नगर निगम, विकास भवन, स्वास्थ्य, पूर्ति विभाग, लोनिवि, एमडीए समेत लगभग सभी सरकारी महकमों के मुखिया मौजूद थे। बहुत से अधिकारी ऐसे थे जो मंच के मार्गदर्शन के अनुसार बैठने, खड़े होने, पीछे झुकने, आगे झुकने में बड़ा असहज महसूस कर रहे थे। लग रहा था कि सरकारी फरमान के कारण ही वह वहां मौजूद थे, योग में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। अगर इसे सही मान लें तो क्या यह किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं।
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शाखा के गीतों पर बही देशभक्ति की बयार
मुरादाबाद। उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, पुकारता है देश, पुकारती मां भारती। हो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयार, अगर देश के काम न आए तो जीवन बेकार। इस तरह के अन्य गीत भी योग शिविर के स्थल पर बज रहे थे। संघ की शाखा में भी ऐसे ही गीत बच्चे गाते-सुनाते हैं। स्टेडियम में योग शिविर का शुभारंभ भी इन्हीं गीतों से हुआ। इसके अतिरिक्त जो भी आसन हुए सभी वेद-मंत्रों पर आधारित थे। लोगों ने पहले मंत्र बोला फिर योग की क्रिया की। कभी एक पैर पर खड़ा होना पड़ा तो कभी सिर को घुटनों से छुलाया। जैसा आसन वैसी क्रिया की। शिविर में ताड़ासन, शिथिलीकरण अभ्यास, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, शशांकासन, उतानमंडूकासन, वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन, कपाल भाति, अनुलोम विलोम के साथ प्राणायाम व ध्यान क्रियाएं कराई र्गइं। सभी ने एक स्वर में ऊं संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसीजानातम देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते।। ऊं सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:। सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद् दु:खभाग्भवेत्।। मंत्र बोले।