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प्रदूषण से छोटे पौधों की जान पर खतरा
Updated Sun, 04 Nov 2018 03:01 AM IST
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मुरादाबाद। प्रदूषण के मानक से कई गुना होने और लगातार बने रहने से लोगों के साथ ही पौधों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। छोटे पौधों को तो बचाना ही मुश्किल हो जाएगा। पौधों को सबसे ज्यादा परेशानी भाजन कम मिलने से हो रही है। पत्तियों पर धूल कणों के जम जाने और प्रकाश की तीव्रता कम होने से प्रकाश संस्लेशण की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे पौधों का विकास रुक जाता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर पौधों की मौत हो जाती है।
दिल्ली-एनसीआर के साथ ही मुरादाबाद मंडल में प्रदूषण मानक से कई गुना ज्यादा चल रहा है। वातावरण की स्थिति गैस चैंबर जैसी हो गई है। धूल और धुआं के कणों ने स्माग का रूप ले लिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के यंत्रों द्वारा हवा की जांच कुछ खास केंद्रों पर की जाती है। जबकि सड़कों के आसपास और इंडस्ट्रियल एरिया में इससे कई गुना ज्यादा प्रदूषण होता है। पर्यावरण वैज्ञानिक डा. विवेकराज सिंह के अनुसार पौधों पर हवा में मिली हानिकारक गैसों से ज्यादा नुकसान नहीं होता है। पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान पीएम-2.5, पीएम-10 और आयल के कणों से होता है। ये पौधों की पत्तियों पर जम जाते हैं। जिससे प्रकाश संस्लेषण की क्रिया बाधित होती है। पत्तियों पर परत जम जाने के साथ ही धूल और धुआं से प्रकाश की तीव्रता भी कम हो जाती है। इससे पौधों को जरूरत के अनुसार भोजन नहीं मिल पाता है। लगातार कम भोजन के चलते पौधे कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे पौधे सर्दियों में कोहरे-पाले से नहीं लड़ सकेंगे। इनसे सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे पौधे होते हैं।
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दिल्ली-एनसीआर के साथ ही मुरादाबाद मंडल में प्रदूषण मानक से कई गुना ज्यादा चल रहा है। वातावरण की स्थिति गैस चैंबर जैसी हो गई है। धूल और धुआं के कणों ने स्माग का रूप ले लिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के यंत्रों द्वारा हवा की जांच कुछ खास केंद्रों पर की जाती है। जबकि सड़कों के आसपास और इंडस्ट्रियल एरिया में इससे कई गुना ज्यादा प्रदूषण होता है। पर्यावरण वैज्ञानिक डा. विवेकराज सिंह के अनुसार पौधों पर हवा में मिली हानिकारक गैसों से ज्यादा नुकसान नहीं होता है। पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान पीएम-2.5, पीएम-10 और आयल के कणों से होता है। ये पौधों की पत्तियों पर जम जाते हैं। जिससे प्रकाश संस्लेषण की क्रिया बाधित होती है। पत्तियों पर परत जम जाने के साथ ही धूल और धुआं से प्रकाश की तीव्रता भी कम हो जाती है। इससे पौधों को जरूरत के अनुसार भोजन नहीं मिल पाता है। लगातार कम भोजन के चलते पौधे कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे पौधे सर्दियों में कोहरे-पाले से नहीं लड़ सकेंगे। इनसे सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे पौधे होते हैं।
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