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बाढ़ से बुनकरों का नुकसान, रोजगार प्रभावित

Fri, 02 Sep 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर Updated Fri, 02 Sep 2016 12:13 AM IST
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Weavers flood damage, affect employment
कोन ब्लॅाक के चील्ह में सूना पड़ा कालीन कारखाना।
एक पखवारे की बाढ़ ने गंगापार इलाके के कालीन बुनकरों को तोड़ कर रख दिया है। गांवों में कमर के ऊपर तक पानी पहुंचने के बाद बुनकरों की रोजी रोटी भी प्रभावित हो गई। जमीन पर गाड़े गए ताने पानी से भींग कर तबाह हो गए। आधे अधूूरे दरी कालीन को काटने से अब वह किसी काम का नहीं रह गया है। इससे बुनकर इन दिनों बेहद परेशान हैं। बुनकर अब प्रशासन की ओर क्षतिपूर्ति के लिए आशा भरी निगाह लगाये हुए हैं।
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गंगापार के कोन ब्लाक के दर्जनों गांवों में आठ से दस हजार बुनकर दरी और कालीन बुन कर अपनी आजीविका चलाते हैं। ये बुनकर कारपेट एक्सपोर्टरों से आर्डर के साथ काती और डोरा लेकर तय मजदूरी पर काम करते हैं। बारिश के दौरान आई बाढ़ से मैदानों में गाड़े गए ताने के भीग जाने के कारण तैयार माल को आधे में काट कर बचाना पड़ा इससे बुनकरों को खासा नुकसान हुआ है।
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अब एक्सपोर्टर उनसे तैयार माल की मांग कर रहे हैं या फिर हर्जाना की भी वसूली कर रहे हैं इससे रोज कमाने खाने वाले बुनकरों के सामने समस्या आ खड़ी हुई है। कोन ब्लाक के मलाधरपुर के निवासी बुनकर रामलखन का कहना है कि हम लोग दिन भर काम कर के सौ रुपये तक कमा पाते हैं।
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एक पखवारे से बाढ़ के कारण काम बंद था इससे कमाई मारी गई काती और डोरा का नुकसान हुआ सो अलग। चील्ह के बुनकर कल्लू का कहना है कि पहले से ही हम दीन हीन है। बुनकर कार्ड नहीं बना हुआ है। बाढ़ ने बर्बाद कर दिया फिर भी प्रशासनिक तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। न तो कोई बर्बादी का आकलन करने ही पहुुंचा। मलाधरपुर के रमेश बताते हैं कि 15 दिन तक बैठ कर फांकाकशी करनी पड़ी। अब काम शुरु हुआ तो उम्मीद बंधी है कि कंपनी का लिये हुए एडवांस को धीरे धीरे काम कर के चुकाया जाएगा। मंडल मुख्यालय से मात्र एक किलोमीटर दूर होने के बावजूद सरकार द्वारा बुनकरों के उत्थान के िलिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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